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कांग्रेस सरकारों की देन है गरीबी, पीएम मोदी की नीतियों से सशक्त हो रहा है आम आदमी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अपनी नीतियों से देश में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई पाटने के काम में लगी है। मई, 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर पॉलिसी के केंद्र में आम आदमी, गरीब, मजदूर, ग्रामीण और महिलाएं रहती हैं। दूसरी तरफ अगर कांग्रेस की बात करें तो, देश पर 60 वर्षों तक शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देश में लूट-खसोट की है। कांग्रेस की सरकारों में अधिकतर वक्त तक नेहरू-गांधी परिवार के लोग ही प्रधानमंत्री रहे हैं, और इनकी सरकारों ने देश की प्राकृतिक संपदा से लेकर आम लोगों के हक को जमकर लूटा। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भ्रष्टाचार के बल पर अकूत दौलत कमाई, अगर कांग्रेसियों द्वारा भ्रष्टाचार नहीं किया गया होता तो आज भारत, दुनिया का सबसे समृद्ध देश होता और हर नागरिक संपन्न होता। कांग्रेस के भ्रष्टाचार की वजह से ही देश से गरीबी खत्म नहीं हो सकी। वहीं मोदी सरकार गरीबी खत्म करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। एक नजर डालते हैं कांग्रेस के भ्रष्टाचार के कारनामों और मोदी सरकार की जनसरोकार से जुड़ी नीतियों पर।

कांग्रेस सरकारों ने घोटाले न किए होते तो आज सोने की चिड़िया होता भारत !
कांग्रेस पार्टी ने 60 सालों तक देश को खूब जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म नहीं होती। आत्महित और घोटाले कांग्रेस का हिस्सा बन गए थे। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार 2004-2014 के कार्यकाल के दौरान तो हमेशा किसी न किसी घोटाले की खबरों में रही है। इस दौरान साल दर साल घोटालों की संख्या बढ़ती ही चली गई। कांग्रेस सरकार ने करीब 5,58,278 करोड़ रुपये का घोटाला किया। एक आंकलन के अनुसार अगर सिर्फ ये घोटाले न हुए होते तो भारत आज विश्व महाशक्ति होता।

कांग्रेस शासन में हुए घोटालों की सूची
कांग्रेस सरकार में दर्जनों घोटाले हुए, नीचे दी गई सूची से साबित हो रहा है कि कांग्रेस सरकार के शासन में सिर्फ भ्रष्टाचार होता था, और आम लोगों की गाढ़ी कमाई की लूट होती थी।

कोयला घोटाला 1.86 लाख करोड़ रुपये
2जी घोटाला 1.76 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला 70,000करोड़ रुपये
कामनवेल्थ घोटाला 35,000 करोड़ रुपये
स्कार्पियन पनडुब्बी घोटाला 1,100 करोड़ रुपये
अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला 3,600 करोड़ रुपये
टाट्रा ट्रक घोटाला 14 करोड़ रुपये

एक नजर कांग्रेस की सरकारों में हुए कुछ प्रमुख घोटालों पर-

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2008)
भारत में सबसे बड़ा घोटाला 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला था, जिसमें दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर निजी दूरसंचार कंपनियों को 2008 में बहुत सस्ते दरों पर 2 जी लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया था। नियमों का पालन नहीं किया गया था, लाइसेंस जारी करते समय केवल पक्षपात किया गया था। इसमें 1.96 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। दरअसल सरकार ने 2001 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए प्रवेश शुल्क रखा था। इसमें दूरसंचार के बारे अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किया गया था। भारत में 2001 में मोबाइल उपभोक्ता 4 मिलियन थे जो 2008 में बढ़ोतरी करके 350 मिलियन तक पहुंच गये।

