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देखिए किस तरह राफेल डील पर राहुल गांधी के आरोपों की दसॉल्ट सीईओ ने उड़ाई धज्जियां

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राफेल विमान डील पर हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के झूठे आरोपों की दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कलई खोलकर रख दी। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े राफेल डील पर कांग्रेस बेबुनियाद आधार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर देश को बरगलाने में लगी हुई है, लेकिन न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में सीईओ एरिक ट्रैपियर ने साफ कहा कि मोदी सरकार में राफेल विमान की डील यूपीए सरकार के वक्त हुई डील से 9 प्रतिशत कम दाम पर हुई है।

झूठ नंबर 1 बेनकाब

तीन गुना कीमत पर खरीदा !

कांग्रेस बहुत गैरजिम्मेदारी के साथ राफेल डील को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी हर सभा में ये आरोप लगाते हैं कि यूपीए सरकार में राफेल डील को लेकर जो दाम तय हुए थे, उसे मोदी सरकार ने तीन गुना ज्यादा दाम देकर सौदा किया है। हालांकि किस दाम पर राफेल का सौदा हो रहा था इसे लेकर राहुल को खुद पता नहीं है, वो हर बार अलग-अलग दाम बता देते हैं। इस आरोप का जवाब देते हुए दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने बताया कि जो भारतीय वायुसेना को राफेल एयरक्राफ्ट मिल रहे हैं, वह करीब 9 फीसदी सस्ते हैं। उन्होंने कहा कि, ”जब आप 18 फ्लाइवे की कीमत से तुलना करते हैं तो 36 का दाम भी वही है। 36, 18 का दोगुना है। इसलिए यह रकम भी दोगुनी होनी चाहिए थी। क्योंकि यह गवर्नमेंट टु गवर्नमेंट डील है, इसलिए कीमत पर मोल-भाव हुआ। मुझे इसकी कीमत 9 प्रतिशत कम करनी पड़ी।”

झूठ नंबर 2 बेनकाब

126 की जगह 36 खरीदे !

कांग्रेस का एक और झूठ ये है कि मोदी सरकार एक राफेल विमान को करीब 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है, जबकि यूपीए सरकार ने 126 राफेल विमानों खरीदने के ले 526 करोड़ रुपये में एक राफेल विमान का सौदा तय किया था। इस सवाल के जवाब में दसॉल्ट एविएशन कंपनी के सीईओ ट्रैपियर ने कहा कि, ” उड़ने के लिए तैयार स्थिति यानी फ्लाई अवे कंडीशन में 36 कॉन्ट्रैक्ट वाले राफेल का दाम 126 कॉन्ट्रैक्ट वाले दाम से भी काफी सस्ता है। 126 विमान के सौदे वाली बात गंभीरता पूर्वक नहीं की गई, इसलिए नए सिरे से 36 विमानों का सौदा हुआ।”

झूठ नंबर 3 बेनकाब

अंबानी के लिए एचएएल दरकिनार !

आम लोगों की सहानुभूति हासिल करने के लिए कांग्रेस इस सौदे में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल को दरकिनार करने और अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रही है। दसॉल्ट कंपनी ने इसका भी भांडाफोड़ कर दिया है। ट्रैपियर ने कहा कि,  ”जब भारत सरकार से 126 राफेल विमान सौदे की बात चल रही थी, तब शुरुआत में एचएएल को ही इसका ऑफसेट पार्टनर बनाया जाना था। अगर ये डील सही तरीके से बढ़ती तो करार एचएएल को ही मिलता। 126 विमान का करार न होने के बाद  सही नहीं हुआ इसलिए 36 विमान के कॉन्ट्रैक्ट पर बात हुई. जिसके बाद ये करार रिलायंस के साथ आगे बढ़ा।” एएनआई के साथ इंटरव्यू में ट्रैपियर ने कहा कि, ” डील के अंतिम वक्त में खुद एचएएल ने इसमें शामिल होने की अनिच्छा जाहिर कर दी, इसके बाद रिलायंस से करार हुआ। इतना ही नहीं, पहले दसॉल्ट कुछ और कंपनियों से भी ऑफसेट करार के बारे में भी सोच रही थी, जिसमें टाटा ग्रुप भी शामिल था। लेकिन इस पर फैसला नहीं हो सका और आखिरकार ये करार रिलायंस के साथ हुआ।”

