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PM Modi के विजन से अब इजराइल में भी चलेगा भारत का UPI, दुनिया के इन देशों में पहले ही यूपीआई मान्य

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिस डिजिटल क्रांति को आकार दिया, उसका सबसे सशक्त और प्रभावशाली प्रतीक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) यानी यूपीआई बन रहा है। अब जब इजराइल में भी भारत का यूपीआई स्वीकार्य होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है, तो यह केवल एक तकनीकी विस्तार नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता और वैश्विक विश्वसनीयता का विस्तार है। दुनिया के आठवें देश के रूप में इजराइल में यूपीआई का विस्तार इस बात का संकेत है कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र भी है। कुछ वर्षों पहले तक जहां भारत में डिजिटल भुगतान एक विकल्प था, आज वह जीवनशैली बन चुका है। गांव से महानगर तक, युवा से वरिष्ठ नागरिक तक, महिला शक्ति से लेकर अन्नदाता और व्यापारियों तक हर वर्ग ने इसे अपनाया है। कुछ ही वर्षों में यूपीआई ने जिस प्रकार घरेलू लेन-देन की तस्वीर बदली, उसी आत्मविश्वास के साथ वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी विजन ने जिस डिजिटल इकोसिस्टम को जन्म दिया, वह अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और गहरी कर रहा है। आने वाले समय में और भी देश इस नेटवर्क से जुड़ेंगे। यह न केवल भारत की आर्थिक शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि उसे डिजिटल युग के अग्रणी राष्ट्रों की श्रेणी में और सुदृढ़ करेगा।यूपीआई की शुरुआत: एक साहसिक प्रयोग से जनांदोलन तक
पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल से ही नवाचारों की शुरूआत कर दी थी। साल 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा शुरू किया गया यूपीआई, आरंभ में एक महत्वाकांक्षी प्रयोग था। इसका उद्देश्य बैंकों के बीच त्वरित, सुरक्षित और सरल डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना था। उस समय डिजिटल लेन-देन की पहुंच सीमित थी और नकदी का वर्चस्व जोरों पर था। लेकिन नोटबंदी के बाद बदले परिवेश और डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार की आक्रामक पहल ने यूपीआई को जन-जन तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया। कुछ ही वर्षों में यूपीआई ने रिकॉर्ड स्थापित कर दिए। मासिक ट्रांजेक्शन की संख्या करोड़ों से बढ़कर अरबों में पहुंच गई। आज स्थिति यह है कि भारत में खुदरा डिजिटल भुगतान का बड़ा हिस्सा यूपीआई के माध्यम से हो रहा है। किराने की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, ऑटो रिक्शा से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक, यूपीआई सर्वव्यापी हो चुका है।भारत की वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी
आईएमएफ (IMF) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट (UPI) में लगभग 49 से 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। भारत के बाद दूसरे स्थान पर आने वाले देश के बीच तीन गुना से ज्यादा का फासला है। भारत के बाद 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ ब्राजील दूसरा सबसे बड़ा देश है जो रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में आगे है। ब्राजील के बाद थाईलैंड और चीन का स्थान आता है। चीन में यह हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत ही है। भारत के दबदबे का पता इसी से चलता है कि देशभर में UPI के जरिए हर साल करीब 129 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन होते हैं। UPI अब भारत के अलावा यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों में भी उपयोग हो रहा है। भारत का UPI सिस्टम दुनिया के अन्य सभी रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म्स से बहुत आगे है।UPI से पारदर्शिता बढ़ी, नकली नोट और चोरी की आशंकाएं घटी
यूपीआई के आगमन से पहले डिजिटल भुगतान मुख्यतः कार्ड या नेट बैंकिंग तक सीमित था, जो अपेक्षाकृत जटिल और शुल्क आधारित था। यूपीआई ने इस व्यवस्था को लोकतांत्रिक बना दिया। केवल मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड के माध्यम से कुछ ही सेकंड में लेन-देन संभव हो गया। भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। हर महीने अरबों ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जिनकी कुल राशि लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच रही है। छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह वरदान साबित हुआ है। पारदर्शिता बढ़ी है, नकली नोटों और चोरी की आशंकाएं घटी हैं, तथा औपचारिक अर्थव्यवस्था का दायरा विस्तृत हुआ है।

तकनीक में वैश्विक प्रभाव और भारत की सॉफ्ट पावर
भारत के यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार केवल आर्थिक पहल नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर का विस्तार है। जिस प्रकार कभी आईटी सेवाओं ने भारत की पहचान बनाई थी, उसी प्रकार अब डिजिटल भुगतान संरचना भारत की नई पहचान बन रही है। कम लागत, उच्च सुरक्षा और सरलता—इन तीन गुणों ने यूपीआई को विशिष्ट बनाया है। आज इजराइल समेत आठ देशों ने यूपीआई को मान्यता दे दी है। इसके अलावा अनेक देश भारत के इस त्वरित डिजिटल मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। विकासशील देश तो पीछे हैं ही, विकसित देशों के लिए भी यह उदाहरण है कि किस प्रकार सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय डिजिटल ढांचा खड़ा किया जा सकता है।