सत्यम घोटाला (2009)
सत्यम कंप्यूटर सर्विसेजस के घोटाले से भारतीय निवेशक और शेयरधारक बुरी तरह प्रभावित हुए। यह घोटाला कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, इसमें 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू इस घोटाले में शामिल थे, जिन्होंने सब कुछ संभाला हुआ था। बाद में उन्होंने 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर के खाते को किसी प्रकार के संदेह के कारण खारिज कर दिया। उस साल के अंत में, सत्यम का 46% हिस्सा टेक महिंद्रा ने खरीदा था, जिसने कंपनी को अवशोषित और पुनर्जीवित किया।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला (2010)
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी और संचालन के लिए लिये लिया गया धन भारी मात्रा में घोटाले में चला गया। इसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इस घोटाले में कई भारतीय राजनेता नौकरशाह और कंपनियों के बड़े लोग शामिल थे। इस घोटाले के प्रमुख पुणे के निर्वाचन क्षेत्र से 15 वीं लोकसभा के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि सुरेश कलमाड़ी थे। उस समय, कलमाड़ी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। इसमें शामिल अन्य बड़े लोगों में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री- शीला दीक्षित और रॉबर्ट वाड्रा हैं। इसका गैर-अस्तित्व वाली पार्टियों के लिए भुगतान किया गया, उपकरण की खरीद करते समय कीमतों में तेजी आई और निष्पादन में देरी हुई थी।

कोयला घोटाला (2012)
कोयला घोटाले के कारण भारत सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। सीएजी ने एक रिपोर्ट पेश की और कहा कि 194 कोयला ब्लॉकों की नीलामी में अनियमितताऐं शामिल हैं। सरकार ने 2004 और 2011 के बीच कोयला खदानों की नीलमी नहीं करने का फैसला किया था। कोयला ब्लॉक अलग-अलग पार्टियों और निजी कंपनियों को बेच दिये गये थे। इस निर्णय से राजस्व में भारी नुकसान हुआ था।

हेलिकॉप्टर घोटाला (2012)
यह घोटाला भारत में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जिसमें कई राजनेता, भारतीय वायु सेना के चीफ एयर मार्शल एसपी त्यागी और हेलिकॉप्टर निर्माता अगस्टा वेस्टलैंड जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। कंपनी ने 610 मिलियन आमेरिकी डॉलर के 12 हेलीकाप्टरों की आपूर्ति में एक अनुबंध पाने के लिए रिश्वत दी थी। इटली की एक अदालत में 15 मार्च 2008 को प्रस्तुत एक नोट यह संकेत करता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी घोटाले में शामिल थीं।

टाट्रा ट्रक घोटाला (2012)
वेक्ट्रा के अध्यक्ष रवि ऋषिफॉर्मर और सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग प्रतिबंध अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला पंजीकृत किया था। इसमें सेना के लिए 1,676 टाटा ट्रकों की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी।

आदर्श घोटाला (2012)
इस घोटाले में मुंबई की कोलाबा सोसायटी में 31 मंजिल इमारत में स्थित फ्लैटों को बाजार की कीमतों से कम कीमत पर बेचा गया था। इस सोसायटी को सैनिकों की विधवाओं और भारत के रक्षा मंत्रालय के कर्मियों के लिए बनाया गया था। समय की अवधि में, फ्लैटों के आवंटन के लिए नियम और विनियमन संशोधित किए गए थे। इसमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख और अशोक चव्हाण के खिलाफ आरोप लगाये गये थे। यह जमीन रक्षा विभाग की थी और सोसायटी के लिये दी गई थी।

यह तो थी कांग्रेस पार्टी के घोटालों की लिस्ट, अब आपको बताते हैं उन घोटालों के बारे में जिन्हें गांधी परिवार के लोगों ने अंजाम दिया, और अरबों की दौलत कमाई।

नेशनल हेराल्ड स्कैंडल
गांधी परिवार पर अवैध रूप से नेशनल हेराल्ड की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति हड़पने का आरोप है। वर्ष 1938 में कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज नाम से तीन अखबार प्रकाशित करती थी। एक अप्रैल, 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया और राहुल गांधी ने ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नाम की कंपनी खोली और एजेएल को 90 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन दिया। एजेएल यंग इंडिया कंपनी को लोन नहीं चुका पाई। इस सौदे की वजह से सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एजेएल की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया।
इस कंपनी में मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के 12-12 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76 प्रतिशत शेयर हैं।
गांधी परिवार पर अवैध रूप से इस संपत्ति का अधिग्रहण करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। इस मामले में सोनिया और राहुल के विरुद्ध संपत्ति के बेजा इस्तेमाल का केस दर्ज कराया गया। अब इसी मामले में आयकर विभाग ने प्रियंका गांधी की संलिप्तता भी पाई है।

