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कांग्रेस जवाब दे- क्या वो सिंधिया के बयान के साथ है या खिलाफ है?

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नोटबंदी पर मोदी सरकार के फैसले पर उंगली उठाने वाली कांग्रेस क्या काले धन को एक छोटी समस्या मानती है? ये सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि कांग्रेस के एक बड़े नेता और राहुल गांधी के करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक बयान की हमें जानकारी मिली है। सूत्रों के मुताबिक आजकल ज्योतिरादित्य लोगों से ये कह रहे हैं कि ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार एक छोटी समस्या है। इसके लिए नोटबंदी जैसा कदम उठाया जाना उचित नहीं था।

सच तो ये है कि भ्रष्टाचार और कालेधन की समस्या का सबसे ज्यादा दर्द गरीबों को सहना पड़ता है। लेकिन कांग्रेस नेता के बयान से पता चलता है कि कांग्रेस को गरीबों की कितनी परवाह है। असल में सिंधिया कांग्रेस की उस सोच को उजागर कर रहे हैं, जिसमें कालेधन के खिलाफ लड़ाई पार्टी की प्राथमिकता में ही नहीं है।

तो क्या सिंधिया कांग्रेस की उस मानसिकता के परिचायक हैं, जिसके लिए भ्रष्टाचार और कालेधन की समस्या सामान्य सी बात है। जाहिर है ये मानसिकता इस बात का भी द्योतक है कि कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए शासनकाल में इतने घोटाले क्यों हुए। सिंधिया की कालेधन को सामान्य बताने वाली बात कांग्रेस की सोच को साबित करने के लिए काफी है।

कालेधन को एक छोटी समस्या बताकर सिंधिया ने अनजाने में कालेधन के जमाखोरों के साथ अपनी और कांग्रेस के गठजोड़ का खुलासा कर दिया है। सवाल ये है कि आखिर कालेधन को छोटी सी समस्या बताने पर जमाखोरों के अलावा किसे फायदा होगा?

राहुल गांधी को यह साफ करना चाहिए कि क्या वह सिंधिया की कालेधन वाली इस बात से इत्तेफाक रखते हैं?

कांग्रेस एक महीने से संसद को चलने नहीं दे रही है। तो क्या सिंधिया का बयान यह जाहिर करने के लिए काफी है कि इसके पीछे असली मंशा क्या है? यूपीए शासनकाल में चार लाख करोड़ से ज्यादा के घोटाले हुए, मगर सिंधिया के लिए कालेधन की समस्या एक छोटी समस्या है।

कांग्रेस को बचाने के लिए सिंधिया भले ही ये सोचें, लेकिन हमारा ये मानना है कि अब मोदी की अगुवाई में देश इसके खिलाफ तब तक लड़ेगा, जब तक इसका समूल नाश ना हो जाए।

आखिर सिंधिया अपने बयान से किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं? कहीं वे कांग्रेस के उच्च पद पर आसीन पदाधिकारी तो नहीं हैं? विडंबना यह है कि सिंधिया का यह बयान तब आया है जब अगस्ता हेलीकॉप्टर मामले की जांच की आंच से कांग्रेस आलाकमान बुरी तरह झुलसा हुआ है।

कहीं सिंधिया का बयान अगस्ता जांच के डर को तो परिलक्षित नहीं कर रहा कि इस पर ध्यान देने की ही जरूरत नहीं है। सिंधिया और कांग्रेस के उलट भारत के सवा सौ करोड़ लोगों ने भ्रष्टाचार और कालेधन को खत्म करने की शपथ ली है और वो मोदी सरकार के फैसले के साथ खड़े हैं। सिब्बल कहते हैं कि घोटाले से कोई नुकसान नहीं हुआ… सिंधिया इसे छोटी बात मानते हैं। ऐसे में लूट और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी कांग्रेस खुद अपने ही चक्रव्यूह में तो नहीं फंसती जा रही है?

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