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मन की बात : देश से लेकर विदेश तक रेडियो से सामाजिक क्रांति

'रेडियो से सामाजिक क्रांति' का दायरा अब ग्लोबल हुआ

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एक तरफ आतंकवाद पर सख्त रुख तो दूसरी तरफ पर्यावरण मामले पर संवेदनशीलता। विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व करने का दम हो या फिर उभरते भारत की सशक्त अगुआई करने का खम… इन सबको एक साथ साधने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योग्यता ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है। कई लेवल पर उन्हें आज एक ग्लोबल लीडर का दर्जा मिल चुका है। दिनों दिन उनके बढ़ते कद के साथ उनकी लोकप्रियता में भी लगातार वृद्धि होती जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ किस कदर बढ़ा है इस बात का पता तो उनकी जनसभाओं, उनके सोशल मीडिया अकाउंट से भी लगता है। लेकिन 3 अक्टूबर, 2014 को शुरू हुए ‘मन की बात’ कार्यक्रम की जबरदस्त लोकप्रियता ने उनके व्यक्तित्व को और ऊंचा मुकाम दिया है। जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का पीएम मोदी का यह मासिक कार्यक्रम केवल भारत में ही नहीं विदेशों में भी काफी सराहा जा रहा है। स्पष्ट है कि रेडियो से सामाजिक क्रांति का दायरा अब ग्लोबल हो गया है।


10 में हर दूसरा भारतीय सुनता है MKB
ऑल इंडिया रेडियोज ऑडियंस रिसर्च विंग के सर्वे के मुताबिक 10 लोगों में हर दूसरा व्यक्ति प्रधानंत्री की मन की बात सुनता है। इसमें हर समाज के, हर तबके के लोग शामिल हैं। इस सर्वे को 600 लोगों की टीम ने जनवरी-मार्च के दौरान 30 राज्यों के 6000 लोगों पर किया। सबसे खास ऑल इंडिया रेडियो की पहुंच देश के 99 प्रतिशत भाग तक है।

बिहार में सबसे ज्यादा सुना जाता है MKB
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ के सबसे ज्यादा श्रोता बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश से हैं। लेकिन इस प्रोग्राम को लेकर सबसे ज्यादा जागरुक मणिपुर, असम और राजस्थान के लोग हैं। ऑल इंडिया रेडियोज ऑडियंस रिसर्च विंग के सर्वे के मुताबिक इस प्रोग्राम को लेकर अरुणाचल प्रदेश के लोगों में भी जागरूकता आनी शुरू हो गई है।

रेडियो से सामाजिक क्रांति का माध्यम है MKB
प्रधानमंत्री मन की बात में उन मुद्दों को उठाते हैं जिसे किसी परिवार के मुखिया या अभिभावक को उठाना चाहिए। माता-पिता का सम्मान, सामाजिक असमानता, प्रदूषण, किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी, सामाजिक समरसता, परीक्षा, युवाओं की समस्याओं जैसे मुद्दों पर पीएम मोदी संवाद स्थापित करते हैं। इस पर प्रतिक्रियाएं मंगवाते हैं और उसका जवाब भी देते हैं। स्वच्छता अभियान, सेल्फी विद डॉटर, बोर्ड परीक्षा में अधिक नंबर लाने के लिए बच्चों पर दबाव न डालने जैसी बातें लोगों के दिलों में उतरती हैं और वे उनपर अमल भी करते हैं। साफ है कि मन की बात के माध्यम से पीएम मोदी देश के अभिभावक की भूमिका निभाते हैं।


150 देशों में होता है मन की बात का प्रसारण
आकाशवाणी पर हर महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों की भी सराहना मिलती है।
करीब 150 देशों में किए जा रहे इस प्रसारण पर विदेशों से अच्छी प्रतिक्रिया भी मिलती है। खासतौर पर अफ्रीकी देशों से बड़ी संख्या में संदेश मिलते हैं जहां गुजराती मूल के लोग बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से भी लोग अपनी प्रतिक्रिया भेजते हैं।

ई-मेल के आंकड़ों से पॉपुलेरिटी का अंदाजा
रेडियो द्वारा जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक मन की बात को जुलाई, 2016 के बाद ऑस्ट्रेलिया से 753 ई-मेल, संयुक्त राज्य अमेरिका से 541कनाडा से 507 ईमेल, कनाडा से 507 ई-मेल और बांग्लादेश से 608 ई-मेल से प्रतिक्रियाएं मिली हैं।

व्हाट्स एप पर भी मिलती हैं प्रतिक्रियाएं
व्हाट्सप एप पर मोदी सरकार को संदेश भेजने वालों में पूर्वी अफ्रीकी देशों से 2,794 मैसेज और लीबिया सहित खाड़ी देशों से 1,296 प्रतिक्रियाएं मिली हैं। वहीं बांग्लादेश के श्रोताओं ने व्हाट्स एप पर 811, संयुक्त राज्य से 784 मैलेज प्राप्त हुए हैं। फेसबुक और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर बांग्लादेश से 276 प्रतिक्रियाएं आईं है।