गांधी परिवार के लिए चित्र परिणाम

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
वर्ष 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी ‘अगस्ता वेस्टलैंड’ से कमीशन लेने के आरोप लगे। दरअसल अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इतालवी कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। इतालवी कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
वर्ष 2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीदकर  भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा। रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन लेने का आरोप लगा। बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना मूल उद्देश्य था। यह तथ्य भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई और हिस्सों में भी बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं।

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान के बीकानेर में हुए जमीन घोटालों में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारी एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़ी हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिए जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

पति के चलते प्रियंका वाड्रा पर भी उठ चुके हैं सवाल
हरियाणा में ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट सामने आने पर भी कांग्रेस में खलबली मच चुकी है। भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की फांस में तब वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा को भी घेरे में ले लिया गया था। नतीजा यह हुआ कि खुद प्रियंका वाड्रा को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उक्त संपत्ति से उनके पति रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी का कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल वहां भी वाड्रा पर जमीन घोटाले का आरोप लगा हुआ  है। इसपर जांच के लिए बिठाए गए ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में 20 से ज्यादा प्रॉपर्टीज की जानकारी दी गई, जो वाड्रा और उनकी कंपनियों ने खरीदी थीं। इनमें से एक भूखंड को स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से खरीदा था। आरोपों के अनुसार ओंकारेश्वर से खरीदी गई प्रॉपर्टी को फिर लैंड यूज में बदलाव के बाद कहीं ज्यादा कीमत पर डीएलएफ के हाथ बेच दिया गया था और इस तरह 50.50 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हासिल किया गया। ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस मामले की जांच की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा को डीएलएफ से जो पैसा मिला कि क्या उसके एक हिस्से का इस्तेमाल उनकी पत्नी ने हरियाणा के फरीदाबाद में संपत्ति खरीदने के लिए किया। कमीशन ने 20 से ज्यादा ऐसी प्रॉपर्टी की रिपोर्ट दी है।  

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। तब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुक़सान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा।

इन घोटालों से साफ हो गया है कि कांग्रेस का सिर्फ एक ही मकसद है, सत्ता हासिल करो, जमकर भ्रष्टाचार करो, जनता का पैसा लूटो और अपना घर भरो। वहीं, दूसरी तरफ जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी है, देश में जनता के पैसों की लूट बंद हो गई है, जनहित में तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है, और बेईमानों की शामत आई हुई है।

टैक्स चोरों पर कसा आयकर विभाग का शिकंजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कालाधन और बेनामी संपत्ति के खिलाफ जो अभियान छेड़ा है, उसके परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं। आयकर विभाग टैक्स नहीं देने वालों और कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त रवैया अपना रही है। यही वजह है कि आयकर विभाग द्वारा एक साल के भीतर ऐसे लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है। वहीं आयकर विभाग बड़ी संख्या में बकायेदारों को कोर्ट से सजा दिलाने में भी कामयाब हुआ है, साथ ही जुर्माना वसूलने के बाद मामलों के निपटारे में भी वृद्धि हुई है। आयकर विभाग की तरफ से उन लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, जो जान बूझकर कर चोरी करने, किसी प्रकार के कर का भुगतान नहीं करने, जान बूझकर आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने, सत्‍यापन में फर्जी जानकारी और स्रोत पर काटे गए कर को जमा नहीं करना में शामिल हैं। नीचे दिए गए आंकड़ों से समझा जा सकता है कि मोदी सरकार कालेधन और टैक्स चोरों के खिलाफ किस कड़ाई से पेश आ रही है।

            टैक्स चोरों पर दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी
वर्ष दर्ज केस वृद्धि
2016-17 784 184%
2017-18(नवंबर-17 तक) 2225

 

  आयकर विभाग द्वारा शिकायतों के निपटारे में बढ़ोतरी
वर्ष निपटाए गए मामले वृद्धि
2016-17 575 83%
2017-18(नवंबर-17 तक) 1052

