Home विपक्ष विशेष गौरी लंकेश के बहाने लेफ्ट का एजेंडा चलाते तथाकथित सेक्युलर

गौरी लंकेश के बहाने लेफ्ट का एजेंडा चलाते तथाकथित सेक्युलर

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एक महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या होती है और हत्या के तुरंत बाद मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है। बिना किसी जांच, गवाह या साक्ष्य के सीधे केंद्र सरकार को इस हत्या के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। लेफ्ट विचारधारा वाले पत्रकारों के इस धड़े ने जांच शुरू होने तक का भी इंतजार करना जरुरी नहीं समझा। इससे साफ है कि इनका ना तो भारतीय न्याय प्रणाली में विश्वास है और न ही भारतीय संविधान में। यही नक्सली मानसिकता है। लेफ्ट विचारधारा वाले पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की और ट्विटर पर #BlockNarendraModi कैंपेन चलाया। हालांकि इसका विपरित असर हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई। लेकिन यह पूरा प्रकरण किसी भी लोकतंत्र के लिए न सिर्फ खतरा है, बल्कि उनकी यह करतूत देश को शर्मसार करती है।   

अब इसमें कोई दो राय नहीं है कि गौरी लंकेश लेफ्ट विचारधारा वाली और बीजेपी विरोधी पत्रकार थीं। लेफ्ट और तथाकथित सेक्युलर कांग्रेसी नेताओं से उनकी सांठगांठ थी। लेफ्ट और नक्सलियों से उनकी नजदीकियां जगजाहिर हो चुकी हैं और इन्हीं लोगों से उनका विवाद भी चल रहा था। यह बात उनके ट्विटर अकाउंट और उनकी पृष्ठभूमि से साफ हो जाती है। क्या कोई पत्रकार किसी एक विचारधारा विशेष का अनुयायी हो सकता है। अगर ऐसा है तो क्या वह पत्रकार कहलाने के काबिल थीं, लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है कि देश में ऐसे पत्रकारों की बिरादरी सक्रिय है, जो पत्रकारिता की आड़ में अपना ऐजेंडा चला रहे हैं। मौका मिलते ही यह बिरादरी सक्रिय हो जाती है। दरअसर ऐसा करने वाले पत्रकार, पत्रकार कहलाने के काबिल नहीं हैं। 

कांग्रेस सरकार पर सवाल क्यों नहीं उठाये गए 
गौरी लंकेश की हत्या कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरु में हुई। उनकी हत्या के लिए लेफ्ट विचारधारा वाले पत्रकार कर्नाटक की सिद्धारमैया नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से सवाल करने की बजाय प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने में जुटे हुए हैं। पत्रकारों के इस धड़े ने राज्य में कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली सिद्धारमैया सरकार पर सवाल उठाने की बजाय इस मौके का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी को इस हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराने और उनको कटघरे में खड़ा कर मीडिया ट्रायल शुरु करने के लिए किया। ऐसे में उनकी नीयत पर शक होना लाजमी है। 

गौरी लंकेश और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी शक के घेरे में 
पत्रकार गौरी लंकेश की लेफ्ट के अलावा कांग्रेस से भी सांठगांठ थी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से उनकी नजदीकियां थी। उनके पास मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के एक विधायक डीके शिव कुमार के भ्रष्टाचार से जुड़ी कुछ जानकारियां भी थी। कांग्रेसी विधायक डीके शिव कुमार ही वो शक्स हैं, जिसने गुजरात कांग्रेस के विधायकों को अपने लग्जरी रिसोर्ट में ठहराकर राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत सुनिश्चित की थी। डीके शिव कुमार की अकूत संपति की जांच चल रही है। क्या गौरी लंकेश के तार भी इस भ्रष्टाचार से जुड़े थे, यह जांच का विषय है। गौरी लंकेश के परिवार के सदस्यों के बयान भी लगातार बदल रहे हैं। इससे उनकी मंशा पर भी शक होना स्वाभाविक है।  मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एसआईटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिये हैं, जबकि कई मंचों से मामले की सीबीआई जांच की मांग उठ चुकी है। इससे उनकी नीयत पर भी संदेह होता है।   

प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने की कोशिश 
लेफ्ट विचारधारा से जुड़े पत्रकार मीडिया ट्रायल तक ही नहीं रुके, प्रधानमंत्री मोदी को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। ये कथित सेक्युलर पत्रकार प्रधानमंत्री पर आरोपों की बौछार की मंशा से देश की राजधानी स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जुटते हैं और अपना मंच लेफ्ट के नेताओं के हवाले कर देते हैं। यह सब खेल किया जाता है विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर। लेफ्ट विचारधारा से जुड़े पत्रकारों के इस धड़े की असल मंशा देश को भी लेफ्ट नेताओं और नक्सलियों के हवाले करने की है। लेफ्ट विचारधारा से जुड़े पत्रकारों की यह जमात 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले से ही मोदी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त थी। तभी से समय-समय पर प्रधानमंत्री को बदनाम करने के लिए लगातार षडयंत्र रचने में जुटी हुई है और गाहे-बगाहे अपनी भड़ास निकालती रहती है।

तथाकथित सेक्युलरिस्ट और भ्रष्टाचार का गठजोड़  
नक्सल, तथाकथित सेक्युलरिस्ट और भ्रष्टाचार का गठजोड़ न सिर्फ मीडिया के भीतर, बल्कि मीडिया के बाहर भी सक्रिय है। इस गठजोड़ का एक ही मकसद है प्रधानमंत्री और मोदी सरकार को बदनाम करना। यह तथाकथित सेक्युलर गठजोड़ कई हथकंड़ों का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री को छवि खराब करने में जुटे रहते हैं। इनके मोदी विरोध की एक बड़ी वजह भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की लड़ाई है। तथाकथित सेक्युलरिस्ट मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लिए गए प्रत्येक निर्णय जैसे नोटबंदी और जीएसटी का पुरजोर विरोध करते रहे हैं। यहां तक कि सेना की पाकिस्तान पर की गयी सर्जिकल स्ट्राइक तक के सबूत मांगे गये। 

विवादित बयान और गाली-गलौच 
तथाकथित सेक्युलरिस्ट नेता और पत्रकार प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए सकारात्मक बहस की बजाय विवादित बयानों और गाली-गलौच की भाषा पर उतर आये हैं। इसमें कांग्रेस सरकार के कई वरिष्ठ नेता और स्वयं को सेक्युलर कहलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार शामिल हैं। हमेशा से विवादों में रहने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के नाम इसमें शामिल हैं। अगर ये तथाकथित सेक्युलरिस्ट नेता और पत्रकार इसी तरह अपना स्तर गिराते रहे तो राजनीति और मीडिया की रही सही विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी। 

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