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कश्मीरियत पर आघात कर रहे आतंकी गुटों में पड़ी फूट

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प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से कहा था,  न गाली से न गोली से बल्कि गले लगाने से कश्मीर की समस्या हल होगी। एक तरफ सरकार की तरफ से गले लगाने की पहल जारी है। दूसरी तरफ विश्व परिदृश्य में पीएम मोदी के प्रयासों से आतंकवाद के विरुद्ध वातावरण तैयार किया जा चुका है। वहीं कश्मीर में आतंक के समूल सफाये का संकल्प लिए सुरक्षा बल अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। लगातार मारे जा रहे आतंकियों का असर आतंकी संगठनों की एकता पर भी पडऩे लगा है। कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गुट हिजबुल मुजाहिद्दीन और अलकायदा एक दूसरे पर पुलिस और सुरक्षा बलों से मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।

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हिजबुल का गद्दार है जाकिर मूसा !
दक्षिण कश्मीर की गलियां आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन ने पोस्टर्स के जरिये अपने पूर्व कमांडर जाकिर मूसा पर आरोप लगाये गए हैं कि वह कश्मीरियों की हत्या में भारतीय सेना की मदद कर रहा है। इसमें लोगों से अपील की गई है कि मूसा जहां भी मिले, पकड़कर मार डालो। दरअसल हिजबुल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से घबराया हुआ है और एक के बाद एक बड़े आतंकियों के मारे जाने से परेशान है।

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कश्मीरियत को खत्म करना चाहता है मूसा
कश्मीर के लोग भी अब यह मान रहे हैं कि आतंकियों का मंसूबा कश्मीर को स्वतंत्र करवाना नहीं बल्कि वहां इस्लामी साम्राज्य कायम करना है। दरअसल कश्मीर अपने सूफी कल्चर के लिए जाना जाता है। लेकिन आतंकियों के इस मकसद को जानने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। खास तौर पर जाकिर मूसा जिसने इसी साल मई में हिजबुल का साथ छोड़ दिया था और जुलाई में अलकायदा मुखिया बना था।

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एक-एक कर मारे जा रहे बड़े आतंकी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आतंकियों के विरुद्ध अपनाई गई सख्ती का परिणाम है कि आतंकी गुट आपस में ही सिर फुटव्वल कर रहे हैं। आतंकियों के विरुद्ध कार्रवाई के तहत बीते चंद महीनों में 148 आतंकी मारे जा चुके हैं। इन आतंकियों में से 17 लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और अल-बद्र के टॉप कमांडर थे।

कुख्यात आतंकियों का खात्मा
पिछले साल बुरहान वानी के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद हाल में जो आतंकी मारे गए हैं उनमें ए++ कैटेगरी का पाकिस्तानी आतंकी अबु दुजाना लश्करे तैयबा का साउथ कश्मीर का डिवीजनल कमांडर था। सबजार अहमद बट्ट हिजबुल-मुजाहिदीन का कमांडर था। जुनैद लश्कर का कमांडर था। यासीन इट्टू उर्फ ‘गजनवी’ हिजबुल मुजाहिदीन के एक टॉप कमांडर था। इनके अलावा बशीर वानी, सद्दाम पद्दर, मोहम्मद यासीन और अल्ताफ मारे गए हैं। ये सब सुरक्षा बलों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में थे।

ढेर हुए आतंकी के लिए चित्र परिणाम

मारे गए प्रमुख आतंकियों की सूची-

  • बुरहान मुजफ्फर वानी, हिजबुल मुजाहिदीन
  • अबु दुजाना, लश्कर ए तैयबा कमांडर
  • बशीर लश्करी, लश्कर ए तैयबा
  • सब्जार अहमद बट्ट, हिजबुल मुजाहिदीन
  • जुनैद मट्टू, लश्कर ए तैयबा
  • सजाद अहमद गिलकर, लश्क ए तैयबा
  • आशिक हुसैन बट्ट, हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर
  • अबू हाफिज, लश्कर ए तैयबा
  • तारिक पंडित, हिजबुल मुजाहिदीन
  • यासीन इट्टू ऊर्फ गजनवी, हिजबुल मुजाहिदीन
  • अबू इस्माइल, लश्कर ए तैयबा

