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राहुल गांधी की गोपनीय विदेश यात्राओं का रहस्य क्या है ?

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर ये आरोप लगते रहे हैं कि जब भी पार्टी को उनकी ज्यादा जरूरत होती है, वो विदेश यात्राओं पर निकल जाते हैं। कभी वो नानी से मिलने इटली चले जाते हैं, तो कभी मानसिक तनाव एवं थकान मिटाने के लिये बैंकॉक और म्यांमार की यात्रा पर निकल जाते हैं। यही नहीं हो बीच-बीच में वो लंदन-न्यूयॉर्क की यात्राओं पर भी गुपचुप तरीके से निकलते रहते हैं। ये बात इसीलिये उठ रही है कि इन विदेश यात्राओं के लिये वो SPG सुरक्षा नहीं लेते। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में ये खुलासा तब किया है जब बनासकांठा की घटना को लेकर जवाब दे रहे थे।

विदेश यात्राओं को छिपाते क्यों हैं राहुल ?
कुछ खास वजहों से राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं को गोपनीय रखना चाहते हैं। गुजरात के बनासकांठा में उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंके जाने के मामले पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने संसद में कहा है कि राहुल ने पिछले दो सालों में 6 देशों की 72 दिनों तक यात्राएं की हैं। लेकिन इन सभी यात्राओं में SPG सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया। सवाल उठता है कि राहुल गांधी देश की जनता से अपनी विदेश यात्राओं को छिपाना क्यों चाहते हैं ?

राहुल के लिये विदेश यात्रा से बढ़कर कुछ भी नहीं
राहुल गांधी पर आरोप लगते रहे हैं कि वो हर अहम मौकों पर पार्टी को बीच मझधार में छोड़कर विदेश भाग जाते हैं। हाल ही में इसका उदाहरण तब भी देखने को मिला जब राष्ट्रपति चुनाव के लिये रणनीति बनानी थी लेकिन, वो अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ कर कहीं चले गये थे। हालांकि जब भी उनकी ऐसी हरकतों पर सवाल उठने लगते हैं, तो उनकी पार्टी उनका बचाव करने लगती है। पिछले जून में सहारनपुर और मंदसौर पर सियासी नौटंकी करने के बाद वो अचानक इटली चले गये और कहा कि नानी से मिलने जा रहे हैं। कांग्रेस ने उनका फौरन बचाव किया और कहा कि परिवार के बुजुर्गों की देखभाल करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन कांग्रेस वाले इसका जवाब नहीं दे पाते कि विदेश यात्राओं को चोरी-छिपे पूरा करना कौन सी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। वो विदेशों में भारत की ओर से दी गई सबसे शक्तिशाली सुरक्षा ले जाने से क्यों कतराते हैं ? उन्हें कौन सी पोल खुलने का भय सताता रहता है ?

60 दिन की लंबी गुपचुप विदेश यात्रा
राहुल की सबसे चर्चित छुट्टी फरवरी, 2015 की थी, जब वो अचानक देश से बाहर चले गए थे और 60 दिन बाद दिल्ली लौटे। बाद में पता चला कि वह बैंकॉक और म्यांमार घूमने गये थे। कहा गया कि मानसिक तनाव से मुक्ति के लिये उन्होंने इन देशों की यात्राएं की हैं। तब का उनका यात्रा विवरण भी दिलचस्प है-

• 16 फरवरी को दिल्ली से बैंकॉक के लिए उड़ान भरा
• 17 फरवरी को बैंकॉक से कंबोडिया गये और वहां 11 दिनों तक ठहरे
• 28 फरवरी को वापस बैंकॉक आ गए
• अगले दिन म्यांमार पहुंच गये और वहां लगातार 21 दिनों तक विश्राम किया
• 22 मार्च को वापस थाइलैंड पहुंचे और अयुथ्या बौद्ध केन्द्र में 9 दिन रहे
• 31 मार्च को वियतनाम पहुंचे और 12 अप्रैल तक वहीं ठहरे
• 12 अप्रैल को एक बार फिर बैंकॉक पहुंच गये और 16 अप्रैल तक वहीं आराम किया। फिर वापस दिल्ली लौट आये।

अचानक विदेश जाने का क्या है राज ?
दिसंबर, 2016 में जब कांग्रेस नोटबंदी के विरोध में कार्यक्रम तैयार कर रही थी, ठीक उसी समय वो विदेश चले गये। तब पार्टी 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों की भी तैयारी कर रही थी, लेकिन यूपी की खाट सभा छोड़कर राहुल लंदन में मस्ती कर रहे थे। यही नहीं 2015 में बिहार चुनाव के ठीक पहले भी वो इसी तरह अचानक फ्रांस चले गये थे। इससे पहले नवंबर, 2014 में भी वो अचानक गायब हो गये थे। जब उनके अचानक गायब होने का सवाल संसद में उठा तो कांग्रेस ने अमेरिका के एक सेमिनार की फोटो जारी की। राहुल गांधी 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के ठीक पहले भी गुप्त स्थान पर छुट्टियां मनाने चले गये थे। तब एक खुली जीप पर घूमते राहुल की फोटो सामने आई थी और बताया गया कि वह रणथंभौर नेशनल पार्क की तस्वीर है। जून, 2013 में जब उत्तराखंड बाढ़ और भू-स्खलन की भारी तबाही झेल रहा था तब भी राहुल विदेशों में आराम फरमा रहे थे। उस समय वहां कांग्रेस की ही सरकार थी। 2012 में हद तब हो गई थी जब वे नये साल की छुट्टियां मनाने फ्रांस चले गए और एक फोटो में एक युवती के साथ दिखाई दिये।

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