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खाद्यान्न के बंपर उत्पादन से अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

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मौजूदा खरीफ मौसम में फसलों की पैदावार बंपर होने वाली है। एक अनुमान के मुताबिक कम से कम भी होगा तो पिछले साल के रिकॉर्ड 138 मिलियन टन से ज्यादा पैदावार होगी। जानकारों के मुताबिक खाद्य पदार्थों पर मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के साथ ही यह देश की आर्थिक विकास को मजबूत समर्थन देगा।

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बेहतर मानसून से जगी उम्मीद
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते शुक्रवार (28 जुलाई) तक 791 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है जो कि पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत ज्यादा है। देश भर में पिछले आठ हफ्तों से मानसून की अच्छी बारिश ने खेती में मदद की है। जुलाई तक औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 24 जुलाई तक 403 एमएम बरसात हुई है। विभाग ने कहा कि आगे भी अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।

फसलों की बुआई में आई तेजी
अच्छी बरसात के कारण खरीफ बुआई पिछले साल की समान अवधि में 18 प्रतिशत अधिक हो चुकी है। फसलों की बुआई में आई तेजी इस साल धान की बुआई प्री मानसून बारिश के चलते लगभग एक सप्ताह पहले ही शुरू हो चुकी है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 30 प्रतिशत तक धान की बुआई हो चुकी है। इसके अलावा महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान में दलहन बुआई भी तेजी से हो रही है।

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दालों के उत्पादन में वृद्धि का अनुमान
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा दालों के समर्थन मूल्य में वृद्धि से दालों की पैदावार बढ़ने की सभावना है। वर्ष 2016-17 में दालों का कुल उत्पादन 22.40 लाख टन हो गया, जो 2015-16 में 16.35 मिलियन था। दरअसल दालों से ज्यादा नकदी देने वाला कोई अन्य फसल नहीं है इसलिए किसान इस पर जोर दे रहे हैं।

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खुदरा मुद्रा स्फीति दर में कमी
जून में खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति में -2.12% कमी हुई है। फसलों की बंपर पैदावार के कारण इस पूरे वित्तीय वर्ष ( 2017-18) में इसके कम रहने के अनुमान हैं।

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