इंटेलिजेंस इनपुट सुधार से मिल रही सफलता
दरअसल कश्मीर में विदेशी आतंकवादियों और स्थानीय गिरोहों के बीच टकराव पैदा हो गया है। विदेशी और स्थानीय आतंकी गिरोहों के बीच टकराव होने के कारण सुरक्षा बलों को गोपनीय सूचनाएं मिलती हैं, जिनके आधार पर सुरक्षा बल कार्रवाई करते हैं। दुजाना और लश्करी जैसे आतंकियों के मारे जाने से यह साफ है कि स्थानीय लोगों से लश्कर और जैश से जुड़े विदेशी आतंकियों से जुड़े इंटेलिजेंस इनपुट्स ज्यादा बेहतर ढंग से मिल रहे हैं।

आतंकियों पर रहम नहीं की नीति पर अमल
सरकार कश्मीर को लेकर मुख्य तौर पर तीन बिंदुओं पर फोकस कर रही है। आतंकी सरेंडर करने से इनकार करते हैं तो उन्हें खत्म कर दिया जाए। इसके लिए सुरक्षाबल एनकाउंटर वाली जगहों पर स्थानीय लोगों के प्रदर्शनों से बेअसर रहते हैं। इसके साथ ही टेरर फंडिंग से जुड़े हुर्रियत अलगाववादियों पर एक्शन हो रहा है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों के प्रति नरम रुख अपनाया जा रहा है ताकि वे लोग खुद को पीड़ित या हाशिये पर न महसूस करें।

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बॉर्डर पर सेना को कार्रवाई की मिली छूट
पाकिस्तान से आने वाले आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए सेना हर कदम पर कुछ ठोस कर रही है। जुलाई महीने के दौरान घुसपैठ में मददगार नौगाम और नौशेरा में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को ध्वस्त कर दिया गया। पहली बार सेना ने कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया था। दरअसल ये भारत की सैन्य कूटनीति के बदलाव की कहानी कहती है। सीमा पर पाकिस्तान के नापक मंसूबों को नाकाम किया जा रहा है। पिछले साल सर्जिकल स्ट्राइक कर भारत ने साफ संदेश दे दिया था कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की चोरी छिपे युद्ध वाली नीति अब नहीं चलने वाली।

‘खोजो और मारो’ का अभियान
11 जुलाई को अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर हमले के बाद अब कश्मीर में आतंकियों को जिंदा पकड़ने की बाध्यता को खत्म करते हए ‘खोजो और मारो’ की नयी नीति बनाई गई है। सरकार की इस नयी नीति से आतंक के खिलाफ केंद्र सरकार के कठोर संकल्प का पता चलता है। ‘खोजो और मारो’ अभियान के साथ ही साथ दूसरी रणनीति भी शुरू हो चुकी है, ये रणनीति है आबादी में ‘घेरो, जंगल में मारो’।

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जान बचाने को फिक्रमंद हैं आतंकी
सुरक्षा बलों की सतर्कता और मोदी सरकार की आतंकमुक्त कश्मीर नीति की वजह से आतंकवादी अब जान बचाने की फिक्र में हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई से डरकर आतंकी भाग रहे हैं। सेना के एक्शन के कारण एक तो नये आतंकवादियों की भर्ती नहीं पा रही है ऊपर से हाल ये है कि जितनी भर्ती होते हैं उससे दोगुने आतंकवादियों को ढेर कर दिया जा रहा है। राज्य में अलगाववादी अब अपनी गतिविधियों के लिए विदेशी घुसपैठियों पर अधिक निर्भर रह रहे हैं।

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आतंकियों से स्थानीय लोगों का मोहभंग
सुरक्षा बलों ने विशेष मास्टर प्लान तैयार किया है जिसके तहत टॉप आतंकी कमांडरों को लगातार ढेर किया जा रहा है। इतना ही नहीं इन आतंकियों द्वारा स्थानीय महिलाओं के संबंधों का खुलासा होने से लोगों का विदेशी आतंकियों से मोहभंग हुआ है। दरअसल आतंकियों की नजर स्थानीय युवतियों पर होती है जो लोगों को नागवार गुजर रहा है।

अबु दुजाना के लिए चित्र परिणाम

जिहाद के नाम पर लोगों का समर्थन नहीं
पुलिस ऑफिसर अयूब पंडित की Lynching के बाद स्थानीय लोगों में आतंकियों के विरुद्ध आक्रोश भड़क गया है। स्थानीय लोगों के समर्थन से अब ऐसा माहौल तैयार हो गया है कि आतंकी अपनी जान बचाने की फिक्र कर रहे हैं। दूसरी तरफ स्थानीय युवकों को जिहाद के नाम पर भड़का नहीं पा रहे हैं। इससे आतंकी संगठनों में हताशा और निराशा का माहौल पैदा होता है।

कश्मीर में मारे गए प्रमुख आतंकियों की सूची के लिए चित्र परिणाम

 

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