 

          बकायेदारों को कोर्ट से सजा दिलाने में बढ़ोतरी
वर्ष बकायेदारों को सजा वृद्धि
2016-17 13 269%
2017-18(नवंबर-17 तक) 48

 

3,500 करोड़ की बेनामी संपत्तियां जब्त 
सिर्फ आयकर चोरी करने वालों पर ही नहीं, बेनामी संपत्ति और कालाधन रखने वालों पर भी मोदी सरकार का चाबुक जोरों से चल रहा है। आयकर विभाग ने पिछले एक वर्ष में कार्रवाई करते हुए देशभर में 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की 900 से अधिक बेनामी संपत्तियां जब्त की हैं। इसमें फ्लैट, दुकानें, आभूषण और वाहन आदि शामिल हैं। आयकर विभाग के मुताबिक बेनामी संपात्ति लेन-देन रोकथाम कानून के तहत कार्रवाई तेज कर दी गई है। मोदी सरकार ने 1 नवंबर, 2016 को इस कानून को लागू किया था। इस कानून के तहत, चल-अचल किसी किस्म की बेनामी संपत्तियों को फौरी तौर पर कुर्क करने और फिर उनको पक्के तौर पर जब्त करने की कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। आयकर विभाग ने मई 2017 में देशभर में अपने अन्वेषण निदेशालय के तहत 24 खास बेनामी रोकथाम इकाइयां गठित की हैं, ताकि इस कानून का अनुपालन आसान किया जा सके।

एक नजर डालते हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने देश में कालाधन, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं।

जीएसटी से भ्रष्टाचार पर वार
देशभर में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक जुलाई से लागू हो चुका है। कर प्रणाली में बदलाव होने से एक तरफ मल्टीपल टैक्स के जंजाल से देशवासी मुक्त हुए। कर की गणना आसान हुआ। कर प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। जीएसटी के लागू होने से कच्चे बिल से खरीदारी करने में काफी कमी आई है। आने वाले दिनों में यह इतिहास हो जाएगा क्योंकि जीएसटी के लागू होने से उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक सामान पहुंचने में जितने मिडलमैन हैं। सबको जीएसटीएन में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो गया है। ऐसे में हर स्तर से पक्का बिल बनता है। पक्के बिल से खरीद-बिक्री होने से असली एकाउंट्स में ट्रांजेक्शन दिखता है। व्यापारी के एक्चुअल आमदनी और ग्राहकों द्वारा भुगतान किया हुआ टैक्स सब सरकार की जानकारी में रहता है। लेन-देन में हेरा-फेरी संभावना खत्म हुई।

दो लाख से अधिक फर्जी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द
नोटबंदी के बाद सरकार ने काला धन जमा करने के लिए बनाई गई तीन लाख से भी अधिक फर्जी कंपनियों का पता लगाया। इनमें से ज्यादातर कंपनियां, नेताओं और व्यापारियों के कालेधन को सफेद करने का काम करने में लगी थीं। सरकार की कार्रवाई में ऐसी दो लाख से ज्यादा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है। नोटबंदी के दौरान इन फर्जी कंपनियों में जमा 65 अरब रुपये की पड़ताल की जा रही है। कार्रवाई के दौरान ऐसी कंपनियों का भी पता लगा, जहां एक एड्रेस पर ही 400 फर्जी कंपनियां चलाई जा रहीं थी।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता को बढ़ावा
सरकार ने देश में डिजिटलीकरण और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है। सरकार ने डिजिटल क्रांति और डिजिटल भुगतान के लिए स्वाइप मशीन, पीओसी मशीन, पेटीएम और भीम ऐप जैसे सरल उपायों को अपनाया है। जनता भी सहजता के साथ इसे अपना रही है। इससे देश में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन बढ़ा है। डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के फलस्वरूप इससे शासन-प्रशासन, नौकरशाही में पारदर्शिता आई है और नागरिकों में भी जागरुकता बढ़ी है। 

