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उपलब्धियां 2017: खाद्य प्रसंकरण के क्षेत्र में भारत सबसे पसंदीदा निवेश स्थल बनने की ओर अग्रसर, देखिए मंत्रालय की 10 बड़ी पहल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बेहतर और आकर्षक निवेश स्थल बनने की ओर अग्रसर है। इसी दिशा में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MOFPI) फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है जो किसानों की आय दोगुनी करने में भी मददगार साबित होगा। देखते हैं वर्ष 2017 में मंत्रालय की 10 बड़ी पहल और उपलब्धियां:

1. ‘वर्ल्ड फूड इंडिया 2017’ से बढ़ी भारत की ताकत

दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक ‘भारतीय व्यजनों का कुंभ मेला’ वर्ल्ड फूड इंडिया (WFI) का आयोजन किया गया जिसमें 27 राज्यों और 800 वैश्विक व घरेलू भागीदारों के साथ ही 61 देशों और ग्लोबल सीईओ ने भाग लिया। प्रदर्शनी के दौरान फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन एंड वोमेन एंत्रप्रेन्योर्स पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया था ताकि वे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संभावनाओं से जुड़ सकें और नये अवसरों के रास्ते खुलें।

2. भारत सबसे पसंदीदा निवेश-गंतव्य के रूप में प्रदर्शित

WFI 2017 में भारत को सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में प्रदर्शित किया गया। इस दौरान घरेलू और विदेशी निवेशकों के साथ 13.56 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। इन मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए इन्वेस्ट इंडिया में एक विशेष शाखा की स्थापना की गई है। गौर करने वाली बात है कि वर्ल्ड फूड इंडिया की वजह से वैश्विक खाद्य फैक्ट्री में भारत की स्थिति भी बेहतर हुई। बिजनेस के लिए सुगम माहौल और ढांचे के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है।

3. निवेशक पोर्टल- ‘निवेश बंधु’ की शुरुआत

वर्ल्ड फूड इंडिया के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘निवेश बंधु’-निवेशक के पोर्टल की शुरुआत की। इस अनूठे पोर्टल का उद्देश्य केंद्रीय और राज्य सरकार की नीतियों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए प्रदान किये जाने वाले प्रोत्साहन के बारे में जानकारी एकत्र करना है। यह किसानों, प्रोसेसर, व्यापारियों और रसद ऑपरेटरों के लिए व्यापार नेटवर्किंग के लिए एक मंच भी है।

4. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

यह एक अंब्रेला योजना है जिसमें मेगा फूड पार्क, एकीकृत कोल्ड श्रृंखला और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य सुरक्षा और क्वालिटी एश्योरेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित योजनाएं शामिल हैं। यह नई योजना खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और खाद्य व्यापार को एकीकृत करने के साथ ही किसानों के लिए बड़े पैमाने पर अवसरों के नए द्वार खोलेगी और इससे उनके लिए रोजगार बढ़ने के साथ ही उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।

5. निवेश प्रोत्साहन के लिए टैक्स में छूट

कोल्ड श्रृंखला परियोजनाओं में पूर्व-कंडीशनिंग, प्री-कोडिंग, खुदरा पैकेजिंग और फलों व सब्जियों के लेबलिंग पर सेवा कर में छूट दी गई। यह कोल्ड चेन ऑपरेटरों को कर छूट के मामले में एक बड़ी राहत है क्योंकि यह सुविधा केवल किसानों को फार्म गेट पर उपलब्ध थी, लेकिन कोल्ड चेन ऑपरेटरों के लिए नहीं थी। इसने कोल्ड चेन प्रोजेक्ट की उपयोगिता को बढ़ाया है जिससे क्षेत्र में अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके।

6. इन्वेस्टमेंट ट्रैंकिंग एवं फैसिलिटी डेस्क

मंत्रालय में इन्वेस्ट इंडिया को लेकर इन्वेस्टमेंट ट्रैकिंग एवं फैसलिटी डेस्क की स्थापना की गई है। डेस्क नए संभावित निवेशकों की पहचान और निवेश के लिए एक केंद्रित और संरचित तरीके से उनसे संपर्क करेगा और साथ ही हाथों-हाथ सेवाएं प्रदान करके निवेश के मामलों पर अगला कदम उठाएगा। यह डेस्क भारत और विदेशों में रोड शोज के आयोजन में मंत्रालय की सहायता करेगा और निवेश बैठक भी आयोजित करेगा।

7. डेयरी प्रसंस्करण और विकास निधि की स्थापना

नाबार्ड में 8,000 करोड़ रुपये का डेयरी प्रसंस्करण और विकास निधि की स्थापना की गई है। सहकारी क्षेत्र में विशेष रूप से पुराने और अप्रचलित दूध प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए फंड का उपयोग किया जाएगा और इसके परिणामस्वरूप दूध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी जिससे किसानों के उत्पाद को अधिक मूल्य मिले और उनकी आय में वृद्धि हो।

8. ‘मेगा फूड पार्क’ किसान-बाजार के बीच एक कड़ी

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की मेगा फूड पार्क योजना के तहत आधुनिक ढांचे का निर्माण कर किसानों और बाजार के बीच एक श्रृंखला बना दी जाएगी ताकि क्लस्टर आधारित व्यवस्था बन सके। इस योजना के तहत भारत सरकार मेगा फूड पार्क के लिए 50 करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद मुहैया करा रही है। इस वर्ष अब तक नौ मेगा फूड पार्क का उद्घाटन किया गया जबकि चार का शिलान्यास किया गया। एक मेगा फूड पार्क से 5,000 लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रोजगार मिलने के अलावा लगभग 25,000 किसानों के लाभान्वित होने की संभावना है।

9. उद्योगों के लिए जीएसटी सुविधा केंद्र

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने अपने दफ्तर में एक चार सदस्यीय जीएसटी सुविधा केंद्र स्थापित किया है ताकि उद्योग को नई टैक्स व्यवस्था के साथ निर्देशित किया जा सके। मंत्रालय ने कार्यान्वयन के उद्देश्य के लिए जीएसटी सेल बनाया है और तत्काल प्रभाव से जीएसटी को सुगम बनाने में मदद की है। जीएसटी सुविधा केंद्र से संबंधित प्रमुख उद्योग और व्यापार संघों के लिए लेवी के रोलआउट के लिए हरसंभव समर्थन प्रदान करता है। यह सेल मंत्रालय से संबंधित किसी भी मुद्दे का समाधान करने के लिए पहले संपर्क के रूप में कार्य करता है।

10. राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति में खुदरा बाजार पर जोर

राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति पर दृष्टिकोण पत्र MOFPI वेबसाइट पर अपलोड किया गया है और सुझाव सभी हितधारकों व आम जनता से आमंत्रित किये गए हैं। राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति, भारत के राष्ट्रीय खाद्य ग्रिड और राष्ट्रीय शीत श्रृंखला ग्रिड के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी और देश के कोने-कोने में खुदरा बाजार तैयार करेगी।

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