Home नरेंद्र मोदी विशेष देश की परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

देश की परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से यात्रियों को तेज यात्रा का विकल्प देने के साथ ही देश की इकोनॉमी को तेज रफ्तार देने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसी उद्देश्य के तहत उन्होंने बीते साढ़े तीन सालों में देश में कई ऐसी योजनाओं की शुरुआत की है जो न केवल देश की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि दुनिया की प्रतिस्पर्धा में भारत को अगली कतार में खड़ा कर देगा। हाइपरलूप, मेट्रिनो और पॉड टैक्सी जैसी मास रैपिड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी अब भारत में जल्दी ही सच्चाई में तब्दील होने जाएंगी।

नीति आयोग ने भी इन परियोजनाओं के लिए बीते साल ही हरी झंडी दे दी है। परिवहन विभाग इन परिजनों के सुरक्षा मानकों का अध्ययन कर इन कार्यों पर आगे भी बढ़ रहा है।

आइये पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई उन निर्णयों की चर्चा करते हैं जो देश को तेज गति से आगे बढ़ाएगा।

मुंबई-पुणे के बीच चलेगी पहली हाइपरलूप ट्रेन !
अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच भारत में पहली बार ट्रेन चली थी। अब 164 साल बाद दुनिया की पहली हाइपरलूप मुंबई और पुणे के बीच दौड़ सकती है। इसके शुरू होने पर दोनों शहरों के बीच 150 किलोमीटर की दूरी महज 14 से 25 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्जिन समूह ने महाराष्ट्र सरकार के साथ मुंबई और पुणे के बीच हाइपरलूप परिवहन प्रणाली के निर्माण के लिए ‘आशय पत्र’ यानि Letter of intent पर दस्तखत किए हैं।

पहला हाइपरलूप मार्ग मध्य पुणे को वृहद महानगर के अलावा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी जोड़ेगा। इसकी आधारशिला 18 फरवरी, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी। वर्जिन ग्रुप के चेयरमैन रिचर्ड ब्रैन्सन ने मैग्नेटिक महाराष्ट्र निवेशक सम्मेलन के दौरान इसकी जानकारी साझा की।

इस प्रस्तावित हाइपरलूप परिवहन प्रणाली से पूरी परिवहन प्रणाली में बदलाव आएगा और महाराष्ट्र इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उदाहरण होगा। इसके साथ ही इससे हजारों रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। गौरतलब है कि इस परियोजना का सामाजिक आर्थिक लाभ 55 अरब डॉलर का होगा।

आइये हम नजर डालते हैं प्रधानमंत्री के कुछ ऐसे ही निर्णयों की जो न भारत में यातायात क्रांति लाने वाले हैं बल्कि रोजगार के नये अवसरों को पैदा करने के साथ ही विश्व मानचित्र पर भारत को एक अलग ऊंचाई प्रदान करेंगे..

बुलेट ट्रेन ब्रांड बन जाएगा इंडिया 
प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने 14 सितंबर, 2017 को अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड नेटवर्क परियोजना (बुलेट ट्रेन परियोजना) का शिलान्यास किया। बुलेट ट्रेन परियोजना का काम दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब परियोजना को स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ, 15 अगस्त 2022 तक पूरा करने की बात तय हुई है। इस तरह से देश को 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन परियोजना का तोहफा मिलेगा और देशवासियों का बुलेट ट्रेन का सपना पूरा हो जाएगा। अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड नेटवर्क परियोजना (बुलेट ट्रेन परियोजना) से ब्रांड इंडिया को नई ऊंचाइयां हासिल होंगी। दुनिया के विकसित देशों के साथ कदमताल मिलाते हुए भारत विकास के संदर्भ में अग्रणी देशों की श्रेणी में आकर खड़ा हो जाएगा।

‘सी प्लेन’ से ट्रांसपोर्ट रिवोल्यूशन
12 दिसंबर, 2017 को गुजरात चुनाव प्रचार के अंतिम दिन जब प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट के पास सी प्लेन में बैठकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे तभी देश में तेज रफ्तार यातायात व्यवस्था की एक नए युग की शुरुआत भी हो गई। केंद्र सरकार द्वारा भारत में कम से कम 100 सी-प्लेन से सेवा शुरू करने की योजना है। शुरुआती दौर में देश की करीब 111 नदियों का हवाई पट्टी के तौर पर इस्तेमाल होगा। सरकार की समंदर से सटी करीब 11 हजार किमी सीमाओं से हवाई सफर शुरू करने की तैयारी है। सरकार की योजना है कि सी प्लेन हर शहर, हर गांव में पहुंचे। सरकार इस योजना के तहत मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हुए जापानी कंपनी से सी प्लेन निर्माण के लिए कहा है।