पीएमजीकेवाई के अंतर्गत कालेधन की घोषणा
नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काले धन रखने वालों को एक आखिरी मौका देते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) दिसंबर 2016 में लॉन्च की गई थी। इसमें कालाधन रखने वालों को टैक्स और 50 प्रतिशत जुर्माना देकर पाक-साफ होने का मौका दिया गया। साथ ही कुल अघोषित आय का 25 प्रतिशत ऐसे खाते में चार साल तक रखना होता है, जिसमें कोई ब्याज नहीं मिलता। नोटबंदी के बाद अघोषित आय के खुलासे में तेजी आई है। अभी तक 21,000 लोगों ने 4,900 करोड़ रुपये के कालेधन की घोषणा की है।

नोटबंदी से पहले आईडीएस स्कीम  
कालेधन पर नियंत्रण करने के लिए मोदी सरकार ने नोटबंदी से पहले ही सभी कारोबारियों और उद्योगपतियों को अपना काला धन घोषित करने का ऑफर आईडीएस स्कीम के तहत दिया था। इस योजना के तहत लोग अपना सारा काला धन सार्वजनिक करके 25 प्रतिशत टैक्स और जुर्माने का भुगतान करके कार्रवाई से बच सकते थे। इसके तहत 65,000 करोड़ रुपये का कालाधन उजागर हुआ था।

केंद्र सरकार की ओर से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए एक के बाद एक कई निर्णय लिए गये हैं। 

जन धन योजना- इसके तहत गरीबों के लिए अब तक लगभग 30 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। सरकारी योजनाओं में सब्सिडी बिचौलियों के हाथों से दिये जाने के बजाय सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचने लगी है।

कर बचाने में मददगार देशों के साथ कर संधियों में संशोधन मॉरीशस, स्विटजरलैंड, सऊदी अरब, कुवैत आदि देशों के साथ कर संबंधी समझौता करके सूचनाओं को प्राप्त करने का रास्ता सुगम कर लिया गया है।

नोटबंदी- कालेधन पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद सबसे बड़ा कदम 08 नवंबर 2016 को उठाया। नोटबंदी के जरिए कालेधन के स्रोतों का पता लगा। लगभग तीन लाख ऐसी शेल कंपनियों का पता चला जो कालेधन में कारोबार करती थी। इनमें से लगभग दो लाख कंपनियों और उनके 1 लाख से अधिक निदेशकों की पहचान करके कार्रवाई की जा रही है।

• बेनामी लेनदेन रोकथाम (संशोधन) कानून- नोटबंदी के बाद सरकार के पास बेनामी संपत्तियों के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध हो चुकी है। बेनामी लेनदेन रोकथाम (संशोधन) कानून, जिसे सालों से कांग्रेस ने लटकाये रखा था, उसे लागू करके इन संपत्तियों के खिलाफ जांच चल रही है।

• फर्जी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई- सीबीआई ने छद्म कंपनियों के माध्यम से कालेधन को सफेद करने वाले कई गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। देश में करीब तीन लाख ऐसी कंपनियां हैं, जिन्होंने अपनी आय-व्यय का कोई ब्योरा नहीं दिया है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां नेताओं और व्यापारियों के कालेधन को सफेद करने का काम करती हैं।

• रियल एस्टेट कारोबार में 20,000 रुपये से अधिक कैश में लेनदेन पर जुर्माना- रियल एस्टेट में कालेधन का निवेश सबसे अधिक होता था। पहले की सरकारें इसके बारे में जानती थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करती थीं। इस कानून के लागू होते ही में रियल एस्टेट में लगने वाले कालेधन पर रोक लग गई।

• राजनीतिक चंदा- राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से ज्यादा कैश में चंदा देने पर पाबंदी। इसके लिए इलेक्टोरल बॉन्ड लाने का ऐलान किया गया।

• स्रोत पर कर संग्रह- 2 लाख रुपये से अधिक के कैश लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। इससे ऊपर के लेनदेन चेक, ड्रॉफ्ट या ऑनलाइन ही हो सकते हैं।

• ‘आधार’ को पैन से जोड़ा- कालेधन पर लगाम लगाने के लिए ये एक बहुत ही अचूक कदम है। ये निर्णय छोटे स्तर के भ्रष्टाचारों पर भी नकेल कसने में काफी कारगर साबित हो रहा है।

