Home समाचार शर्म हमें (अखिलेश) मगर आती नहीं!

शर्म हमें (अखिलेश) मगर आती नहीं!

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असली समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव चुनाव प्रचार के दौरान झुठ बोलते-बोलते इतने बोरा गए है कि अब उन्हें सच और झूठ का पता ही नहीं चलता। उत्तरप्रदेश में अपनी आधी-अधूरी योजनाओं के जरिये जब वो जनता को बहला नहीं सके तो अब अपनी प्रदेश में 5 साल के नाकाम शासन का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ने से नहीं चुक रहे है। अब अखिलेश का कहना है कि उनको केंद्र सरकार से पैसा नहीं मिला इसलिए वो विकास कार्य नहीं कर पाए। कोई अखिलेश से पूछे कि पूरे पांच साल शासन करने के बाद अब पैसे नहीं मिलने का रोना क्यों। और अगर वाकई पांच साल में विकास कार्य पैसे की कमी के कारण नहीं हो पाया तो आधे समय तो केंद्र में उनके पार्टनर राहुल गांधी की सरकार थी। यानि बगल में छुरी शहर में ढिंढोरा। आज हम आपको बताएंगे। एनडीए के शासन में कितना पैसा उत्तरप्रदेश की अखिलेश सरकार को मिला और कितना उन्होंने योजनाओं में खर्च किया।

 

नीति आयोग जो कि केंद्र सरकार की प्रमुख संस्था है और देश के सभी राज्यों को फंड रिलीज करती है और उसके आंकड़े भी जिसको कोई नहीं झुठला सकता। नीति आयोग के मुताबिक प्रधानमंत्री अमृत योजना के तहत यूपी के 61 शहरों को चुना गया। और यूपी को 3,865 करोड़ रूपये दिए गए। जिसके तहत इन 61 शहरों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने का जिम्मा यूपी सरकार का था लेकिन यूपी सरकार ने सिर्फ 393 करोड़ रूपये ही खर्च किए।

 

स्वच्छ भारत मिशन के तहत यूपी को 941 करोड़ रूपये आवंटित किए गए लेकिन यूपी ने सिर्फ 37.5 करोड़ रूपये के ही प्रोजेक्ट शुरू किए बाकी पैसों का क्या?

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत यूपी की 6,967 करोड़ रूपये दिए गए लेकिन बबूआ (अखिलेश) ने सिर्फ 2,850 रूपये ही खर्च किए क्यों? यूपी की जनता के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों। यूपी को जरूरत है 3,497 डॉक्टरों की लेकिन यूपी में मात्र 2,206 ही डॉक्टर है। आखिर पांच साल में अखिलेश को डॉक्टर रखने की भी फुर्सत नहीं मिली। इस कमी को देखते हुए केंद्र सरकार को डाक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 65 साल करनी पड़ी।

 

सर्व शिक्षा अभियान के तहत यूपी को 19000 करोड़ की धनराशि मुहैया कराई लेकिन अपने पारिवारिक झगड़ों में उलझे अखिलेश को यूपी की भावी पीढ़ी की चिंता कैसे होगी। स्कूलों की हालत इतनी बदतर है कि 55 फीसदी स्कूलों में हैडमास्टर की पोस्ट ही नहीं भरी गई। सेफई महोत्सव में बिजी रहने वाले सरकार को भला जनता की क्या जनता।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4.4 लाख घर बनाए गए जिसमें 3,220 करोड़ रूपये खर्च हुए। लेकिन अखिलेश कह रहे है कि पैसा नहीं मिला और यूपी को अभी भी 3,202 लाख आवासों की जरूरत है लेकिन अखिलेश को क्या वो मुख्यमंत्री ना भी बने उन्होंने अपने लिए जनता के खून-पसीने की कमाई से लखनऊ में 200 करोड़ का महल खड़ा कर लिया है। जनता फुटपाथ पर सोए भला अखिलेश को क्या।

 

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत 4.24 करोड़ जन-धन खाते खोले गए। इनमें से 2.57 करोड़ खाते सिर्फ ग्रामीण इलाकों में खोले गए। अखिलेश बबूआ ये रिकार्ड तो बैंक के डाटा में मौजूद है। कह दीजिए कि बैंक भी झूठे है।

 

उत्तरप्रदेश में पूरी तरह से सांप्रदायिक चुनावी प्रचार में उलझे अखिलेश को यूपी में दोबारा आने के लिए मुस्लिमों का साथ जरूरी है इसलिए जनता को बरगलाने के लिए पूरे चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश सिर्फ झूठ का ही सहारा ले रहे है। जबकि नीति आयोग ने अपने आंकड़ो के जरिए बीजेपी का सच और अखिलेश का फरेब सामने ला दिया है। अब जनता को फैसला करना है कि वो विकास पुरूष और देश पहले की थ्योरी पर काम कर रही बीजेपी को वोट देती है या फिर मुस्लिम वोटों के जरिये यूपी में समाज को बांटने में लगी समाजवादी पार्टी को।

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