Home तीन साल बेमिसाल मोदी सरकार ने देश में शिक्षा का किया कायाकल्प

मोदी सरकार ने देश में शिक्षा का किया कायाकल्प

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पिछले तीन साल से मोदी सरकार ने मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में जिस तरह से काम किया है वो बहुत ही सराहनीय है। किसी देश की मानव शक्ति कैसी होगी, ये इसपर निर्भर करता है कि उस देश में शिक्षा का स्तर कैसा है? जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो इसी बात को ध्यान में रखकर ‘सबको शिक्षा,अच्छी शिक्षा’ के संकल्प को लेकर अपनी योजनाओं को कार्यरूप देना शुरू किया। मानव विकास की हर नीतियों और योजनाओं में देश की आवश्यकताओं को देखते हुए संसाधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक राष्ट्र की पहचान वहां रहने वाले मानव शक्ति से होती है। अगर मानव शक्ति को गुणवान बनाया जाए तभी देश में वो बदलाव आ सकता है और प्रधानमंत्री मोदी के न्यू इंडिया का सपना साकार हो सकता है।

‘सबको शिक्षा,अच्छी शिक्षा’ का संकल्प
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ‘सबको शिक्षा,अच्छी शिक्षा’ के संकल्प को पूरा करने के लिए तीन मूल मंत्र लेकर के अपनी योजनाओं को मूर्तरूप दे रहा है।

देश का जनमानस: 125 करोड़ मानव शक्ति देश के सबसे प्रमुख संसाधन हैं। उनके संपूर्ण विकास के लिए जितनी भी आवश्यकताएं हैं उनमें शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

नीतियां एवं योजनाएं: मोदी सरकार ने मानव संसाधन विकास के लिए जितनी भी नीतियां या योजनाएं तैयार की हैं वो सभी व्यक्ति और राष्ट्र के निर्माण पर केंद्रित है। सरकार मानती है कि ये तभी संभव है जब देश की शिक्षा-व्यवस्था बेहतर और सुदृढ़ हो।

डिजिटल क्रांति और गुणवत्ता: डिजिटल क्रांति के युग में दुनिया की चौहद्दी बहुत सिमट गई है। अगर हमने विश्व के बदलते परिवेश के साथ अपने आपको तैयार नहीं किया, तो हमारी वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को बड़ी मार झेलनी पड़ेगी। ये तभी संभव है जब हमारी शिक्षा प्रणाली गुणवत्ता से भरी हो, वो प्रतियोगी विश्व का सामना करने में सक्षम हो। इसके लिए ये बहुत आवश्यक है कि हम डिजिटल तकनीक को आत्मसात कर लें, जिसकी आवश्यकता शिक्षा की शुरुआती स्तर से ही महसूस की जाने लगी है।

स्कूली शिक्षा का हो रहा है कायाकल्प

केंद्र सरकार स्कूलों, छात्रों, आध्यापकों और स्कूल प्रबंधन का डिजटलीकरण करके उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने की ओर जोर-शोर से प्रयासत है। इस दिशा में जो बेहतरीन कार्य किए जा रहे हैं, वो इस प्रकार हैं-

आधार: 30 नवंबर 2016 तक 5 से 18 वर्ष की उम्र के 24,49,20,190 बच्चों को आधार से जोड़ दिया गया था, जो उनकी कुल जनसंख्या का लगभग 70 प्रतिशत है।

e-Sampark: 50,077, 29 शिक्षकों से संबंधित आंकड़ों को e-Sampark पोर्टल से जोड़ दिया गया है।

GIS mapping: स्कूलों को Geographic information system से जोड़ दिया गया है। इससे किसी भी बस्ती से एक उचित दूरी पर स्कूलों की कमी को पूरा करने में आसानी हुई है। इस प्रकार देश के सभी स्कूलों के आंकड़े और जानकारी U-DISE (Unified District Information System for Education)पर उपलब्ध है। इससे जमीनी स्तर पर चल रही योजनाओं और उसपर होने वाले धन खर्च की जानकारी मिल सकती है।