• सब्सिडी में भ्रष्टाचार पर नकेल- गैस सब्सिडी को सीधे बैंक खाते में देकर, मोदी सरकार ने हजारों करोड़ों रुपये के घोटाले को खत्म कर दिया। इसी तरह राशन कार्ड पर मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को भी 30 जून 2017 के बाद से सीधे खाते में देकर हर साल 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत की जा रही है। इससे निचले स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने में कामयाबी मिली है।

• ऑनलाइन सरकारी खरीद- मोदी सरकार ने सरकारी विभागों में सामानों की खरीद के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इसकी वजह से पारर्दशिता बढ़ी है और खरीद में होने वाले घोटालों में रोक लगी है।

• प्राकृतिक संसाधानों की ऑनलाइन नीलामी- मोदी सरकार ने सभी प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी वजह से पारदर्शिता बढ़ी है और घोटाले रुके हैं। यूपीए सरकार के दौरान हुए कोयला, स्पेक्ट्रम नीलामी जैसे घोटालों में देश का इतना खजाना लूट लिया गया था कि देश के सात आठ शहरों के लिए बुलेट ट्रेन चलवायी जा सकती थी।

• आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की जियोटैगिंग- सड़कों, शौचालयों, भवनों, या ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले सभी निर्माण की जियोटैगिंग कर दी गई है। इसकी वजह से धन के खर्च पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के लिए भी हर तरफ से अच्छी खबर आ रही है। आइए डालते हैं एक नजर-

मोदी राज में अच्छे दिन, 2018 में सबसे तेजी से बढ़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2018 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। आईएमएफ ने उम्मीद जताई है कि नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से विकास करेगा। आईएमएफ ने कहा का कि इस दौरान चीन की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहेगी। दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के मौके पर अलग से जारी अपने ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट में आईएमएफ ने 2019 में भारत की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

2018 में चीन को पछाड़ भारत बनेगा सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था
इसके पहले सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मामले में भारत 2018 में चीन को भी पीछे छोड़ देगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2018 में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और वह चीन के मुकाबले आगे निकल जाएगा। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2018 में ही इक्विटी मार्केट के मामले में भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे समय जब विकसित देशों की जीडीपी 2 से 3 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहे हों, भारत की अर्थव्यवस्था 7.5 की दर से विकास करेगी, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर जारी रहेगा

भारत में विकास की है अपार क्षमता- विश्व बैंक
विश्व बैंक ने कहा है कि सरकार में हो रहे व्यापक सुधार उपायों के कारण भारत में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में विकास की कहीं अधिक क्षमता है। विश्व बैंक ने इसके साथ ही वर्ष 2018 के लिए भारत की विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक के डेवेलपमेंट प्रॉस्पेक्ट समूह के निदेशक आइहन कोसे के अनुसार, ‘आने वाले दस वर्षों में भारत दुनिया की दूसरी किसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उच्च विकास दर प्राप्त करने जा रहा है। हमारा छोटी अवधि के आंकड़ों पर फोकस नहीं है। भारत की जो विशाल तस्वीर बनती दिख रही है उसके मुताबिक इसमें कहीं ज्यादा क्षमता है।’ उन्होंने भारत और चीन की तुलना करते हुए कहा कि चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती दिख रही है, जबकि भारत विकास के रास्ते पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।

अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा भारतः फिच
भारत विकास के मामले में अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने एक रिपोर्ट में ये अनुमान लगाया है। फिच के अनुसार 6.7% विकास दर से भारत अगले 5 वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा। इसके साथ ही भारत सबसे तेजी से विकास करने वाला देश भी बन जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत फिच रेटिंग ग्लोबल इकॉनोमिक आउटलुक में शामिल 10 सबसे बड़े उभरते बाजारों की सूची में शीर्ष पर है। फिच ने बताया कि अगले 5 सालों में चीन की जीडीपी जहां 5.5 प्रतिशत रहेगी वहीं भारत की जीडीपी विकास दर 6.7 रहेगी। फिच ने बताया कि पूरी दुनिया में इस समय सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या भारत में है। युवा आबादी के ही चलते भारत अगले 5 सालों में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

