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कांग्रेस के ‘युवराज’ को क्यों भाता है विदेश प्रवास?

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा सुर्खियों में है। ये इसलिए नहीं कि बर्कले के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स के बीच खुलकर अपनी बात रखी, बल्कि इसलिए कि उन्होंने विदेश में जाकर सरकार की आलोचना नहीं करने की भारतीय राजनीति की स्थापित परंपरा को तोड़ दिया। हालांकि ये राहुल गांधी की अपनी समझ है और ये उनका लोकतांत्रिक अधिकार भी है, लेकिन इन सबके बीच सवाल ये है विदेश यात्रा से क्या घर में भी बदलाव ला पाएंगे राहुल? क्या कांग्रेस के भी ‘अच्छे दिन’ ला पाएंगे?

दरअसल पिछले दो साल में राहुल गांधी की ये आठवीं विदेश यात्रा थी, लेकिन उनके अधिकतर विदेश दौरे के बारे में यह भी पता ही नहीं लगता है कि वे कहां गए और किसलिए गए? बहरहाल आइए हम नजर डालते हैं राहुल के कुछ ऐसे ही विदेश दौरों पर जो चर्चा में रहे हैं।

राहुल की नॉर्वे की यात्रा का सच क्या है?
अगस्त के आखिरी पखवाड़े में राम रहीम, डोकलाम और विपक्षी एकता के मुद्दे पर देश में बड़ी हलचल रही। विरोधी दलों द्वारा सत्ताधारी दल को घेरने की पुरजोर कोशिशें भी हुईं। लेकिन विपक्षी एकता की धुरी बनने का ख्वाब देखने वाले ‘युवराज’ पूरे सीन से ही गायब रहे। बीते 25 अगस्त को ही वे नॉर्वे की राजधानी ओस्लो चले गए, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक जानकारी भी साझा नहीं की गई। हालांकि उन्होंने एक ट्वीट कर इसकी जानकारी जरूर दी कि वे कुछ दिनों तक विदेश दौरे पर रहेंगे, लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष ने वहां क्या कुछ किया इसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है, हां उनके द्वारा पहनी गई बंद गले की सूट जरूर सुर्खियां बटोर ले गई है। दरअसल इसी सूट के मुद्दे पर वे पीएम मोदी पर हमलावर रहे हैं और अपने आपको कुर्ते पायजामा (जमीन) का नेता बताते रहे हैं।

राहुल को क्यों भाता है विदेश प्रवास?
बहरहाल अपनी ही बातों को Contradict करते सूट-बूट पहने राहुल गांधी NBIM के प्रमुख यंगिव से बातचीत कर रहे हैं। दरअसल राहुल हर साल 2 से 3 बार विदेशी टूर पर नियमित तौर पर निकल जाते हैं लेकिन वे सवाल पीएम मोदी के विदेश दौरों को लेकर उठाते हैं। राहुल के विदेश प्रवास को देखें तो पता चलेगा कि कांग्रेस के  ‘युवराज’ ने दो साल में इन आठ विदेशी यात्राओं में 72 दिनों से अधिक देश से बाहर रहे… जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने 32 देशों की यात्रा 54 दिनों मेंं की। 

राहुल के विदेश दौरे पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन भारत की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का यूं बार-बार विदेश दौरे पर जाना और वह भी ‘गोपनीय’ तरीके से, थोड़ा संदिग्ध जरूर लगता है। हालांकि अमेरिका और नॉर्वे दौरे को छोड़ दें तो उनकी विदेश यात्राएं एक mystery बन गयी हैं।

PM मोदी को घेरने का मौका लेकिन राहुल फिर 'गायब'

जरूरत के वक्त क्यों विदेश भाग जाते हैं राहुल ?
सवाल इसलिए भी उठने लगते हैं कि पिछले कुछ समय से कांग्रेस पार्टी समस्याओं से घिरी हुई है और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उनकी विदेश यात्रा उस वक्त होती है जब पार्टी को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। अब सवाल है कि पार्टी की स्थिति को ठीक करने के बजाए राहुल गुपचुप विदेश यात्राओं पर क्यों निकल जाते हैं? जाहिर तौर पर राहुल गांधी विदेश में आत्मचिंतन करने तो नहीं ही जाते होंगे? तो फिर राज क्या है?