झूठ नंबर 4 बेनकाब

राफेल डील में अंबानी को चुनने का दबाव  

कांग्रेस इस डील में रिलायंस को पीएम मोदी के दबाव पर पार्टनर बनाने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि दसॉल्ट ने रिलायंस को 284 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की, जबकि रिलायंस के पास डिफेंस सेक्टर में काम करने कोई अनुभव नहीं हैं। कांग्रेस नेताओं के पास इस आरोप के कोई साक्ष्य नहीं हैं लेकिन एरिक ट्रैपियर ने इन आरोपों की सौदे की बारीक बातों में जाकर चिंदियां बिखेर दी। दसॉल्ट एविएशन के सीईओ ने कहा कि, ”रिलायंस-दसॉल्ट ज्वाइंट वेंचर में 49 फीसदी हिस्सा दसॉल्ट और 51 फीसदी हिस्सा रिलायंस का है। इसमें कुल 800 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है जिसमें दोनों कंपनियां 50-50 की हिस्सेदार होंगी।” रिलायंस को चुनने के पीछे दलील देते हुए दसॉल्ट के सीईओ ने कहा कि, ”ऑफसेट को जारी करने के लिए हमारे पास 7 साल थे, जिसमें शुरुआती 3 साल में कुछ तय नहीं हो सका। उसके बाद 40 फीसदी हिस्सा 30 कंपनियों को दिया गया, इसमें से रिलायंस के पास महज 10 फीसदी हिस्सेदारी है।” उन्होंने कहा कि, ”हमने जो रकम इस वेंचर में निवेश की है, वो रिलायंस नहीं बल्कि ज्वाइंट वेंचर में है। इसमें रिलायंस ने भी पैसा लगाया है, वो हमारे इंजीनियर इंडस्ट्रीयल पार्ट को लीड करेंगे। इससे रिलायंस को भी एयरक्राफ्ट बनाने का एक्सपीरियंस मिलेगा।”

झूठ नंबर 5 बेनकाब

दसॉल्ट झूठ बोल रही है

मोदी सरकार को भ्रष्टाचार के मामले में घेरने का अपना हर दांव नाकाम होते देख कांग्रेस नेता बिल्कुल ढिठाई पर उतर आए। जब बार बार दसॉल्ट एविएशन ये सफाई दी कि इस सौदे में कोई घपला नहीं हुआ, ये सौदे एक सार्वभौम सरकार का दूसरी सार्वभौम सरकार के बीच हुआ है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ उनके नेता भी ये आरोप लगाने लगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बचाने फ्रांस और दसॉल्ट झूठ बोल रही है। दसॉल्ट के सीईओ ने इन आरोपों की भी धज्जियां उड़ा दी। ट्रैपियर ने कहा कि, ”मैं झूठ नहीं बोलता. मैंने जो बात पहले कही और जो बयान दिया बिल्कुल सही हैं. मैं झूठ बोलने के लिए नहीं जाना जाता। मेरे पद, सीईओ, पर रहकर आप झूठ नहीं बोल सकते। ”  

झूठ नंबर 6 बेनकाब

दसॉल्ट का कांग्रेस कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते बोलते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दसॉल्ट कंपनी की साख पर भी सवाल उठाते रहे हैं जबकि उन्हें न अपनी पार्टी के इतिहास की चिंता है और न दसॉल्ट कंपनी की जानकारी। दसॉल्ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी के आरोपों से दुख पहुंचा है।” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का हमारा लंबा अनुभव है। हमारी पहली डील 1953 में भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के साथ हुई थी।” इसके बाद भी दसॉल्ट ने कई प्रधानमंत्रियों के साथ रक्षा सौदे किये। उन्होंने कहा कि, ”हम भारत के साथ काम कर रहे हैं, किसी पार्टी के साथ नहीं। हम भारतीय वायुसेना और भारत सरकार को सामरिक उत्पाद जैसे लड़ाकू विमान सप्लाई कर रहे हैं, यही सबसे महत्वपूर्ण है।”

 
देखिए पूरा इंटरव्यू-

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