अमेरिकी टैरिफ वार के बीच भी इकोनॉमी के मोर्चे से बड़ी खुशखबरी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50% टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो पिछले 5 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। ट्रंप टैरिफ के बीच भारत के लिए पूर्व से संबंधों का नया सूरज उगने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान और चीन की चार दिवसीय यात्रा पर गुरुवार शाम रवाना हुए। इस बीच, सरकार टैरिफ का प्रभाव कम करने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन शुरू करने और लोन चुकाने की मोहलत बढ़ाने पर काम कर रही है। बजट में घोषित इस मिशन के तहत, सरकार छह साल (2025-31) के लिए निर्यातकों को 25,000 करोड़ का पैकेज देने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय निर्यात को नुकसान का असर टेक्सटाइल, केमिकल, मशीनरी जैसे सेक्टर पर बहुत थोड़े समय के लिए ही रहेगा।
सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का भी योगदान
वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि कुल कारोबार और जीडीपी पर लंबे समय में प्रभाव सीमित रहेगा। शुक्रवार (29 अगस्त) को जारी सरकारी डेटा में नजर भी आया। इसके मुताबिक मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन के कारण जीडीपी ग्रोथ रेट बढ़ी है। भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, क्योंकि अप्रैल-जून में चीन की जीडीपी ग्रोथ 5.2 फीसदी रही थी। पिछली तिमाही (Q4FY25) में जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रही थी। भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY26) में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है. यह डेटा न सिर्फ मनीकंट्रोल पोल के अनुमान (6.6 फीसदी) से काफी ज्यादा रहा, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान (6.5 फीसदी) को भी पीछे छोड़ दिया।
पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ की बड़ी बातें
• कृषि और संबंधित क्षेत्र में रियल GVA की बढ़ोतरी 3.7% रही, पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ये 1.5% थी।
• पहली तिमाही में सेकेंडरी सेक्टर, खासकर मैन्युफैक्चरिंग में 7.7% और कंस्ट्रक्शन में 7.6% ग्रोथ रही।
• माइनिंग और क्वार्रिंग में माइनस 3.1% और बिजली, गैस, पानी की आपूर्ति व अन्य यूटिलिटी सर्विस सेक्टर में 0.5% में ग्रोथ रही।
• 2025-26 की पहली तिमाही में टर्शरी (तृतीयक) सेक्टर में 9.3% रही, पिछले साल की इसी तिमाही में 6.8% रही थी।
• सरकारी खर्च में 9.7% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 4.0% से काफी बेहतर है।
RBI ने 6.5 प्रतिशत इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान जताया था
6 अगस्त को रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में FY26 के लिए इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा था। RBI गवर्नर ने कहा था- मानसून सीजन अच्छा चल रहा है। साथ ही, त्योहारों का सीजन भी नजदीक आ रहा है। ये अनुकूल माहौल, सरकार और रिजर्व बैंक की सहायक नीतियों के साथ, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य में अच्छा संकेत देता है। भले ही ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।
छह साल के लिए निर्यातकों को 25000 करोड़ का पैकेज देने पर विचार
इस बीच सरकार एमएसएमई कर्मचारियों के लिए ‘प्रत्यक्ष आय सहायता’ पर विचार कर रही है। इसके अलावा सरकार टैरिफ का प्रभाव कम करने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन शुरू करने और लोन चुकाने की मोहलत बढ़ाने पर काम कर रही है। बजट में घोषित इस मिशन के तहत, सरकार छह साल (2025-31) के लिए निर्यातकों को 25,000 करोड़ का पैकेज देने पर विचार कर रही है। इसे दो सब-स्कीम निर्यात प्रोत्साहन (10,000 करोड़ से अधिक) और निर्यात दिशा (14,500 करोड़ से अधिक) के जरिये लागू करने का प्रस्ताव है। उधर, वित्त मंत्री ने गुरुवार को निर्यातकों के संगठन फियो के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
पीएम मोदी की यात्रा से अब पूर्व से उगेगा संबंधों का नया सूरज
उधर प्रधानमंत्री मोदी जापान और चीन की चार दिवसीय यात्रा पर गुरुवार शाम रवाना हुए। यात्रा के पहले चरण में शुक्रवार को वे टोक्यो में उनका भव्य स्वागत हुआ। उन्होंने भारत-जापान इकोनॉमिक फोरम को भी संबोधित किया। वे तियानजिन में 31 अगस्त से एक सितंबर तक होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने चीन जाएंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अमरीकी टैरिफ से दुनियाभर में उथल-पुथल मची है और भारत चीन अमरीकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के निशाने पर हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर पीएम मोदी की चीन की छठी और जापान की आठवीं यात्रा है। जापान के पीएम शिगेरु इशिबा के साथ उनकी पहली शिखर बैठक होगी।
जापान से भारत को क्या उम्मीद
- जापान अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन (6 लाख करोड़ रुपए) निवेश कर सकता है, विशेषकर उच्च-तकनीकी निर्माण में।
- जापानी ई-10 शिंकनसेन तकनीक को लेकर समझौता संभव है, जिससे भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना को गति मिलेगी।
- सुरक्षा-समुद्री सहयोग मजबूत होगा।
- दोनों देशों ने 2008 के रक्षा समझौते को अपग्रेड करने पर सहमति जताई है।
- इससे साइबरजापान से रेयर अर्थ एलिमेंट और सेमीकंडक्टर समझौते की उम्मीद है, जिससे चीन की निर्भरता कम होगी।
राष्ट्रपति ट्रंप को सता रहा ब्रिक्स के मजबूत होने का खौफ
भारत-चीन के करीब आने से ट्रंप को ब्रिक्स के और मजबूत होने का डर सता रहा है। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने भी जिस रणनीति का जिक्र किया है, इस का खौफ अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को है। यह खौफ है चीन, रूस और भारत का एक साथ, एक मंच पर आ जाने का। एक खौफ है ब्रिक्स के मजबूत होने और डॉलर को चुनौती मिलने का। हैरानी नहीं कि मोदी की चीन यात्रा से पहले अमरीकी अधिकारियों ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को फिर से हवा देने की कोशिश की है। ट्रंप की चिंता चीन को घेरने को लेकर बनाए गए मंच क्वाड के भविष्य को लेकर भी है, जिसका गठन के केंद्र में भारत-जापान रहे हैं।
एससीओ समिट में होगी पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात
पीएम मोदी और जिनपिंग 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाली एससीओ समिट के दौरान मुलाकात करेंगे। 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी औपचारिक मुलाकात होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकालने की रणनीति को आकार दिया जाएगा। इसके पूर्व, मोदी और जिनपिंग पिछले साल अक्टूबर में ब्रिक्स समिट के दौरान रूस के कजान में मिले थे।
चीन के दौरे से भारत को ये होगा हासिल
- अमरीकी टैरिफ संकट के बीच भारत-चीन और रूस में संतुलन रखते हुए व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा संभव।
- कैलास-मानसरोवर यात्रा बहाली और दोनों देशों के बीच उड़ान सेवा।
चीन, भारतीय कृषि उत्पाद-आइटी के लिए बाजार खोल सकता है। - चीन ने फिर से रेयर अर्थ मैग्नेट्स, उर्वरक की आपूर्ति भारत को शुरू कर दी है।
- क्रिटिकल मिनरल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी में सहयोग की संभावना।
- भारतीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में चीनी निवेश फिर से शुरू हो सकता है।