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प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रवाद को मुख्यधारा की राजनीति का केन्द्र बनाया

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने राष्ट्रवादी व्यक्तित्व और व्यवहार का उदाहरण पेश किया है। 26 मई 2014 को शपथ ग्रहण लेने से आज तक प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व और व्यवहार में राष्ट्रवाद का विचार दिखाई पड़ता है।

राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रीय परिधान के रुप में पगड़ी को धारण करना

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर अपनी वेशभूषा से राष्ट्रवाद के विचार को मूर्त रुप देते हैं। इन अवसरों पर हर वर्ष अलग-अलग रंगों की पगड़ी पहनते हैं। पगड़ी इस देश का एक ऐसा परिधान है, जो हर क्षेत्र में विभिन्न रूपों में पहनी जाती है और एक सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। पीएम मोदी ने देश के इस राष्ट्रीय सम्मान को धारण कर पगड़ी को भारत को एक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का प्रबल माध्यम बनाया।एक भारत श्रेष्ठ भारत के विचार को मूर्त रूप दिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषणों में देश की विभिन्नता को हमेशा भारतीयता के विराट रूप में बताया और इसी सूत्र को देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक नीतियों को बनाने का आधार बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र की आर्थिक तरक्की के लिए हर क्षेत्र और अंचल के पारंपरिक आर्थिक गतिविधि को केन्द्र में रखकर नई आर्थिक नीति बनायी, जिससे हर क्षेत्र के उत्पाद विश्व बाजार में पहुंच सकें और भारत के उत्कर्ष उत्पादों की विश्व में मांग बढ़े। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हर क्षेत्र को समान रूप से विकसित करने के लिए सड़कों, पुलों, रेलवे लाइनों और बंदरगाहों का निर्माण दोगुने रफ्तार से किया।

दशकों से देश का पूर्वी हिस्सा विकास की दौड़ में पश्चिम से पिछड़ा रहा। पूर्वी भारत के इस पिछड़ेपन से पूरा भारत आगे नहीं बढ़ पा रहा था। प्रधानमंत्री मोदी ने योजनाओं की इस कमी को दूर किया और आज पूर्वी भारत को विकसित करने के लिए विशेष योजनाएं और नीतियां लागू हो चुकी हैं। परिणाम यह हुआ है कि पूर्वी भारत के राज्यों का सीधा व्यापारिक और सांस्कृतिक लेन-देन उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से हुआ है।  प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयता के विराट स्वरूप को सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने में भी बुना। एक राज्य को दूसरे राज्य के साथ मिलकर साहित्य, लोककला, संगीत, खेल कूद को साझा करने के लिए महोत्सवों के आयोजन को बढ़ावा दिया। हर राज्य के आंचलिक नायकों और लोककलाओं के साथ अपने को हर क्षण जोड़ा।

राष्ट्र के सभी महापुरुषों का सम्मान-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दशकों से देश में चली आ रही उस परंपरा को तोड़ा जिसमें एक ही परिवार के चंद लोगों के कार्यों का उल्लेख उनके जन्म और मृत्यु के दिन जनमानस को प्रेरित करने के लिए किया जाता था। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार बल्लभ भाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया तो हरियाणा के सर छोटूराम की प्रतिमा का भी अनावरण किया। केरल से लेकर जम्मू-कश्मीर तक के नायकों के कार्यों को उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर उल्लेख कर जनमानस को प्रेरित किया। पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया और युवाओं से संवाद कर उन्हें देश के लिए अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया। संविधान के रचनाकार बाबासाहेब अंबेडकर के योगदान को रेखांकित करने के लिए पंचतीर्थों का निर्माण किया।

देश में पहली बार ‘आजाद हिंद सरकार’ की 75वीं जयंती के मौके पर 21 अक्टूबर को लाल किले पर झंडारोहण किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर को 75 साल पहले आजादी के तीन साल पहले ही स्वतंत्र भारत की पहली सरकार बनायी थी। यह सरकार अंडमान द्वीप समूह पर विजय प्राप्त करने के बाद बनाई गई थी। यही नहीं 30 दिसंबर, 2018 को अंडमान में उस स्थान पर 150 फीट ऊंचे तिरंगे का झंडारोहण भी किया। यह झंडारोहण उसी स्थान पर किया जिसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सबसे पहले अंग्रेजों से जीता था। 

राष्ट्रीय चेतना योग, आयुर्वेद और कुंभ को अंतराष्ट्रीय महत्व दिलवाया

देश की सांस्कृतिक चेतना योग और आयुर्वेद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया। 2014 के अपने पहले संयुक्त राष्ट्र संघ के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व के देशों से 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे विश्व के 197 से अधिक देशों ने सर्वसम्मति से मान लिया। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी प्रस्ताव को बिना किसी विरोध के स्वीकार किया गया। 2015 के पहले विश्व योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों ने मनाया और खुद प्रधानमंत्री मोदी ने राजपथ पर 80 देशों के प्रतिनिधियों और देशवासियोंं के साथ योग किया। योग के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद को भी पुर्नजीवित किया। दिल्ली में AIIMS की तरह अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का शुभारंभ किया। योग और आयुर्वेद जिस संस्कृति की देन है उस भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े पर्व कुंभ को यूनेस्को से सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिलवाया। इस बार प्रयागराज में विश्व का सबसे बड़ा कुंभ शहर बनाकर करीब 15 करोड़ लोगों के संगम का कार्य किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश की उध्वर्गामी चेतना को मूर्त रूप देने का काम किया, जो भारत की राष्ट्रीय चेतना है। इस राष्ट्रीय चेतना के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रुप हैं, लेकिन वह एक है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्यक्तित्व में आत्मसात ही नहीं किया बल्कि उसे उदाहरण के रुप में पेश किया है।

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