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अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इस बार दिखेगी आध्यात्मिक संस्कृति की झलक

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पीएम नरेन्द्र मोदी की पहल का असर इस बार 32वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में भी देखने को मिलेगा। यह मेला 2 फरवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। पहली बार सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला परिसर आध्यात्म पर्यटन के रंग में रंगा दिखाई देगा। पहली बार इस मेले की थीम के लिए उत्तर प्रदेश को चुना गया है। उत्तर-प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक संस्कृति की झलक इस मेले में दिखाई देगी।

पहली बार मेले में दिखेगी बनारस के घाटों की झलक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बनारस से सांसद बनने के बाद वहां की रौनक फिर से लौट रही है। बनारस एक बार फिर से विरासत की रौ में लौट रहा है। यहां के घाट निखरने लगे हैं। बनारस की विरासत की झांकी की झलक हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में देखने को मिलेगी। मेले परिसर में मोक्ष का द्वार कहे जाने वाले भगवान शिव की नगरी वाराणसी के 84 गंगा घाटों की झलक और करीब आठ घाट तुलसी घाट, जानकी घाट, अस्सी घाट, गंगा महल घाट, हरिश्चंद्र घाट, मणिकर्णिका घाट व संगम घाट दिखाई देंगे। इतना ही भगवान शिव का काशी विश्वनाथ मंदिर भी दिखाई देगा। मंदिर के महंत दर्शकों को प्रसाद भी बाटेंगे।

रामायण थीम पर होगी मुख्य चौपाल
मेला परिसर की मुख्य चौपाल को रामायण थीम पर तैयार किया गया है। चौपाल के मंच पर अयोध्या में प्रस्तावित राममंदिर का परिदृश्य दिखाई देगा। मंच के बाई और भगवान राम के पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचने के चित्र, रामसेतु के दर्शन और दाई ओर अयोध्या नगरी का ऐश्वर्य दिखाया जाएगा। मेले में वाराणसी के घाट, भगवान कृष्ण की रासलीला और भगवान श्रीराम के आगमन की दीपावली भी परिसर में पर्यटकों को देखने को मिलेगी। मेला परिसर में उत्तर-प्रदेश के करीब 300 लोक कलाकार और हस्तशिल्पी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

मेले में 25 से अधिक देश होंगे शामिल
मेले में इस बार करीब 25 देशों के हस्तशिल्पी और लोक कलाकार शिरकत करेंगे। मेले में दुनिया की लोककला संस्कृति के दर्शन होंगे। किर्गिस्तान इस बार मेले का भागीदार देश है। इसमें सार्क देशों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि पाकिस्तान के आने पर अब भी संशय है। इसके अलावा कुछ अफ्रीकन देश और आसियान देश शामिल हैं।

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