आइए, अब जानते हैं कि भारत के यूपीआई मॉडल को किन-किन देशों ने मान्यता दे दी है और वहां इससे किस तरह के बदलाव और फायदे लोगों को मिल रहे हैं…

संयुक्त अरब अमीरात: प्रवासी भारतीयों के लिए नई शुरुआत
संयुक्त अरब अमीरात उन शुरुआती देशों में शामिल है जहां यूपीआई को चरणबद्ध तरीके से स्वीकार्यता मिली। 2021 से ही दुबई के बड़े स्टोर और दुबई मॉल में QR पेमेंट मान्य हो गया। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में भारतीय पर्यटकों और प्रवासी समुदाय के लिए यह सुविधा अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। नकदी विनिमय की जटिलता और कार्ड शुल्क की समस्या कम हुई है। वहां के रिटेल सेक्टर को भी तेज भुगतान और अधिक ग्राहक सुविधा का लाभ मिला है।
भूटान: स्थानीय इकोनॉमी में नकदी प्रबंधन का दबाव कम
भूटान में भी यूएई के साथ 2021 में यूपीआई की शुरुआत हुई। भूटान में यूपीआई की शुरुआत ने बहुत पुरानी भारत-भूटान मैत्री को डिजिटल विस्तार दिया। पर्यटन और सीमापार व्यापार को इससे विशेष लाभ हुआ है। भारतीय पर्यटक सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं, जिससे स्थानीय इकोनॉमी में नकदी प्रबंधन का दबाव कम हुआ है। यह दक्षिण एशिया में डिजिटल समावेशन का एक सफल उदाहरण है।
सिंगापुर: वैश्विक वित्तीय केंद्र में भारतीय नवाचार
सिंगापुर में 2023 में रिटेल स्टोर और पर्यटन जगहों पर QR भुगतान की सुविधा मिली। सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र में यूपीआई का प्रवेश भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। वहां की उन्नत बैंकिंग प्रणाली के साथ इंटरलिंक होकर यूपीआई ने सीमापार भुगतान को सरल बनाया है। भारतीय पेशेवरों और व्यापारियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है। इससे फिनटेक सहयोग के नए अवसर भी खुले हैं।

नेपाल: सीमा पार भुगतान को सरल और पारदर्शी बनाया
नेपाल में दो साल पहले 2024 में यूपीआई की सुविधा मिली। यूपीआई के क्रियान्वयन से दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है। खुली सीमा और घनिष्ठ सामाजिक संबंधों के कारण यहां डिजिटल भुगतान की सहज व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। पीएम मोदी के विजन से यूपीआई ने पड़ौसी मुल्क के छोटे व्यापारियों और यात्रियों के लिए भुगतान को सरल और पारदर्शी बना दिया है।
मॉरीशस: प्रवासी विरासत और आधुनिक तकनीक का मेल
मॉरीशस में 2024 में रुपे कार्ड और डिजिटल सेवाओं की शुरुआत हुई। मॉरीशस में भारतीय मूल की बड़ी आबादी है। वहां यूपीआई की स्वीकृति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। पर्यटन, शिक्षा और व्यापारिक लेन-देन में इसकी उपयोगिता स्पष्ट दिख रही है। तेज ट्रांजेक्शन और कम लागत ने इसे लोकप्रिय बनाया है।
श्रीलंका: त्वरित भुगतान से आर्थिक पुनर्निर्माण में सहयोग
श्रीलंका में 2024 में यूपीआई शुरू होने से दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते मजबूत हुए। श्रीलंका में आर्थिक चुनौतियों के बीच यूपीआई जैसी त्वरित प्रणाली का प्रवेश वहां की भुगतान व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने में सहायक बन रहा है। भारतीय पर्यटक और व्यापारी सीधे डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।
त्रिनिदाद और टोबैगो: यूपीआई सुविधा का कैरेबियाई विस्तार
कैरेबियाई क्षेत्र में त्रिनिदाद और टोबैगो में यूपीआई की स्वीकार्यता भारत की वैश्विक पहुंच को दर्शाती है। वहां भारतीय मूल की आबादी के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र को इससे लाभ मिल रहा है। डिजिटल भुगतान की सुविधा से व्यापार में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। इससे स्थानीय व्यवसायों को स्थिर और त्वरित भुगतान का लाभ मिल रहा है।
इजराइल में यूपीआई: रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
इजराइल के साथ भारत के संबंध रक्षा, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में पहले से मजबूत रहे हैं। अब जब यूपीआई वहां स्वीकार्य हो रहा है, तो यह दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग का नया अध्याय है। भारतीय पर्यटकों, व्यवसायियों और विद्यार्थियों को वहां भुगतान में सुविधा मिलेगी। साथ ही, इजराइली व्यापारियों को भी तेज और सुरक्षित भुगतान प्रणाली का लाभ प्राप्त होगा। यह कदम दर्शाता है कि भारत की डिजिटल संरचना वैश्विक मानकों पर खरी उतर रही है।

 

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