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सोनिया जी, कांग्रेस एक ‘मुस्लिम पार्टी’ ही है!

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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इसकी छवि एक ‘मुस्लिम पार्टी’ की बना दी है। सोनिया गांधी की पीड़ा इस बात से जाहिर हो रही है, क्योंकि कभी देश के 100 प्रतिशत भू-भाग पर राज करने वाली कांग्रेस का दायरा सिमट कर महज 7 प्रतिशत तक आ गया है। 2014 में यूपीए के कार्यकाल के दौरान 13 राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं जो अब महज चार बच गई है।  सोनिया गांधी के दर्द को इस आधार पर भी समझा जा सकता है कि देश की बहुसंख्यक आबादी ने कांग्रेस से किनारा कर लिया है।

सोनिया गांधी भले ही कांग्रेस की ‘मुस्लिम पार्टी’ छवि से परेशान दिखने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन क्या उनकी चिंता वाकई में सच है? दरअसल आजादी के बाद से कांग्रेस के कृत्यों पर गौर करें तो ये साफ है कि कांग्रेस पार्टी हिंदू विरोधी और मुस्लिम परस्त रही है। आइये इसे तथ्यों के आईने में देखते हैं-

हिंदू राष्ट्र का विरोध
बाबा साहब अम्बेडकर की पुस्तक- ‘दि डिक्लाइन एंड फाल आफ बुद्धिज्म’ में स्पष्ट है कि पं नेहरू ने कहा था, ”हिंदू राष्ट्र का केवल एक ही मतलब है, आधुनिक सोच को पीछे छोड़ना, संकीर्ण होकर पुराने तरीके से सोचना और भारत का टुकड़ों में बंटना।’’
यहां यह बताना आवश्यक है कि बाबा साहब की प्रबल इच्छा थी कि जब धर्म के आधार पर देश का बंटवारा हुआ है तो सारे मुस्लिम पाकिस्तान चले जाएं, लेकिन नेहरू ने अपनी मुस्लिम राजनीति के कारण ऐसा नहीं होने दिया।

जब बाबा साहब ने दिया इस्तीफा
बाबा साहब अम्बेडकर ने जब संविधान में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही तो मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए पंडित नेहरू ने इसका विरोध किया। बाबा साहब ने नेहरू की इसी मुस्लिम परस्ती से तंग आकर 27 सितंबर 1951 को संसद से इस्तीफा दे दिया।

वंदे मातरम का विरोध
आजादी के बाद यह तय था कि वंदे मातरम राष्ट्रगान होगा, लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया और कहा कि वंदे मातरम से मुसलमानों के दिल को ठेस पहुंचेगी।

मंदिर पुनर्निमाण का विरोध
हिंदुओं के सबसे अहम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को दोबारा बनाने का जवाहरलाल नेहरू ने विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि सरकारी खजाने का पैसा मंदिरों पर खर्च नहीं होना चाहिए। दरअसल उन्हें डर था कि इससे मुस्लिमों में नाराजगी बढ़ेगी।

नसबंदी में हिंदुओं की हानि
आपातकाल के दौरान 1975 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में नसबंदी अभियान शुरू किया गया। मुस्लिमों के विरोध के कारण यह अभियान सफल नहीं हुआ, लेकिन इसका नुकसान हिंदुओं को उठाना पड़ा। दरअसल अधिकारियों को महीने के हिसाब से टारगेट दिए गए और उनकी रोज समीक्षा होने लगी। इसको पूरा करने के लिए अधिकारियों ने करोड़ों हिंदुओं की ही नसबंदी कर दी जबकि मुस्लिम आबादी बढ़ती रही।

बदल डाला देश का कानून
वर्ष 1987 सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा शाहबानो के फेवर में अपना फैसला देते हुए पति को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया, लेकिन मुस्लिमों ने पर्सलन लॉ में दखल कहा और विरोध किया। तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम वोट बैंक को बचाने के लिए पर्सलन लॉ में कोर्ट के दखल को न सिर्फ गलत ठहराया, बल्कि संसद से एक कानून भी पास करा लिया।

हिंदुओं पर गोलियां चलवाईं
1990 में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने हिंदू कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, उसमें 28 हिंदू लोग मारे गए। कहा जाता है कि मुलायम सिंह की इस हरकत के पीछे भी कांग्रेस का हाथ ही नहीं दिमाग भी था।

