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खत्म हो ट्रिपल तलाक, शगुफ्ता की पीएम मोदी से गुहार

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तीन तलाक पर छिड़े विवाद के बीच सहारनपुर की एक गर्भवती महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। दो बेटियों की मां गर्भवती शगुफ्ता को उसके पति ने तीन बार तलाक कहकर घर से निकाल दिया। फिर बेटी पैदा होने के डर से शगुफ्ता के ससुराल वालों ने अबॉर्शन के लिए दबाव डाला। जब उसने अबॉर्शन से मना कर दिया तो उसे बुरी तरह पीटा गया। फिर पति ने तलाक देकर घर से निकाल दिया।

बेसहारा शगुफ्ता का कहना है कि तलाक की आड़ में महिलाओं का शोषण हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रिपल तलाक को खत्म कर देना चाहिए। शगुफ्ता को प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है और ये उम्मीद वैसे ही नहीं है। प्रधानमंत्री नोदी आज देश के सवा सौ करोड़ लोगों के लिए एक उम्मीद बन गए हैं। वो देश के लोगों के लिए एक आवाज बन चुके हैं। लोगों को यह विश्वास हो गया है कि प्रधानमंत्री उनकी बात जरूर सुनेंगे। पिछले तीन साल में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से लोगों के दिल में जगह बनाई है उससे लोगों को लगने लगा है कि वो उनकी मदद जरूर करेंगे। उनकी शिकायत पर कार्रवाई जरूर करेंगे।

तीन तलाक को लेकर देश भर में जोर-शोर से चर्चा चल रही है। भारत में प्रचलित शरीयत के मुताबिक अगर कोई शौहर अपनी बीवी को एक साथ तीन बार तलाक बोल दे तो उसका तलाक हो जाता है। चाहे गुस्से और नशे में ही क्यों न हो। इसके मुताबिक फोन पर, एसएमएस से, ई-मेल से भी तलाक हो जाता है। ट्रिपल तलाक से मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न हो रहा है। मुस्लिम समाज के भीतर से भी अब इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। कई महिलाओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मुस्लिम महिलाओं के कई संगठन इसे खत्म करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं। मुस्लिम महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं।

मुस्लिम आबादी वाले कई देशों में यह कानून सालों पहले हटा दिया गया लेकिन भारत में यह अब भी चलन में है। सुप्रीम कोर्ट 2007 में तीन तलाक को गैर संविधानिक और कुरान के खिलाफ करार दे चुका है। इलाहबाद हाई कोर्ट ने भी हाल ही में तीन तलाक से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए इसे असंवैधानिक और कुरान के खिलाफ करार दिया। लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसका विरोध कर रहा है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि धर्म के मामले में कोर्ट फैसला नहीं दे सकता।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के विरोध में हलफनामा दायर किया है। केंद्र सरकार ने इसे महिलाओं के अधिकार से जुड़ा मामला बताया है।

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