25 हजार से ज्यादा चिट्ठियां
मन की बात कार्यक्रम को लेकर आकाशवाणी के दफ्तर में करीब 10 हजार से ज्यादा चिट्ठियां आती हैं। पीएमओ में भी 10 हजार से ज्यादा चिट्ठियों के जरिये सुझाव आता है। कुल मिलाकर एक मन की बात कार्यक्रम के लिए औसतन 25 हजार लोगों की चिट्ठियां आती हैं। इतना ही नहीं सूत्रों के मुताबिक हर महीने 25 हजार लोग मन की बात कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव फोन करके रिकॉर्ड करवाते हैं। इसके अलावा नरेंद्र मोदी एप पर औसतन 5 हजार लोगों के कमेंट आते हैं।

आकाशवाणी-दूरदर्शन और प्राइवेट चैनलों पर प्रसारण
रेडियो और दूरदर्शन और सभी एफ एम चैनलों पर इसका प्रसारण होता है। जिसकी पहुंच देश के सभी न्यूज चैनलों और अखबारों को मिलाकर भी देश में सबसे ज्यादा है। दूरदर्शन के रीजनल चैनलों पर भी इसका प्रसारण होता है। कार्यक्रम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम 30 भाषाओं और बोलियों में अनुवादित और प्रसारित होता है। सारे निजी चैनल भी मन की बात कार्यक्रम का प्रसारण करते हैं।
मिस्ड कॉल से मन की बात सुनने वाले लोग ज्यादा
एक आंकड़े के मुताबिक नरेंद्र मोदी एप के जरिये औसतन 25 हजार लोग कार्यक्रम को सुनते हैं। लेकिन जो लोग ‘मन की बात’ लाइव सुन नहीं पाते, वो मिस्ड कॉल करके अपने मोबाइल पर सुनते हैं। अब तक 4.5 करोड़ से ज्यादा लोग इसे अपने मोबाइल पर सुन चुके हैं। इसके साथ ही ये तथ्य भी है कि जो लोग मिस्ड कॉल करके मन की बात कार्यक्रम को सुनते हैं, वो औसतन 17 मिनट तक प्रधानमंत्री को सुनते हैं।

आकाशवाणी के इनकम में इजाफा
लगातार घाटे में चलने वाले आकाशवाणी ने मन की बात स्लॉट की विज्ञापन दरें ज्यादा रखी हैं। जिससे आकाशवाणी की कमाई में भारी वृद्धि हुई है।
आकाशवाणी का कमर्शियल इनकम प्रति वर्ष सौ प्रतिशत से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम से वर्ष 2015 में आकाशवाणी ने 2.45 करोड़ रुपए की कमाई की थी, जबकि वर्ष 2016 में इससे करीब 4.80 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।

रेडियो पर ब्लॉकबस्टर है ‘मन की बात’
मार्केटिंग कंपनियों को रेडियो की ताकत का एहसास काफी पहले से है। देश के दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में सिर्फ आकाशवाणी की पहुंच है। ये वो क्षेत्र हैं जहां प्रिंट और टीवी विज्ञापनों की पहुंच लगभग न के बराबर है। चूंकि ‘मन की बात’ के बहाने महीने में एक रविवार के दिन श्रोताओं की संख्या लाखों और कभी-कभी करोड़ों में होती है। इसलिए यह विज्ञापन देने के लिए भी बेहतरीन मौका था।

‘मन की बात’ पर ज्यादा विज्ञापन दर
मोदी के कार्यक्रम की लोकप्रियता को भांपकर आकाशवाणी ने इस स्लॉट में एड रेट्स बढ़ा दिए। इस समय यह दर पिछले वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच की लाइव कमेंट्री से भी ज्यादा है। प्रधानमंत्री के बोलना शुरू करने से पहले के ब्रेक में 10 सेकेंड के विज्ञापन के लिए 2 लाख रुपये से ज्यादा मिल रहे हैं। जबकि भारत के किसी क्रिकेट मैच के दौरान 10 से 15 हजार प्रति 10 सेकेंड की दर होती है। बाकी कार्यक्रमों के समय विज्ञापन की दरें तो और भी कम हैं। एफएम चैनल अपने कार्यक्रमों में 10 सेकेंड के 500 रुपये से 1500 रुपये लेते हैं।

क्षेत्रीय भाषाओं में भी होता MKB का प्रसारण
आकाशवाणी के लिए उत्साहपूर्ण यह है कि पीएम मोदी के प्रसारण के बाद क्षेत्रीय भाषाओं में उनके अनुवाद की भी काफी डिमांड है। अभी 14 भारतीय भाषाओं में 240 रेडियो स्टेशनों से भी इसका प्रसारण होता है। यह प्रसारण उसी दिन, लेकिन कुछ समय के बाद होता है। आकाशवाणी इन स्लॉट्स के लिए रीजनल विज्ञापनदाताओं पर फोकस कर रही है। इस रणनीति का भी काफी फायदा हुआ है। इसकी वजह से दूर-दराज के छोटे रेडियो स्टेशन भी सरकारी खजाने में फायदा भेजने लगे हैं।

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