प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज, 30 अगस्त को जापान के 16 प्रांतों (प्रीफेक्चर्स) के गवर्नरों से बातचीत की और भारत-जापान रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में अहम संदेश दिया। यह मुलाकात जापान के साथ राज्य स्तर पर रिश्तों को मजबूत करने की एक बड़ी पहल मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत जापान की विविधता को सलाम करते हुए की। उन्होंने कहा, “इस कमरे में सैतामा की रफ्तार है, मियागी की मजबूती है, फुकुओका की जीवंतता है और नारा की विरासत की खुशबू है।” उन्होंने सभी गवर्नरों को जापान की आत्मा और ताकत का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोनों देशों के राज्यों और प्रांतों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उनके मुख्यमंत्री रहते हुए गुजरात और जापान के बीच मजबूत संबंध बने थे।
उन्होंने बताया कि आज भारत में राज्य और जिले विकास की धुरी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने One District One Product जैसे अभियान चलाए, Aspirational Districts और Vibrant Villages जैसे कार्यक्रमों से पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा में लाया। उन्होंने जापानी गवर्नरों को भारत के राज्यों के साथ मिलकर काम करने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि जापान की तकनीकी ताकत और भारत की युवा प्रतिभा अगर साथ आए, तो दुनिया में नया इतिहास लिखा जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कुछ मौजूदा साझेदारियों का जिक्र किया, जैसे कि गुजरात और शिज़ुओका, उत्तर प्रदेश और यमानाशी, महाराष्ट्र और वकायामा, आंध्र प्रदेश और तोयामा। उन्होंने जोर दिया कि यह सहयोग कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। “From paper to people to prosperity”—यानी इसे जमीन पर उतारना होगा, ताकि इसका असली लाभ लोगों तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री इशिबा के साथ उन्होंने “State-Prefecture Partnership Initiative” लॉन्च किया है। इसके तहत हर साल तीन भारतीय राज्यों और तीन जापानी प्रांतों के प्रतिनिधिमंडल आपस में दौरे करेंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले 5 वर्षों में 5 लाख लोगों के भारत-जापान एक्सचेंज को बढ़ावा मिलेगा और 50,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स जापान भेजे जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, “Tokyo और Delhi नेतृत्व कर सकते हैं, लेकिन कर्नाटका और कानागावा को आवाज़ देनी होगी। आइची और असम को साथ मिलकर सपने देखने होंगे, और ओकायामा और ओड़िशा को भविष्य बनाना होगा।” बातचीत के दौरान जापानी गवर्नरों ने भी भारत के साथ व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई और इस पहल की सराहना की। यह मुलाकात भारत और जापान के बीच रिश्तों को और गहराई देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, खासतौर पर ऐसे समय में जब दोनों देश वैश्विक स्तर पर साझा हितों को लेकर और करीब आ रहे हैं।