स्कूलों में शौचालय: प्रधानमंत्री ने लालकिले से अपने पहले संबोधन में 15 अगस्त 2014 को हर स्कूलों में बालक –बालिकाओं के लिए अलग से एक साल के अंदर शौचालय बनाने का वादा किया था। ये काम पूरा कर लिया गया है।

e-patshala: दोषरहित अध्ययन सामाग्री को उपलब्ध कराने के लिए e-patshala शुरू की गई है, जहां सभी पुस्तकें और अन्य अध्ययन सामाग्री उपलब्ध हैं।

शाला दर्पण: स्कूलों के कारगर प्रशासन व्यवस्था के लिए शाला दर्पण के तहत उन्हें school management system से जोड़ा गया है। 5 जून 2015 को 1099 केंद्रीय विघालयों से इसकी शुरुआत हुई।

शाला सिध्दि योजना: स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 7 नवंबर 2015 से शाला सिध्दि योजना को शुरु की गई है। इस पोर्टल पर सभी स्कूल निर्धारित सात मापदंडों के आधार पर स्वंय का मूल्याकंन करते हैं, जो सभी के लिए उपलब्ध होता है।

मिड डे मील: मोदी सरकार ने मिड डे मील में होने वाली गड़बड़ियों को ई पोर्टल और आधार नबंर की मदद से काफी हद तक कम कर दिया है। इसके लिए बजट से होने वाले धन आवंटन को वास्तविकता पर आधारित करने का प्रयास किया गया है। मंत्रालय के अनुसार आधार के चलते फर्जी नामों कमी आई है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार झारखंड और आंध्रप्रदेश से ऐसे 4 लाख फर्जी नाम हटा दिए गए हैं। इससे सरकारी खजाने का बोझ बहुत कम हुआ है-

विज्ञान एवं अंकगणित का एक पाठ्यक्रम: बदलते समय में विज्ञान और गणित की प्रमुख भूमिका को देखते हुए सरकार ने इसमें अपेक्षित बदलाव किया है। अब सभी राज्यों के बोर्ड में NCERT के पाठ्यक्रम पर आधारित शिक्षा ही दी जायेगी।

शगुन: केंद्र सरकार प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों और प्रगति से छात्रों और शिक्षकों को जोड़ने की कोशिशों में जुटी हुई है। इस को देखते हुए सर्व शिक्षा अभियान के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल ‘शगुन’का शुभारंभ किया गया है।

केंद्र सकार के प्रभावी नीतियों के चलते 6 से 13 वर्ष की उम्र के अधिक से अधिक बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक इस वर्ग में 20.78 करोड़ बच्चे हैं। U-DISE के अनुसार 2015-16 में 19.67 करोड़ बच्चे देश के 14.49 लाख प्राइमरी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। प्राइमरी से हाइयर प्राइमरी में प्रवेश लेने वाले बच्चों का औसत 2009-10 के 83.53 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 90.14 प्रतिशत हो गया है। यही नहीं अब केन्‍द्रीय विद्यालयों के लिए ऑनलाइन दाखिला फॉर्म की शुरुआत भी कर दी गई है। शिक्षक-छात्र का अनुपात भी बेहतर हुआ है। 2009-10 में 32 छात्रों पर एक शिक्षक थे, वह अनुपात 2015-16 में 24 छात्रों पर एक शिक्षक तक आ गया है। इसके अलावा रिक्‍त पदों को भरने के लिए लगभग 6,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

उच्च शिक्षा का भी हो रहा है बड़ा विस्तार

नई शिक्षा नीति: सरकार ने समय की आवश्यक्ता को देखते हुए शिक्षा नीति में बदलाव का फैसला किया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों, अध्यापकों, नीति निर्माताओं, सांसद और विधायकों से सुझाव मांगे गए हैं। आम नागरिकों से भी ऑनलाइन राय मांगी गई है। इन सभी सुझावों पर सरकार अंतिम रूप से विचार करने के बाद जल्द ही देश के सामने एक नई शिक्षा नीति लेकर आएगी।

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA): ये मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत राज्यों के उच्चतर शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता के स्तर को बढ़ाने की कोशिश हो रही है। RUSA के मानदंडों को पूरा करने पर राज्य की शिक्षण संस्थाओं को विशेष वित्तीय सुविधा और योजनाऐं दी जाती हैं। इस अभियान की सभी जानकारियों को ऑनलाइन या ऐप के माध्यम से सभी स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।