 

सी प्लेन की विशेषताएं-

  • सी प्लेन प्लेन जमीन-पानी दोनों से उड़ान भर सकता है
  • सी प्लेन को पानी और जमीन पर लैंड कराया जा सकता है
  • महज 300 मीटर के रनवे से उड़ान भर सकता है प्लेन
  • 300 मीटर की लंबाई वाले जलाशय का इस्तेमाल हवाई-पट्टी के रूप में संभव
  • एंफीबियस कैटेगरी का प्लेन है सी प्लेन
  • जापान की सेटॉची होल्डिंग्स से कोडियेक क्वेस्ट विमानों का सौदा

मेट्रो से सस्ती होगी ‘मेट्रिनो’
दिल्ली और मानेसर के बीच सरकार की महत्वाकांक्षी 4,000 करोड़ रुपये की लागत वाली सार्वजनिक परिवहन परियोजना ‘मेट्रिनो’ चलाए जाने की योजना बन गई है। इस शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा। मेट्रिनो एक चालक रहित परिवहन प्रणाली है जो रोपवे पर चलती है। रोपवे जैसी प्रणाली बिजली पर काम करती है और यह चालकरहित पॉड होगा जो निर्धारित स्टेशनों पर रूकेगा। इससे सड़कों पर भीड़भाड़ कम होगी। मेट्रिनो की पूंजी लागत 50 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर है जबकि मेट्रो के मामले में यह 250 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर है और इसमें एक साथ सात से आठ व्यक्ति बैठ सकते हैं।

फ्रेट रेल रोड
रेल लाइंस के साथ एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे जहां फ्रेट ट्रों को रखा जा सकता है और इसके बाद तेज गति से आगे बढ़ेंगे। इससे माल ले जाने के समय में कमी आएगी और अधिक माल भेजा जा सकेगा।

हाइब्रिड बस
ये बसें पूरी तरह वातानुकूलित होंगी। इनका न्यूनतम किराया 15 रुपये के आसपास हो सकता है। इन बसों का परिचालन मुंबई की BEST द्वारा किया जाएगा। 

पानी में बस 
धौलाकुआं से मानेसर और पल्ला (फरीदाबाद) से वजीराबाद के बीच पानी पर बस चलाने की योजना बनाई जा रही है। यह बस सड़क पर भी चलेगी और पानी में भी चलेगी। परियोजना की शुरुआत अगले छह माह में करने की योजना है। दरअसल आने वाला समय प्रदूषण मुक्त वाहनों के संचालन का है। बस की कीमत करीब 6 करोड़ रुपये है और इसमें 32 सवारियां बैठ सकती हैं। हालांकि इस परियोजना को लेकर पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं हैं, लेकिन इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर रास्ता निकालने में लगी हैं।

सबसे तेज गतिमान एक्सप्रेस 
19 फरवरी, 2018 से गतिमान एक्प्रेस ने रफ्तार पकड़ ली है। आगरा से निजामुद्दीन के बीच चलने वाली देश की सबसे तेज गति ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस सोमवार से ग्वालियर तक चलने लगी है। यह तीन घंटे 15 मिनट में ग्वालियर से निजामुद्दीन पहुंचाएगी। गौरतलब है कि 5 अप्रैल 2016 को देश की सबसे तेज चलने वाली सेमी हाई स्पीड ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस का शुभारंभ किया गया था। इसमें महिला परिचारिकाएं यात्रियों को फूल देकर उनका स्वागत करती हैं। इसमें यात्री को वाईफाई की सुविधा मिलती है और मल्टीमीडिया मनोरंजन की सुविधा फ्री है। इसमें मिनी डोसा, कांजीवरम इडली, स्विस रोल, चिकन रोल,उपमा, ताजे कटे हुए फल, भुने हुए मेवे सहित अलग-अलग खानपान दिया जाता है।

सागरमाला से तेज होगा विकास
भारत सरकार द्वारा सागरमाला परियोजना की परिकल्पना की गई है। समुद्र तटीय राज्यों के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिससे न केवल बंदरगाह का विकास होगा बल्कि बंदरगाहों के द्वारा समग्र विकास सुनिश्चित होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार के मेक इन इंडिया के तहत सागरमाला परियोजना की शुरुआत 2014 में की गई थी। इसके तहत देश के चारों ओर सीमाओं पर सड़क परियोजनाओं में से 7500 किलोमीटर लंबे तटीय सागर माला परियोजना क्षेत्र को जोड़ने के लिए नेटवर्क विकसित किया जाना है।