गोधरा नरसंहार पर राजनीति
27 फरवरी, 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर मुस्लिमों ने 59 कार सेवकों को जिंदा जला दिया। कांग्रेस ने इसके बाद हुए दंगे को आधार बनाकर खूब राजनीति की और 2004 में केंद्र की सत्ता पर काबिज हो गई। गोधरा कांड के दोषियों को छोड़ दिया गया और उनके विरुद्ध केस कमजोर कर दिए गए। कांग्रेस की इसी करस्तानी के कारण मुख्य आरोपी मौलाना उमर को रिहा कर दिया गया।

मुस्लिम आरक्षण की मांग
वर्ष 2004 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में मुसलमानों को आरक्षण दिलाने का वादा किया था। इसी आधार पर चलते हुए तेलंगाना की टीएसआर सरकार ने मुस्लिमों को आरक्षण दे दिया। कांग्रेस आरक्षण का दायरा पूरे देश में फैलाना चाहती है जबकि धर्म के आधार पर हमारे संविधान में आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

जयेंद्र सरस्वती को जेल
कांचीपुरम के वरदराजपेरुमल मंदिर के प्रबंधक शंकररामण की हत्या  3 सितंबर 2004 को कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कांचि कामपीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को प्रमुख आरोपी बनाया गया था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ में खुलासा किया है कि सोनिया गांधी ने ऐसा हिंदुओं को नीचा दिखाने और मुस्लिमों की तुष्टिकरण के लिए किया है। 

मुस्लिमों का पहला हक
10 दिसंबर, 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय विकास परिषद में भाषण के दौरान कहा कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। अपनी मुस्लिम परस्ती और देश को तोड़ने वाली हरकत के लिए कांग्रेस ने आज तक माफी नहीं मांगी।

भगवा आतंकवाद की साजिश
18 फरवरी, 2007 को समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट केस में दो पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों को पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था, लेकिन महज 14 दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया। इसके बाद इस केस में स्वामी असीमानंद को फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद को अमली जामा पहनाया जा सके।

मुस्लिम नहीं, हिंदू खतरा
17 दिसंबर, 2010 को विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ”भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।”

नमाज के लिए 90 मिनट
18 दिसंबर, 2016 को उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने राज्य के मुस्लिम कर्मचारियों को शुक्रवार के दिन 90 मिनट का अतिरिक्त अवकाश देने का फैसला किया।

राम मंदिर निर्माण विरोध
1949 से अब तक राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस ने सिर्फ और सिर्फ राजनीति की है, जबकि देश की 85 प्रतिशत आबादी की इच्छा है कि जिस राम जन्मभूमि पर भगवान राम का जन्म हुआ है वहीं मंदिर का निर्माण हो।

सच्चर कमिटी का गठन
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 में दिल्ली हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। इसके पीछे भी मुस्लिम वोट बैंक को साधने के राजनीतिक निहितार्थ थे। इस कमेटी को लागू करने के बाद मुसलमानों को आरक्षण देने की साजिश रची गई थी।

मुजफ्फरनगर मुस्लिम प्रेम
16 सितंबर, 2013 को राहुल गांधी यूपी के मुजफ्फरनगर में दंगा पीड़ितों से मिलने पहुंचे। यहां उन्होंने मुस्लिम समुदाय के पीड़ितों से तो मुलाकात की परन्तु हिंदुओं से नहीं मिले।

कश्मीरी पंडितों पर खामोशी
1990 के दशक में हजारों कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से भगा दिया गया, उनकी संपत्ति लूट ली गई, महिलाओं के साथ अत्याचार किया गया, लेकिन कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आज तक कुछ नहीं कहा। न ही कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए कुछ किया और न ही उन्हें मुआवजा ही दिया।

तीन तलाक और राम की तुलना
16 मई, 2016 को सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और AIMPLB के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जिस तरह राम हिंदुओं के लिए आस्था का सवाल है उसी तरह तीन तलाक और हलाला मुसलमानों की आस्था का मसला है। साफ है कि कांग्रेस और उसके नेतृत्व की हिंदुओं की प्रति उनकी सोच को ही दर्शाती है।

 

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