Home विपक्ष विशेष श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य ने राहुल गांधी को क्यों नहीं दिया आशीर्वाद?

श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य ने राहुल गांधी को क्यों नहीं दिया आशीर्वाद?

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22 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य के पास पहुंचे थे। वहां कुछ ऐसा हुआ जो देश के लिए बड़ी खबर होनी चाहिए थी, लेकिन मीडिया ने इस खबर को ही दबा दिया। आइये सबसे पहले ये ट्वीट देखिए।


दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने जगदीशचंद्र बी की पत्रिका के हवाले से बताया की शंकराचार्य जी ने राहुल गाँधी और सिद्धारमैया को आशीर्वाद देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा ‘’आप लोग यहां पर आए इस बात से मैं खुश हूं परन्तु आप लोग जो काम (हिन्दू विरोधी) कर रहे हैं उसके बाद मैं आपको आशीर्वाद नहीं दे सकता।

हालांकि ये बड़ी खबर है और तथाकथित सेक्यूलर जमात को आईना दिखाने वाला भी है, लेकिन इसे दबा दिया गया, जबकि कई और लोगों ने भी इस खबर को लेकर ट्वीट किया।


गौरतलब है कि आजकल हिंदुओं को अपना हितैषी बताने के लिए राहुल गांधी मंदिर-मंदिर जा रहे हैं, लेकिन शंकराचार्य ने उन्हें पहचान लिया है और आशीर्वाद देने से इनकार कर दिया।

दरअसल कांग्रेस द्वारा हिंदू समुदाय को जातियों में बांटकर राजनीतिक हित साधने को लेकर शंकराचार्य नाराज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लिंगायत समाज बीते 1000 वर्ष से हिंदू धर्म का अंग रहा है उसे भी कांग्रेस ने बांटने का काम किया है।

शंकराचार्य ने कहा कि आप हिंदुओं को जातियों में बांट रहे हैं और समाज को तोड़ रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि आप हिंदुओं के विरुद्ध असहिष्णुता का भाव रखते हैं और आपको इससे बचना चाहिए, हिंदू धर्म के भीतर बैरभाव फैलाने का काम मत कीजिए।

जगदगुरू ने राहुल गांधी और सिद्धारमैया से ये भी कहा कि मंदिरों में चढ़ावों के रूप में जो राशि संग्रह की जाती है (जिसे सरकार manage करती है), उसे मंदिर से जुड़े उद्देश्य में ही लगाना चाहिए। उस धन को दूसरे धर्म के कल्याण पर खर्च करना स्वीकार्य नहीं (गलत) है। हिंदू मठों और मंदिरों का अनादर ना करें।

जगद्गुरु ने दोनों से सीधे कहा, ”यह अच्छा है कि आप हमारे मठ आए हैं, लेकिन क्योंकि आप हिंदू विरोधी गतिविधियों में लगे हुए हैं, हम आपको अपना आशीर्वाद नहीं देते हैं।”

यह सुनकर दोनों ही झटका खा गए क्योंकि जगद्गुरु से उन्हें ऐसे रिस्पॉन्स की उम्मीद नहीं थी। हालांकि मुलाकात करके बाहर आने के बाद राहुल गांधी और सिद्धारमैया ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि जगद्गुरु की कही बात मीडिया में नहीं पहुंचे, लेकिन अब यह बात जगजाहिर हो चुकी है।

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