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विदेश में देश को ‘बदनाम’ करने की कांग्रेस की साजिश!

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क्या सत्ता के लिए कोई देश का सम्मान दांव पर लगा सकता है? ज्यादातर जवाब आएगा नहीं, परन्तु कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी देश को बदनाम करने में अपनी शान समझने लगे हैं। विशेष बात यह है कि बगैर मुद्दों की गहराई में जाए कि उसका भारत की विदेश नीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा… वे कुछ भी बोल आते हैं। घरेलू राजनीति में राहुल गांधी को तो कोई गंभीरता से नहीं लेता, लेकिन विदेशी धरती पर अपने ही देश के विरूद्ध दिया गया उनका बयान देश के लिए मुश्किलें पैदा करता है।

दरअसल राहुल गांधी 7 मार्च से पांच दिवसीय यात्रा पर सिंगापुर और मलेशिया गए हैं। सिंगापुर में एक कार्यक्रम के दौरान वर्तमान केंद्र सरकार को घेरने के चक्कर में एक बार फिर देश की फजीहत करा दी है।

कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहते हैं राहुल !
देश का यह स्टैंड साफ है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर को लेकर कोई दखल बर्दाश्त नहीं करेगा। लेकिन राहुल गांधी देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष होते हुए भी यह नहीं समझ पा रहे हैं। कश्मीर नीति को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने के चक्कर में सिंगापुर में एक बार फिर विवादित वक्तव्य दे दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात बहुत बुरे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें वहां की स्थिति पर रोना आता है। दरअसल राहुल गांधी सत्तालोलुपता में इतनी नीचता पर गिर गए हैं कि वे भारत की विदेश नीति को ही दांव पर लगा रहे हैं।

घरेलू राजनीति के लिए विदेशी जमीन का इस्तेमाल क्यों?
एक ओर प्रधानमंत्री खुले में भी रोड शो कर ‘भारत सुरक्षित’ है का संदेश दुनिया को दे रहे हैं। दुनिया को यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि यहां निवेश के लिए अनुकूल अवसर है और विश्व समुदाय को भारत में निवेश करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी ने सिंगापुर में भारतीय मूल के सीईओ से मुलाकात के दौरान कहा कि यहां जाति और धर्म के नाम पर विभेद किए जा रहे हैं। देश में चारों तरफ हिंसा ही हिंसा हो रही है। हर ओर असहिष्णुता का आलाम है, कहीं कोई सुरक्षित नहीं है। जाहिर है राहुल गांधी अपने मानसिक दिवालियापन का सबूत नहीं दे रहे तो और क्या है?

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा प्रेस कांफ्रेंस की बातें भी सिंगापुर में उठाईं। ऐसा लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष को इतनी भी समझ नहीं है जिस देश की न्याय व्यवस्था पर पूरी दुनिया यकीन करती है, कम से कम उसे तो बदनाम न किया जाए। हालांकि जब उन्हें सिंगापुर के उसी मंच पर उनकी और कांग्रेस पार्टी की उपलब्धियों के बारे में सवाल किया गया तो उनकी बोलती बंद हो गई। 

बहरहाल ये तो स्थापित सत्य है कि किसी की समझ को विकसित करना साधारण काम नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हैं जब वे विदेशी धरती पर जाकर अपने ही देश की बुराई कर चुके हैं, आइए इनमें से कुछ पर एक नजर डालते है-

बहरीन में देश की नीतियों की आलोचना
8 जनवरी, 2015 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बहरीन के दौरे पर थे। वहां आर्गेनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन की एक बैठक में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार के विरोध में कई बातें कहीं। राहुल ने रोजगार संकट, गिरती जीडीपी, नोटबंदी के गलत आंकड़े पेश कर और असहिष्णुता का मुद्दा उठाकर अपनी तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया।

अमेरिका में भारत को किया बदनाम
सितंबर, 2017 में जब राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर थे, तो उन्होंने यूएस की बर्कले यूनिवर्सिटी में भाषण देते समय, तमाम नीतियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उस वक्त भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाकर, विदेश में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

कांग्रेस ने शेयर किया बेहूदा वीडियो
राहुल गांधी विदेशी दूतावास जाकर भी भारत को बदनाम करने से नहीं चूकते। 15 जनवरी, 2018 को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी 6 दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर भारत आए। जब इजरायल के प्रधानमंत्री देश की सरजमीं पर कदम रख रहे थे, उसी वक्त कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में एक बेहूदा वीडियो शेयर किया। इस ट्विटर में पीएम मोदी को तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ गले मिलते हुए दिखाया गया था, और पीएम मोदी की गले मिलने की कूटनीति का मजाक उड़ाया गया था। कांग्रेस पार्टी ने इस शर्मनाक वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद के साथ पीएम मोदी के गले मिलने के दृश्यों को दिखाया था।

