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कांग्रेस के ‘पापों की जमीन’ का दस्तावेज है राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट

सोनिया-राहुल ने जमीनों पर कब्जा करने के लिए बनाया ट्रस्ट, रिपोर्ट

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देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल, जो स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी कुर्बानियों की याद समय-समय पर देश को दिलाता रहता है, वह आज मात्र दो नामों के सहारे जिंदा है और वे नाम हैं-सोनिया गांधी और राहुल गांधी। बहुत कम लोगों को पता होगा कि कांग्रेस की इन दो ‘महाशक्तियों’ की एक अपनी स्वयंसेवी संस्था राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट भी है। यह ट्रस्ट देशी-विदेशी स्वयंंसेवी संस्थाओं की मदद से लाखों करोड़ की सामाजिक योजनाओं के संचालन में भाग लेती रही है। लेकिन सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इस संस्था ने राज्यों की कांग्रेस सरकारों की मिलीभगत से हजारों करोड़ की जमीन पर जबरन कब्जा करने का भी काम किया है।

रोखा गांव की जमीन पर कब्जा
उत्तरप्रदेश का अमेठी गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है। यहीं से इंदिरा गांधी, राजीव गांधी लोकसभा का चुनाव लड़ते रहे थे। इसी अमेठी से राहुल गांधी वर्तमान में सांसद हैं। इसी अमेठी के जायस के रोखा गांव में 1.0360 हेक्टेयर जमीन जिसे जिला प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिये दिया था, उसे कागजों में हेराफेरी करके राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम दिया। एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अमेठी जिला प्रशासन को अब दुबारा इस पर कब्जा मिला है और उसने तत्काल प्रभाव से इसे खाली करने का आदेश राहुल गांधी और सोनिया गांधी को दिया है।

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जमीन कब्जे को प्रश्रय देते रहे अखिलेश
इस गैरकानूनी कब्जे की बात सबसे पहले 2014 में उठी थी, लेकिन अखिलेश सिंह की समाजवादी सरकार के साथ चुनावी गठबंधन होने के कारण मुख्यमंत्री अखिलेश ने इस मामले की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। 2017 में सरकार बदलने के बाद जब प्रशासन ने राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को इस जमीन पर मालिकाना हक साबित करने के लिए दस्तावेज देने को कहा तो, वे नहीं कर सके और आखिर में 6 अगस्त को यह जमीन तत्काल प्रभाव से खाली करनी पड़ी।

रायबरेली में 10,000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा
रायबरेली भी गांधी परिवार का गढ़ है और यहां से सोनिया गांधी सांसद हैं। अपनी सरकार और सत्ता के बल पर राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने रायबरेली में 10,000 वर्ग मीटर जमीन पर जबरन कब्जा कर रखा है, जबकि दस्तावेजों के अनुसार यह जमीन सरकार की है। 1982 में एक जिला कलक्टर के आदेश पर कि इस जमीन को महिलाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग में इस्तेमाल करने की छूट दे दी जाए, इस पत्र का फायदा उठाते हुए ट्रस्ट ने इस पूरी जमीन पर कब्जा कर लिया, जबकि इसके पास इस जमीन का कोई मालिकाना हक नहीं था।

हरियाणा के उल्लावास गांव की जमीन पर कब्जा
आठ साल पहले जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी तो गुरुग्राम के उल्लावास गांव में राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को 4.8 एकड़ जमीन आंखों का अस्पताल बनाने के लिए मिली। ट्रस्ट की अपनी सरकार होने के कारण यह जमीन 2009 में लीज पर मिली। जब हरियाणा सरकार के पंचायत विभाग ने उल्लावास पंचायत को यह जमीन को देने का आदेश दिया तो गांव वालों ने काफी विरोध किया, लेकिन सरकार ने इस विरोध को अनसुना कर दिया। इस जमीन पर राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को 7 जनवरी 2012 तक आंखों का अस्पलाल बना लेना था, लेकिन यह अस्पताल तब तक नहीं बना सका है। अब ट्रस्ट के कब्जे में पड़ी इस जमीन को, पंचायत विभाग ने वापस लेने की प्रक्रिया शुरु कर दी है।

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हेराल्ड हाउस की 16 सौ करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा
इस बहुचर्चित कब्जे का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है। इसमें सोनिया और राहुल गांधी ने यंग इडियन नाम से एक संस्था बनाकर, एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) पर अपना मालिकाना हक कर लिया। इस घोटाले का ब्योरा कुछ ऐसा है-एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिकाना कंपनी है। कांग्रेस ने 26 फरवरी 2011 को इसकी 90 करोड़ रुपये की देनदारियों को अपने जिम्मे ले लिया था। इसका अर्थ ये हुआ कि पार्टी ने इसे 90 करोड़ का लोन दे दिया। इसके बाद 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी की 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास है। इसके बाद टीएजेएल के 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर ‘यंग इंडियन’ को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के 99 फीसदी शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन भी माफ कर दिया। यानी ‘यंग इंडियन’ को मुफ्त में टीएजेएल का स्वामित्व मिल गया। यह सब कुछ दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 16 सौ करोड़ रुपये की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। जबकि हेराल्ड हाउस को केंद्र सरकार ने समाचार पत्र चलाने के लिए जमीन दी थी, इस लिहाज से उसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ये केस फिलहाल दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में है और सोनिया व राहुल इसमें जमानत पर हैं।

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जाकिर नाइक ने राजीव गांधी ट्रस्ट को 50 लाख रुपये दिए
इस्लामी धर्म प्रचारक जाकिर नाइक जो युवाओं में कट्टरपंथी भावनाएं भड़काने का काम करता है। उसकी संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउडेंशन ने राजीव गांधी चैरिटेबुल ट्रस्ट को 50 लाख रुपये चंदे के रूप में 2011 में दिया था, जिसका खुलासा सिंतबर 2016 में तब हुआ जब जाकिर नाईक के खिलाफ सरकारी एजेंसियां जांच कर रही थीं।

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जाकिर नाईक की संस्था, इस्लामिक रिसर्च फाउडेंशन, बालिकाओं को पढ़ाने और अस्पताल बनाने के लिए अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं की सहायता करती रहती थी। इस संस्था को यह धन इस्लामिक देशों से भारत में इस्लाम धर्म के प्रचार प्रसार के लिए मिलते थे। जैसे ही जनता को इस बात का पता चला, सोनिया गांधी और राहुल गांधी जो राजीव गांधी चैरिटेबल संस्था के संचालक हैं, ने 50 लाख रुपये चुपके से जाकिर नाईक को वापस कर दिए।

दरअसल राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, सोनिया और राहुल गांधी का एक ऐसा मुखौटा है, जिसके पीछे छुपकर अपनी सरकार की शक्ति का भरपूर दोहन करते हुए देश में जमीन और संपत्तियां बटोरी हैं। ये तो वे उदाहरण हैं जो समय-समय पर कानूनी उलझनों के चलते जनता के सामने आते रहे हैं, न जाने कितने ऐसे मामले होंगे जिनपर कानूनी रूप से सभी कागजात दुरुस्त करके राजीव गांधी चैरिटेबल संस्था ने अपने कब्जे में ले लिए होंगे। देश में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर लूट करने वाली कांग्रेस का यही असली चेहरा है।

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