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नागरिकता संशोधन बिल पर उद्धव करेंगे ओवैसी संग गलबहियां !

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शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंंत्री उद्धव ठाकरे पर हिन्दुत्व विचारधारा छोड़ने के आरोप लग रहे हैं। मीडिया में इस तरह की तमाम खबरें आ रही हैं कि सत्ता के लिए उन्होंने विचारधारा से समझौता कर लिया है। हिन्दुत्व विचारधारा त्यागने के बाद अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि उद्धव और उनकी पार्टी भी नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रही है। 

नागरिकता संशोधन बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है और जल्द से इससे संसद में पेश किया जाएगा। उद्धव ठाकरे सीएम की कुर्सी से चिपके रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उद्धव ठाकरे ने अब तक सोनिया और शरद पवार के प्रति अपनी वफादारी के कई सबूत दिए हैं। 

महाराष्ट्र में मुस्लिमों को आरक्षण

शिवसेना मुस्लिम आरक्षण का विरोध करती आई है लेकिन मीडिया की खबरों के मुताबिक उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनीसीपी के दबाव में मुस्लिमों को आरक्षण देने के लिए तैयार हो गए हैं और इसके लिए मराठी लोगों को हक को काटने की बात सामने आ रही है। मालूम हो कि शिवसेनाा राज्य में मराठा आरक्षण को बढ़ावा देने की बात करती आई है। 

राम जन्मभूमि से किया किनारा  

सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे राम जन्मभूमि मंदिर मुद्दे को छोड़ने के लिए तैयार हो गए। उद्धव ठाकरे ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में हिन्दुत्व को छोड़ सेक्यलुर बन गए हैैं। सभी को मालूम है कि शिवसेना की विचारधारा हिन्दुस्तव की रही है और हर चुनाव में वो इस मुद्दे को भुनाती रही है और जनता से वोट मांगती रही है।

सेक्यलुरिज्म का बुर्का पहना 

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया है जिसके तहत तीनों पार्टियों के बीच हिन्दुत्व मुद्दे को छोड़ने की सहमति बनी है। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम  के तहत हुई इस सहमति को अमली जामा पहनाने के लिए उद्धव ठाकरे ने हिंन्दुत्व के मुद्दे को छोड़ने का फैसला किया है। 

भीमा कोरेगांव में शामिल लोगों को छोड़ने का आरोप

राकांपा नेता और विधायक धनंजय मुंडे ने पुणे में भीमा-कोरेगांव हिंसा से संबंधित मामलों को वापस लिए जाने की मांग की है। सोशल मीडिया पर ऐसी खबर आ रही है कि भीमा कोरेगांव में हिन्दुत्व को बांटने की साजिश में खड़े लोगों को छोड़ने का फैसला किया है। सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई करने का फैसला किया है।

नागरिकता संशोधन बिल का विरोध 

नागरिक संशोधन बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है और इसे संसद में पेश करने की तैयारी है। लेकिन खबरों के मुताबिक शिवसेना ने इस बिल को विरोध करने का फैसला किया है। इससे पहले शिवसेना नागरिकता संशोधन बिल के हमेशा पक्ष में रही है। 

 

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