डोकलाम पर सरकार के स्टैंड का विरोध
जून, 2017 में भारत-चीन के बीच 73 दिनों तक सिक्किम से सटे डोकलाम क्षेत्र जबर्दस्त तनातनी का माहौल रहा। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिन हालातों में चोरी-छिपे भारत में मौजूद चीन के राजदूत लिओ झाओहुई से मिलने पहुंच गए उसने सारे देश को हैरान कर दिया। लेकिन पार्टी ने पहले मुलाकात से इनकार किया और फिर स्वीकार किया। सवाल उठने लगे कि राहुल और अन्य कांग्रेसी नेताओं के मन में कुछ गलत नहीं था तो उनकी पार्टी को पहले इस मुलाकात पर झूठ क्यों बोलना पड़ा?

चीनी राजदूत से मिले राहुल के लिए चित्र परिणाम

आइये हम ऐसे ही कुछ अन्य प्रकरणों पर भी नजर डालते हैं जब कांग्रेस के नेताओं ने देश को बदनाम करने की कोशिश की

सलमान खुर्शीद ने किया भारत का अपमान
नवंबर, 2015 के पहले हफ्ते में कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने भी भारत को यह कहकर बदनाम करने की कोशिश की थी कि भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत बंद होने के लिए पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत सरकार जिम्मेदार है। इस्लामाबाद के जिन्ना इंस्टीट्यूट में अपने संबोधन उन्होंने कहा, ”पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर दूरदर्शिता का परिचय दिया था, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान के शांति संदेश का माकूल जवाब देने में नाकाम रही।” खुर्शीद ने यह भी कहा था कि मोदी अभी राजनेता बनने के तौर-तरीके सीख रहे हैं।

सलमान खुर्शीद और मोदी के लिए इमेज परिणाम

मणिशंकर अय्यर ने कहा – ‘हमें ले आइये इन्हें हटाइये’
6 नवंबर, 2015 को मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के टीवी चैनल ‘दुनिया’ पर पाकिस्तान से गुहार लगाते हुए  कहा, ”राष्ट्रपति मुशर्रफ, जो कि फौज के आदमी थे, और हमारे मनमोहन सिंह के बीच तीन साल तक बातचीत जारी रही।” इस पर इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार ने उनसे पूछा कि मौजूदा गतिरोध को दूर करने का क्या तरीका है, इसके जवाब में अय्यर ने कहा, ”इनको (बीजेपी सरकार) हटाइए और हमें ले आइए। और कोई रास्ता नहीं है।” इसपर पत्रकार ने कहा कि यह तो आप लोगों को करना होगा, इसके जवाब में अय्यर ने कहा कि तब तक आप लोग इंतजार कीजिए।

जाहिर है मणिशंकर अय्यर का सीधा इशारा था कि भारत की सत्ता को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान कांग्रेस की सहायता करे और देश में मोदी सरकार को हटाने में मदद करे।

दरअसल अय्यर ही क्यों कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लेकर कई नेताओं ने देश को विदेशों में जाकर बदनाम किया है। ऐसे कई प्रकरण सामने हैं जिनमें कांग्रेसी नेताओं ने देश के मान को नुकसान पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया है।

कश्मीर में आतंकियों पर कार्रवाई का विरोध
28 अक्टूबर, 2017 को पी चिदंबरम ने कहा, ”जम्मू-कश्मीर के लोगों से मेरी बातचीत के जरिए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि जब भी वे आजादी की मांग करते हैं तो दरअसल, इसमें ज्यादातर लोगों की आजादी का मतलब स्वायत्तता से होता है।”  कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के इस बयान ने शांत होते कश्मीर को एक बार फिर सुलगा दिया। पी चिदंबरम के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस कश्मीर में आतंकियों की मांग को समर्थन करती है। स्पष्ट है कि भारत से अलग होने और पाकिस्तान में मिलने की ख्वाहिश रखने वालों को पी चिदंबरम उकसाया। इससे न देश की बदनामी हुई बल्कि भारत सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए जाने लगे। 

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आतंकियों की फांसी पर भी पॉलिटिक्स
संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु की फांसी पर भी कांग्रेस ने पॉलटिक्स की थी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देना गलत था और उसे गलत तरीके से दिया गया। इतना ही नहीं यही कांग्रेस है जिनके नेताओं ने याकूब मेनन की फांसी पर भी आपत्ति जताई थी।

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