किस ‘संस्कृति’ से मिलने विदेश जाते हैं राहुल? 
राहुल गांधी पर आरोप लगते रहे हैं कि वो हर अहम मौकों पर पार्टी को बीच मझधार में छोड़कर विदेश भाग जाते हैं। हाल ही में इसका उदाहरण तब भी देखने को मिला जब राष्ट्रपति चुनाव के लिये रणनीति बनानी थी, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ कर कहीं चले गये थे। हालांकि जब भी उनकी ऐसी हरकतों पर सवाल उठने लगते हैं, तो उनकी पार्टी उनका बचाव करने लगती है। इस साल जनवरी में नोटबंदी का विरोध प्रदर्शन छोड़ दिया तो पिछले जून में सहारनपुर और मंदसौर पर सियासी नौटंकी करने के बाद वो अचानक इटली चले गये और कहा कि नानी से मिलने जा रहे हैं।

कांग्रेस ने उनका फौरन बचाव किया और कहा कि परिवार के बुजुर्गों की देखभाल करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन कांग्रेस वाले इसका जवाब नहीं दे पाते कि विदेश यात्राओं को चोरी-छिपे पूरा करना कौन सी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है? वो विदेशों में भारत की ओर से दी गई सबसे शक्तिशाली सुरक्षा ले जाने से क्यों कतराते हैं ? उन्हें कौन सी पोल खुलने का भय सताता रहता है ?

60 दिन की लंबी गुपचुप विदेश यात्रा
राहुल की सबसे चर्चित छुट्टी फरवरी, 2015 की थी, जब वो अचानक देश से बाहर चले गए थे और 60 दिन बाद दिल्ली लौटे। बाद में पता चला कि वह बैंकॉक और म्यांमार घूमने गये थे। कहा गया कि मानसिक तनाव से मुक्ति के लिये उन्होंने इन देशों की यात्राएं की हैं। तब का उनका यात्रा विवरण भी दिलचस्प है-

• 16 फरवरी को दिल्ली से बैंकॉक के लिए उड़ान भरा
• 17 फरवरी को बैंकॉक से कंबोडिया गये और वहां 11 दिनों तक ठहरे
• 28 फरवरी को वापस बैंकॉक आ गए
• अगले दिन म्यांमार पहुंच गये और वहां लगातार 21 दिनों तक विश्राम किया
• 22 मार्च को वापस थाइलैंड पहुंचे और अयुथ्या बौद्ध केन्द्र में 9 दिन रहे
• 31 मार्च को वियतनाम पहुंचे और 12 अप्रैल तक वहीं ठहरे
• 12 अप्रैल को एक बार फिर बैंकॉक पहुंच गये और 16 अप्रैल तक वहीं आराम किया। फिर वापस दिल्ली लौट आये।

विदेश यात्राओं को छिपाते क्यों हैं राहुल ?
कुछ खास वजहों से राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं को गोपनीय रखना चाहते हैं। गुजरात के बनासकांठा में उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंके जाने के मामले पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने संसद में कहा है कि राहुल ने पिछले दो सालों में 6 देशों की 72 दिनों तक यात्राएं की हैं, लेकिन इन सभी यात्राओं में SPG सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया। सवाल उठता है कि राहुल गांधी देश की जनता से अपनी विदेश यात्राओं को छिपाना क्यों चाहते हैं ?

राहुल गांधी की छुट्टियों पर एक नजर –

  • 25 अगस्त, 2017 को राहुल गांधी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो चले गए। ये दौरा उस वक्त हुआ जब 27 अगस्त को बिहार में विपक्षी एकता की ताकत दिखाने को लालू प्रसाद रैली कर रहे थे। इसी दौर में चीन के साथ डोकलाम विवाद भी चल रहा था । 
  • 13 जून,2017 को जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था और कांग्रेस पार्टी हमलावर थी तो राहुल गांधी इटली नानी से मिलने चले गए।  
  • 6 और 9 जनवरी, 2017 को जब कांग्रेस पार्टी देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रही थी तो राहुल गांधी विदेश में रहे। 
  • दिसंबर 2016 में जब कांग्रेस पार्टी नोटबंदी को लेकर विरोध कार्यक्रमों की धार तेज कर रही थी, राहुल ठीक उसी वक्त विदेश चले गए। उनकी गैरमौजूदगी ने विरोध की धार को कुंद कर दिया।
  • बीते वर्ष देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का माहौल था। उसी समय राहुल गांधी अपनी खाट सभाओं को छोड़कर नए साल की छुट्टियां मनाने लंदन थे।
  • 2015 में भी बिहार चुनाव के ठीक पहले राहुल गांधी फ्रांस में थे।
  • राहुल की सबसे चर्चित छुट्टी फरवरी 2015 की थी। वह अचानक देश से बाहर चले गए और जब 57 दिनों बाद दिल्ली लौटे तो पता चला कि वह बैंकाक, म्यामांर घूमने गए थे। उन्होंने ध्यान करना भी सीखा।
  • राहुल गांधी नवंबर 2014 में अचानक गायब हो गए थे। सवाल संसद तक में उठा तो कांग्रेस को बचाव में उतरना पड़ा था।
  • राहुल गांधी 2014 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले गुप्त स्थान पर छुट्टियां मनाने चले गए थे। इसी बीच एक खुली जीप पर घूमते राहुल की फोटो सामने आई थी और बताया गया था कि यह रणथंभौर के नेशनल पार्क की है।
  • उत्तराखंड बाढ़ के समय जून 2013 में भी राहुल गांधी विदेश में छुट्टी मना रहे थे। उस वक्त उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी।
  • 16 दिसम्बर 2012 को हुए निर्भया बलात्कार और हत्या मामले में दिल्ली और देशभर में छिड़े आंदोलन के बीच भी उनके पास युवाओं की आवाज बनने का मौका था लेकिन उस समय भी राहुल गांधी विदेश दौरे पर थे।
  • साल 2012 में हद तब हो गई थी जब वे नए साल की छुट्टियां मनाने फ्रांस चले गए थे जिसमें एक फोटो में वो एक युवती के साथ दिखाई दिए थे।