ब्रिटेन-फ्रांस को पछाड़ दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्था में होगा भारत
सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (सीईबीआर) की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी कर रहा है। सीईबीआर के डिप्टी चेयरमैन डोगलस मैकविलियम ने कहा कि वर्तमान में अस्थायी असफलताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के बराबर टक्कर दे रही है। अगर भारत की अर्थव्यवस्था इसी क्रम में बढ़ती रही तो भारत अगले साल 2018 में फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देगा। इतना हीं नहीं अगले साल भारत दोनों देशों को पछाड़कर दुनिया की शीर्ष पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

इमर्जिंग देशों से तेज रहेगी भारत की ग्रोथ: नोमुरा
हाल ही में जापानी वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा ने भारत की ग्रोथ के बारे में पॉजिटिव रिपोर्ट दी थी। नोमुरा में इमर्जिंग मार्केट्स इकनॉमिक्स के हेड रॉबर्ट सुब्बारमण का कहना था कि भारत कई ग्लोबल शॉक से बचा हुआ है और अगले साल उसकी ग्रोथ 7.5 पर्सेंट रह सकती है। इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा कि, ‘हम भारत पर बुलिश हैं। यहां साइक्लिकल रिकवरी शुरू हो चुकी है। नोटबंदी के शॉक, जीएसटी और बैंक फंडिंग जैसी इवेंट्स गुजर चुकी हैं। अब हमें यहां ग्रोथ तेज होने की उम्मीद है। अगले साल की पहली छमाही में हमें भारत की ग्रोथ 7.8 पर्सेंट रहने की उम्मीद है। साल 2018 में हम 7.5 पर्सेंट ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। भारतीयों को अहसास होगा कि यह टिकाऊ ग्रोथ है। उसकी ग्रोथ दूसरे इमर्जिंग देशों से अधिक रह सकती है। अगले साल हम चीन की ग्रोथ 6.4 पर्सेंट और भारत की 7.5 पर्सेंट रहने की उम्मीद कर रहे हैं।’

एसोचैम का अनुमान
वहीं एसोचैम ने कहा है कि 7% विकास दर का उसका अनुमान प्रधानमंत्री मोदी सरकार की नीतियों में स्थिरता, अच्छे मॉनसून, औद्योगिक गतिविधियों एवं ऋण वृद्धि में तेजी और स्थिर विदेशी मुद्रा दर के अनुमानों पर आधारित है। 2018 के लिए जारी एसोचैम के आउटलुक में कहा गया है कि, ‘2017-18 की दूसरी तिमाही में 6.3 फीसद पर पहुंची भारत की जीडीपी विकास दर की तुलना में सितंबर 2018 की तिमाही तक आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।’

भारत 8 फीसदी दर से करेगा विकास : गोल्डमैन सैक्स
प्रसिद्ध निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत 8 फीसदी की दर से विकास करेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण होगा, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण। गोल्डमैन का मानना है कि बैंकों के पूंजीकरण से देश के क्रेडिट डिमांड और निजी निवेश को मजबूती मिलेगी। गोल्डमैन के मुताबिक, ‘हम भारत की जीडीपी विकास को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 8 फीसदी पर निर्धारित कर रहे हैं। 2017-18 में हालांकि जीडीपी विकास 6.4 फीसदी पर रहा, जिसका मुख्य कारण नोटबंदी और जीएसटी का शुरुआती प्रभाव रहा, लेकिन बैंकों का पुनर्पूंजीकरण जीडीपी के विकास में मददगार साबित होगा।’

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली
भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि डिजिटलीकरण से जीडीपी वृद्धि को 0.5 से 0.75 प्रतिशत की बढ़त मिलेगी और अनुमान है कि 2026-27 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार आने वाले दशक में भारत की सालाना जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 11.2 के बीच रहेगी।

7.5 की विकास दर हासिल करेगा भारत: मूडीज
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था मूडीज के इंवेस्टर सर्विस सर्वे में पता चला है कि भारत की विकास दर अगले 12 से 18 महीने के दौरान 6.5 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी। सर्वेक्षण में 200 से ज्यादा मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि संभावना को लेकर विश्वास व्यक्त किया। सर्वे में शामिल सभी लोगों का मानना था कि जीएसटी के लागू होने से 12 से 18 माह में आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी।

