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केजरीवाल सरकार: सत्ता के दुरुपयोग के दस सबूत

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दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर एक बार फिर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा है। पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) वीके शुंगलू की अध्यक्षता वाली समिति ने केजरीवाल सरकार के फैसलों से जुडी 404 फाइलों की जांच कर उनपर सत्ता के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

आइए एक नजर डालते हैं शुंगलू समिति की रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार पर लगाए गए 10 आरोपों पर-

1. शुंगलू समिति ने दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार पद पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन की नियुक्ति को गलत बताया है। इस मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि पेशे से आर्किटेक्ट सौम्या जैन को मोहल्ला क्लिनिक मिशन का निदेशक बना दिया गया। सौम्या की सीवी उनके दावे को कहीं से भी समर्थन नहीं देती। रिपोर्ट में कहा गया है कि सौम्या की नियुक्ति का स्टेट हेल्थ सोसाइटी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के बाई लॉज समर्थन नहीं करते।

2. सीएजी ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को घर मुहैया कराने पर भी सवाल उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 18 जुलाई 2016 को दिल्ली महिला आयोग के पद पर नियुक्त होने से पहले स्वाति मालीवाल को अपने सचिवालय में उप सचिव के पद पर 1.15 लाख रुपए और अन्य सुविधाओं के साथ नियुक्त किया था। इस समय वह जनता की शिकायतों और जनता संवाद का कार्य देख रही रही थी। स्वाति मालीवाल हरियाणा के बहुचर्चित आप नेता नवीन जयहिंद की पत्नी हैं। नवीन जयहिंद ने योगेन्द्र यादव का जमकर विरोध किया था और केजरीवाल का साथ दिया था। योगेन्द्र यादव भी हरियाणा से ही आते हैं। केजरीवाल ने जयहिंद की सेवाओं का फल इस रूप में दिया।

3. रिपोर्ट के मुताबिक आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश त्रिपाठी को अनुचित ढंग से टाइप 5 बंगला आवंटित कर दिया गया। मॉडल टाउन से आप के विधायक त्रिपाठी दंगा करने के मामले में जेल जा चुके हैं। अखिलेश त्रिपाठी के खिलाफ एक महिला के साथ दुष्कर्म करने का भी आरोप लगाया है।

4. केजरीवाल के रिश्तेदार निकुंज अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री का ओएसडी बनाए जाने पर सवाल उठाया गया है। केजरीवाल ने अपने रिश्तेदार डॉ निकुंज अग्रवाल की नियुक्ति वेकेंसी न होने के बावजूद की। पहले तो हस्तलिखित आवेदन मंगवाए और इसी अवैध आवेदन के आधार पर उन्हें सीनियर रेजिडेंट बनवा दिया। इस नियुक्ति में सीबीसी गाइडलाइन्स और मेडिकल एथिक कोड की धज्जियां उड़ाई गईं। इसके एक महीने बाद सितंबर 2015 में उन्हें दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का ओएसडी बना दिया। अग्रवाल ने दिल्ली सरकार द्वारा फंड किए गए अंतरराष्ट्रीय टूर भी किए है।

5. शुंगलू समिति ने यह भी कहा है कि मंत्रियों को विदेश यात्रा की अनुमति देने से पहले उपराज्यपाल की अनुमति भी नहीं ली गई। 2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे। उपराज्यपाल की डांट पड़ी तो वापस आए। इसी तरह 11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बिजनेस क्लास में सफर करने वाला ये आम आदमी सितंबर, 2015 में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी गए। जून 2016 में बर्लिन की भी यात्रा की। इसी तरह मंत्री सत्येंद्र जैन और अन्य मंत्री, विधायक भी विदेश यात्राओं पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाया।

6. समिति ने रोशन शंकर को पर्यटन मंत्रालय में ओएसडी नियुक्त करने पर भी सवाल उठाया है। समिति ने कहा है कि शंकर की नियुक्ति ऐसे पद पर हुई, जिसका पहले अस्तित्व ही नहीं था। उपराज्यपाल की पूर्वानुमति के बिना उनकी इस पद पर नियुक्ति नहीं हो सकती थी।

7. समिति ने दिल्ली में सीसीटीवी लगाने, मोहल्ला क्लीनिक और भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए फोन नंबर 1030 शुरू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

8. समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से अधिकारियों की राय को किनारे रख संवैधानिक प्रावधनों, प्रशासनिक कानून और आदेशों का उल्लंघन किया गया।

9. रिपोर्ट में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दफ्तर के लिए 206 राउज एवेन्यू स्थित आवंटित बंगले के फैसले को भी अनुचित ठहराया गया है।

10. इसके अलावा रिपोर्ट में केजरीवाल और उनकी सरकार की ओर से कुछ लोगों को सलाहकार बनाए जाने पर भी सवाल उठाया गया है। समिति के मुताबिक उपराज्यपाल की सलाह के बिना इस तरह के फैसले लेने का अधिकार सरकार के पास नहीं है।

शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट को केजरीवाल की आम आदमी पार्टो के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि इसका खामियाजा दिल्ली नगर निगम के चुनावों में उसे भुगतना पड़ सकता है। शुंगलू समिति एक तीन सदस्यीय समिति है जिसे पूर्व दिल्ली एलजी नजीब जंग ने अगस्त 2016 में बनाई थी।

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