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उज्ज्वला ने संवारा ग्रामीण महिलाओं का भविष्य, अबतक 3.36 करोड़ को एलपीजी कनेक्शन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ चुका है। वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को साकार करने में महिलाओं की बड़ी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित कई योजनाओं को मूर्त रूप दिया है। इस उज्ज्वला योजना से देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल चुकी है। इस योजना के अंतर्गत अबतक 3.36 करोड़ गैस के नए कनेक्शन बांटे भी जा चुके हैं। उज्ज्वला योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में गरीब महिलाओं को घर पर एक कनेक्शन के बदले सरकारी एजेंसियों को 1600 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। इसके साथ स्टोव खरीदने और पहला रीफिल कराने पर सरकार किस्तों में पैसा चुकाने की भी सुविधा देती है।

8 करोड़ परिवारों को मिलेगा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब महिलाओं को बीमारी से मुक्ति दिलाने और उनके चेहरे पर खुशी लाने के लिए 1 मई, 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरूआत की थी। हालांकि इस योजना तहत पांच करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस चूल्हा और कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन इस योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर आठ करोड़ का फैसला किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक योजना तैयार की है, जिसमें उन गरीब परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। सरकार इसकी घोषणा बजट में या उससे पहले कर सकती है। ताकि 2025 तक सभी घरों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बढ़ावा
वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को साकार करने में महिलाओं की बड़ी भूमिका देखते हुए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत उन परिवारों को शामिल किया गया है, जिनका नाम सामाजिक-आर्थिक जनगणना- 2011 की सूची में शामिल है, लेकिन अब एससी-एसटी वर्ग, वनवासियों, अति पिछड़े वर्ग और द्वीपों के निवासियों समेत कुछ अन्य कैटिगरी के लोगों को भी नए गैस के कनेक्शन दिए जाएंगे।। ताकि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं को मिल सके और उनका सशक्तीकरण हो सके।

मिट्टी के चूल्हे से मिलेगी आजादी 
प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे से आजादी दिलाने का संकल्प लिया है। यह संकल्प उज्ज्वला योजना के माध्यम से पूरा होता दिखाई दे रहा है। इस योजना ने देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी बदली है। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में देवली तहसील के पिंपलगांव के मंगेश रायमल की भी जिंदगी अब बदल चुकी है। मंगेश इस बात को लेकर काफी खुश हैं कि जिंदगीभर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने वाली उनकी बूढ़ी मां को अब ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत गैस का सिलेंडर मिल गया है।

इंडियन एक्स की खबर के मुताबिक मंगेश की मां देवकाबाई जब चूल्हे पर खाना बनातीं और लकड़ियों के जलने से जो धुआं उनकी आंखों में लगता था, वह उनके लिए बहुत ही पीड़ादायक था। अब मंगेश को लगा है कि उज्ज्वला योजना देश की सभी मांओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को निजी रूप से धन्यवाद देने के लिए सीधे खत लिखने का विचार बनाया।

गरीब महिलाओं को वायु प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति
मोदी सरकार उज्ज्वला योजना के तहत देश के ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं को खाना पकाने के दौरान धुएं के कहर से मुक्ति दिलाने में जुटी हुई है। वहीं लकड़ी पर निर्भरता भी खत्म करना चाहती है। इससे पेड़ों की कटाई पर रोक लगेगी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

गरीबों के आंसू पोंछने में मोदी सरकार जिस तरह से सामने आई है… उसकी शायद दूसरी मिसाल नहीं। ये एक समाज-कल्याण योजना है, जिसे ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं के लिए गैस चूल्हा अभी एक सपना है। इस सपने को साकार करने के लिए ही उज्ज्वला योजना के जरिए कोशिशें की जा रही हैं।

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