मूडीज को विश्वास है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अगले 3-4 साल में बढ़कर 8 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगी। मूडीज के सहायक प्रबंध निदेशक मैरी डिरोन का कहना है कि भारत में चल रहे आर्थिक और संस्थागत सुधारों और आने वाले समय में होने वाले बदलावों को देखते हुए नोटबंदी से पैदा हुई अल्पकालिक अड़चन के बावजूद अगले कुछ महीनों के दौरान भारत उसके जैसे दूसरे देशों के मुकाबले अधिक तेजी से वृद्धि करेगा।

7.7% की वार्षिक वृद्धि- हार्वर्ड
भारत की अर्थव्यवस्था की गति और इसकी मजबूती पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में माना गया है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में वो नेतृत्व जारी रखेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। CID के अनुमान के अनुसार भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। भारत में अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की गति औसत 7.7 प्रतिशत की वार्षिक रहेगी। CID के रिसर्च से ये निकलकर आया है कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है।

आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत हो जाएगी: स्टैंडर्ड चार्टर्ड
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने आर्थिक परिदृश्य-2018 के बारे में एक शोध पत्र में कहा है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का बुरा समय बीत चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत का पूर्वानुमान भी व्यक्त किया है। उसने कहा, ‘प्रमुख नीतिगत बदलावों का असर समाप्त हो जाने के बाद हमें अगली चार से छह तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में क्रमिक सुधार की उम्मीद है।’ अगली कुछ तिमाहियों में वृद्धि दर सात प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक बताया है। यूएन ने साल 2018 में भारत की विकास दर 7.2 और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट में यूएन ने कहा गया है कि भारी निजी उपभोग, सार्वजनिक निवेश और संरचनात्मक सुधारों के कारण साल 2018 में भारत की विकास दर वर्तमान के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो जाएगी और ये विकास दर साल 2019 में 7.4 प्रतिशत तक पहुंचेगी।‘वर्ल्ड इकोनोमिक सिचुएशन एंड प्रोस्पेक्ट 2018’ रिपोर्ट में यूएन ने कहा है कि कुल मिला कर दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल नजर आ रहा है।

अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहा भारत- अलीसा एयर्स
एक अमेरिकी टॉप थिंक-टैंक काउंसिल में भारत, पाकिस्तान और साउथ एशिया मामलों की वरिष्ठ सदस्य अलीसा एयर्स ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था उसे व्यापक वैश्विक महत्व और देश की सैन्य क्षमताओं के विस्तार तथा आधुनिकीकरण के लिये ऊर्जा दे रही है। अलीसा के अनुसार, ‘भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर वैश्विक उछाल दिया है। इसकी मदद से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है।’ फोर्ब्स में छपे आर्टिकल में अलीसा कहती हैं, ‘पिछले वर्षों में भारत दुनिया भर में विदेशी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों के संदर्भ में एक बड़ा कारक बनकर उभरा है और अब वैश्विक मंच पर अब भारत ज्यादा मुखर दिखाई दे रहा है। दरअसल भारत खुद को एक ‘प्रमुख शक्ति’ के रूप में देख रहा है।’

‘सपनों’ के साथ आगे बढ़ रहा भारत
मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विश्लेषक फ्रिट्ज लॉज ने ‘द सिफर ब्रीफ’ में एक लेख में भी भारत की प्रशंसा की है और पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। फ्रिट्ज लॉज ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी भारत को आर्थिक, सैन्य, भू-राजनीतिक शक्ति से योग्य बनाने के अपने सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’

भारत बना विदेशी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह- चीन
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है। अखबार ने एक लेख में कहा है कि कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है। अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार ने देश के बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है। यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने वाला है। इस नई टैक्स व्यवस्था से मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है क्योंकि इसमें राज्य और केंद्र के विभिन्न करों को मिला दिया गया है। लेख में कहा गया है कि आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी से फॉक्सकॉन जैसी बड़ी कंपनी भारत में निवेश करने के अपने वादे के साथ आगे बढ़ेंगी।

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