Home नरेंद्र मोदी विशेष PMO के ‘QUICK ACTION’ से पकड़ा गया बड़ा घोटालेबाज

PMO के ‘QUICK ACTION’ से पकड़ा गया बड़ा घोटालेबाज

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केंद्र की मोदी सरकार कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय हुए कई घोटालों का लगातार पर्दाफाश करती जा रही है। विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे घोटालेबाजों का कच्चा चिट्ठा सामने आ चुका है। ये भी जाहिर हो चुका है कि कैसे कांग्रेस सरकार ने इन्हें गैर कानूनी तरीके से कर्ज दिया और जब मोदी सरकार ने शिकंजा कसा तो ये देश से फरार हो गए। हालांकि यह बात हर बार साबित हुई है कि इस सरकार में कोई भ्रष्टाचारी बच नहीं सकता, चाहे वह कितना भी रसूख वाला क्यों न हो।

07 अप्रैल को जब एक और बड़े घोटालेबाज को सीबीआई ने धर दबोचा तो यह मामला भी 2008 से 2013 के बीच का निकला। यानि यह घोटाला भी कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान ही हुआ था। हालांकि इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने जिस प्रकार की सक्रियता दिखाई और क्विक एक्शन लिया, वह किसी भी शासन-व्यवस्था का सिर गर्व से ऊंचा करने वाला है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों और जांच एजेंसियों ने भी जिस प्रकार के आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया, वह न केवल काबिले तारीफ है, बल्कि अनुकरणीय भी है।

करोड़ों का चूना लगाने वाला घोटालेबाज गिरफ्तार
गौरतलब है कि डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रबंध निदेशक अमित भटनागर अलग-अलग बैंकों और गैर सरकारी बैंकों को करोड़ों का चूना लगा चुका है। वह विदेश भागने की तैयारी कर रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय की सक्रियता ने उसके सारे प्लान पर पानी फेर दिया। अमित भटनागर को सीबीआई ने गिरफ्तार कर उसपर आपराधिक षड्यंत्र, बैंक से धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज और बैंक खाते के जरिए इस घोटाले को अंजाम देने का मामला दर्ज कर लिया है।

पीएमओ के निर्देश से तुरंत हुआ एक्शन
दरअसल अमित भटनागर और उसकी कंपनी के खिलाफ मिले शिकायती पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने तुरंत एक्शन लिया। पीएमओ ने 6 मार्च, 2018 को ही वित्त मंत्रालय, सीबीआई और ईडी को मामले पर तथ्यों का पता लगाने और शीघ्र कार्रवाई के लिए निर्देशित किया। जांच एजेंसियों ने पूरे मामले की जांच की और इसकी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के विभिन्न विभागों को सौंपी गई।

पीएमओ ने एक सप्ताह पहले लिखा लेटर
सबसे पहले वित्त मंत्रालय ने इस मामले में धोखाधड़ी का शिकार हुए बैंकों से भी पूरी डिटेल और एफआईआर की कॉपी मांगी। इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया ने सीबीआई में केस दर्ज कराया, जबकि पीएमओ की ओर से इस मामले में एक सप्ताह पहले ही लेटर लिखा जा चुका था।

पीएमओ ने दिए जानकारियां साझा करने के निर्देश
पीएमओ की ओर से 20 मार्च को एक पत्र लिखा गया और आदेश दिया गया कि पूरी जानकारी सभी जांच एजेंसियों से साझा की जाए। 15 दिन बाद पूरी जांच-पड़ताल के बाद सीबीआई ने डायमंड पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर छापेमारी की और उसके निदेशकों के खिलाफ केस दर्ज किया।

जांच एजेंसियों ने दिखाया बेहतर तालमेल
मामले में अहम तथ्य यह है कि जांच एजेंसियों ने आपस में बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया। फर्म और भटनागर पर शिकंजा कसने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर ब्यूरो, कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री, फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट, सीबीआई और ईडी ने ज्वाइंट टीम बनाकर काम शुरू किया और अमित भटनागर को दबोच लिया।

फर्म ने धोखाधड़ी से लगाया करोड़ों का चूना
गौरतलब है कि अमित भटनागर की फर्म ने 2008 में ट्रांजैक्शंस की शुरुआत की थी। उसने 2013 तक धोखाधड़ी से 100.80 करोड़ रुपये का सेंट्रल वैल्यू एडेड टैक्स क्रेडिट हासिल कर लिया। इसके साथ ही वर्ष 2008 से 2018 के बीच फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों और कंपनी की बैलेंस सीट के जरिये 2655 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर फर्जीवाड़ा किया।

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