National Assessment and Accreditation Council(NAAC): मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत ये सर्वोच्च संस्था है जो देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का मूल्याकंन करती है। पहले मूल्याकंन के लिए NAAC अपनी टीम भेजता था जो मौके पर मानदंडों को परखते थे। इसमें भ्रष्टाचार का बोलबाल था। इसको खत्म करके मोदी सरकार ने Self Assessment की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। जो इस साल जुलाई से लागू होगी।

National Institutional Ranking Framework (NIRF): देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए 2016 से इस रैंकिग सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया है। इस रैकिंग सिस्टम में देश के सभी कॉलेजों और विश्विघालयों की गुणवत्ता के निर्धारित मानदंडों के आधार पर रैंकिग की जाती है। ‘भारत रैंकिंग 2017’ में कुल 2,995 संस्थानों ने भाग लिया । इसके अंतर्गत 232 विश्वविद्यालय, 1024 प्रौद्योगिकी संस्थान, 546 प्रबंधन संस्थान, 318 फार्मेसी संस्थान तथा 637 सामान्य स्नातक महाविद्यालय शामिल हैं।

Global Initiative for Academic Network ( GIAN ): इस योजना के तहत देश के उच्च शिक्षण संस्थाओं को विश्व के किसी भी देश के विशेषज्ञ को शिक्षण के लिए बुलाने का अवसर मिलता है।

उन्नत भारत अभियान: मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय ने मिलकर इस योजना की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ 12 जनवरी 2017 को हुआ। इसके अंतर्गत उच्चतर शिक्षण संस्थाएं चुने हुए नगर निकायों और गांवों के समूहों को विकास कार्यो की योजना बनाने और लागू करने में सहयोग देंगी। प्रथम चरण के लिए आईआईटी दिल्ली संयोजक संस्था के रूप में काम कर रहा है।

स्मार्ट इंडिया हैकथान 2017: 1-2 अप्रैल 2017 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्व के सबसे बड़े 36 घंटों वाले हैकथान का आयोजन किया। इसके उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने युवाओं से बातचीत की। इसमें 42,000 युवा प्रतियोगियों ने भाग लिया और विभिन्न मंत्रालयों की ऐसी 598 समस्याओं का डिजिटल समाधान दिया जिससे काम की गति के साथ-साथ गुणवत्ता में भी सुधार हो। इन सभी समाधानों के विकास का खर्च संबंधित मंत्रालयों को उठाना है।

Impacting Research Innovation and Technology (IMPRINT) India: राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम में सभी IIT एवं IISc जैसी संस्थां जुड़ी हैं। ये संस्थाएं देश के 10 प्रमुख क्षेत्रों में शोध कर रही हैं। वो हैं-

1.Health care technology

2. Energy security

3.Rural urban housing design

4.Nano technology

5. Water/river system

6. Advanced materials

7. Computer science

8.Manufacturing technology

9.Advanced security और

10. Environment/climate change

इन क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं पर कुल 2600 प्रस्ताव आए जिनमें से 892 प्रस्तावों को प्रमुख वैज्ञानिकों की समिति ने स्वीकार कर लिया, इनमें से 259 प्रस्तावों के क्रियान्यवयन के लिए 559.89 करोड़ रुपये की धन राशि भी आवंटित की जा चुकी है।

हायर ऐजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी (HEFA): 12 सितंबर 2016 को केंद्रीय कैबिनट ने HEFA के स्थापना को मंजूरी दी। यह एजेंसी उच्च शिक्षण संस्थाओं में अन्तराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं एवं अन्य साधनों को उपलब्ध कराने के लिए धन की व्यवस्था करेगी। केनरा बैंक को सरकार ने इसका प्रमोटर बनाया है। इसमें सरकार की 1000 करोड़ रुपये कि हिस्सेदारी है। सभी उच्च शिक्षण संस्थान इससे लोन लेने के लिए योग्य होंगे। सरकार लोन के ब्याज का भार उठाएगी, जबकि शिक्षण संस्थाओं को केवल मूलधन चुकता करना होगा।

यही नहीं केंद्र सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के विस्तार के लिए 7 नए आईआईएम, 6 नए आईआईटी, एक नया केंद्रीय विश्वविद्यालय, एक नया आईआईटीटी, एक नया एनआईटी , 104 से भी अधिक केन्द्रीय विद्यालय और 62 नए नवोदय विद्यालय खोले हैं।

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