किस secret मिशन पर जाते हैं राहुल?
पिछले साल ही जब राहुल गांधी बार-बार विदेश की सीक्रेट यात्राओं पर जा रहे थे, तभी से सियासी हलकों और सोशल मीडिया पर इस बात की अटकलें लग रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि राहुल गांधी विदेश में शादी कर चुके हैं और उन्होंने राजनीतिक नुकसान के डर से पत्नी को बाहर ही रखा हुआ है। इसलिए क्योंकि सोनिया गांधी के बाद लगातार दूसरी विदेशी बहू की वजह से देश में तरह-तरह की बातें शुरू हो सकती हैं। इन दावों की अभी तक कोई पुष्टि या इसके समर्थन में कोई तथ्य उपलब्ध नहीं है। हालांकि पिछले ही साल बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस बात के कागजात पेश किए थे कि राहुल गांधी ने ब्रिटिश नागरिकता भी ले रखी है। वहां पर उनकी एक कंपनी भी है, जिसके दस्तावेजों में उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक लिखा है। दावा है कि ब्रिटेन में राहुल गांधी के कारोबार की देखरेख उनकी कथित पत्नी करती है। इन्हीं से मिलने के लिए वो हर कुछ महीने पर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं।

जरूरत के वक्त राजीव गांधी ने भी छोड़ा था देश
राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले भारतीय वायु सेवा में नियमित पायलट थे। सन् 1971 में जब भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ था, तब भारत सरकार ने सभी पायलटों की छुट्टियां रद्द कर दी थी। उस दौरान इंडियन एयरलाइंस में सिर्फ एक पायलट को छुट्टी दी गई थी और वह पायलट थे कांग्रेस (ई) के युवराज और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुपुत्र राजीव गांधी।

भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राजीव गांधी, सोनिया गांधी और अपने बच्चों प्रियंका और राहुल के साथ स्वदेश छोड़ दिया और इटली चले गए। उन्हें किस बात का डर था? राजीव गांधी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन सोनिया गांधी हैं। उन्हें बताना चाहिए कि 1971 के युद्ध के समय जब देश के सभी पायलटों की छुट्टियां रद्द की गई, तब राजीव गांधी को छुट्टी कैसे और क्यों मिली? राजीव गांधी इटली से सपरिवार भारत तब लौटे जब युद्ध का बवंडर शांत हो चुका था। पाकिस्तानी सेना का मेजर जनरल आत्मसमर्पण कर चुका था। यानि जब देश की सेवा करने का वक्त आया तो राजीव गांधी ने पीठ दिखा दी।

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सोनिया के फॉरेन टूर का राज क्या है?
सोनिया गांधी जन्म से भारतीय नहीं हैं। राजीव गांधी से विवाह होने के बाद वह भारत आईं। सोनिया गांधी ने विवाह के वर्षों बाद भारत में नागरिकता के लिए आवेदन दिया और अधिकारिक रूप से भारत की नागरिक बनीं। सोनिया गांधी सार्वजनिक मंच से कहती हैं कि वह आखिरी सांस तक भारतीय रहेंगी। सच बात है… अधिकारिक रूप से वह भारत की नागरिक हो चुकी हैं। लेकिन दिल से भारत को अपना देश अब भी अपना नहीं पाईं हैं, उनके लिए आज भी भारत विदेश है और इटली स्वदेश। ऐसा कहने या मानने का आधार ये है कि देश को अब तक नहीं पता कि वह किस बीमारी से पीड़ित हैं, जिसका इलाज कराने बार-बार अमेरिका जाती हैं। क्या उस बीमारी का इलाज इस देश में नहीं है या यहां के स्वास्थ्य तंत्र पर भरोसा नहीं है? यह एक उदाहरण है।Image result for सोनिया विदेश में

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