इसलिए शुरू की गई सागरमाला परियोजना
विदेशों से होने वाला भारत का व्यापार का 90 प्रतिशत बंदरगाहों के जरिये होता है। देश के करीब साढे सात हजार लंबी तटीय सीमा पर 13 बड़े बंदरगाह हैं और कुछ और का निर्माण हो रहा है। एक लीटर डीजल से सड़क पर 24 टन के कार्गो को एक किलोमीटर तक ढोया जा सकता है, वहीं रेल में 85 टन तो जल परिवहन के मामले में 105 टन तक पहुंच जाता है। इसलिए केंद्र सरकार सागर माला परियोजना के जरिये जल परिवहन को बेहतर बनाने की कोशिश में है।

सागरमाला पर खर्च होंगे 70 हजार करोड़
केंद्र सरकार इस परियोजना पर 70 हजार करोड़ खर्च करने जा रही है। बंदरगाहों को जोड़ने की योजना के तहत रेल मंत्रालय भी 20 हजार करोड़ की लागत से 21 बंदरगाह रेल संपर्क परियोजनाओं का काम शुरू करेगा। इस परियोजना का मकसद बंदरगाहों पर जहाजों पर लदने और उतरने वाले माल का रेल और राष्ट्रीय राजमार्गों के जरिये उनके गंतव्य सागरमाला तक पहुंचाना है। इस परियोजना में बंदरगाहों के विकास के नए ट्रांसशिपिंग पोर्ट का भी निर्माण शामिल है, ताकि बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाई जा सके। जाहिर सी बात है कि इससे देश के घरेलू उत्पाद को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं इसके तहत 27 इंफ्रास्ट्रक्चर क्लस्टरों का विकास होने से करीब एक करोड़ रोजगार भी सृजित होंगे। सागरमाला देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर की तस्वीर बदल देगी।

परियोजना के उद्देश्य
भारत के शिपिंग क्षेत्र की तस्वीर बदलना
देश के बंदरगाहों को आधुनिक बनाना
बंदरगाहों के निकट विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाना

परियोजना से लाभ
हर साल औसतन 40 हजार करोड़ की बचत होगी
देश के भीतरी भागों में भी जलमार्ग विकसित किया जा सकेगा
नदियों और नहरों से बने ये जलमार्ग सीधे बंदगाहों से जुड़े होंगे
तटीय आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण किया जाएगा
रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पलायन रूकेगा

‘भारतमाला’ से एक सूत्र में बंध जाएगा भारत
सागर माला की तर्ज पर गुजरात से हिमाचल प्रदेश कश्मीर होते हुए मिजोरम तक भारत माला परियोजना का विकास किया जा रहा है जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय सीमा वाले प्रदेशों में सीमा पर अच्छे रेल एवं सड़क नेटवर्क स्थापित किए जा सकें जो उत्तर भारत के व्यापारिक हितों के साथ -साथ भारत के सामरिक हितों का भी लक्ष्य साध सकें। इसके तहत लगभग 5 हजार किलोमीटर सड़कें बननी हैं।

39 अरब डॉलर होंगे खर्च
इस परियोना में भारत की सीमाओं पर सड़कों, तटीय क्षेत्रों, बंदरगाहों, धार्मिक पर्यटक स्थलों में से 25 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा और साथ ही 100 से अधिक जिला मुख्यालयों को इससे जोड़ा जाएगा।

भारतमाला परियोजना पर होने वाले खर्च
2015-16 के बजट के मुताबिक इसपर 2,67,000 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। तटवर्ती और सीमाववर्ती क्षेत्रों से लगे 7000 किलोमीटर राज्य सड़कों का विकास पर 80, 520 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पिछड़े क्षेत्रों, धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों को जोड़ने वाली 7 000 किलोमीटर सड़कों के निर्माण पर 85,200 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव है।

28 बड़े शहरों में रिंग रोड
सरकार ने देश के 28 बड़े शहरों में 36,290 करोड़ की लागत से रिंग रोड बनाने की योजना बनाई है। इसमें से 21,000 करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं के लिए डीपीआर बनाने का काम चल रहा है।  ये परियोजनाएं मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी भारतमाला कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत दिल्ली, लखनऊ, बेंगलुरु, रांची, पटना, श्रीनगर और उदयपुर समेत सभी बड़े शहरों में रिंग रोड की योजना बनाई गई है। इतना ही नहीं 28 रिंग रोड के अलावा 40 बाईपास की भी योजना बनायी गई है।

उन्नत सड़कों से जुड़ेंगे चार धाम 
उत्तराखंड के चार धाम जिसमें केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री भी भारतमाला परियोजना के तहत उन्नत सड़क मार्गों से जुड़ेंगे। इस तरह से उत्तर भारत में धार्मिक यात्रा और परिवहन में वृद्धि होगी।

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