Home समाचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ से लाखों महिलाओं को रोजगार 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ से लाखों महिलाओं को रोजगार 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इंडिया का सपना सच होने की दिशा में अग्रसर है। प्रधानमंत्री डिजिटल सोसाइटी बनाने का हमेशा आह्वान करते रहे हैं और देश के लोगों पर  इसका कितना असर हो रहा है अब उसके प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आने लगे हैं। महिला सशक्तिरण के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही  मोदी सरकार की डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की कोशिश से महिलाएं कदमताल तेज करती दिखी हैं।

घर से रोजगार कर रहीं 20 लाख महिलाएं

एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में घर से बैठकर कम से कम 20 लाख महिलाएं 8 से 9 अरब डॉलर का व्यापार कर रही हैं..जिसमें आने वाले समय में और वृद्धि होने की संभावना है। डिजिटल लेनदेन के सरकार के प्रयासों में अब होममेकर्स भी बढ़-चढ़कर हाथ बंटा रही हैं। व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वो अपने द्वारा बनाये गए सामान को लोगों तक पहुंचा रही हैं।

मोदी सरकार से मिला हौसला                                                        

एक रिपोर्ट की मानें तो घर से ऑनलाइन रीसेलिंग का व्यापार करने वाली महिलाओं की संख्या में अगले पांच सालों में हर वर्ष 50 से 60 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसके साथ ही 2022 तक ये व्यापार 48 से 60 अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है। ऑनलाइन रीसेलर के तौर पर महिलाएं कपड़े और घरेलू उपयोग के उत्पादों को बेच रही हैं जिसमें स्टॉकिस्ट की ओर से उन्हें अच्छा कमीशन मिलता है। अभी इसकी पेमेंट प्रक्रिया नेटबैंकिंग और डिजिटल वॉलेट जैसे विकल्पों के साथ की जाती है, जिसमें आगे और विकल्प भी जोड़े जाएंगे।

इस रोजगार को किसी आंकड़े में नहीं डाला गया है, लेकिन ये मोदी सरकार के विजन और उसकी योजनाओं का नतीजा है जिसके फोकस में हैं समाज के गरीब, किसान और महिलाएं। जन धन और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का मकसद भी समाज के इन वर्गों की उन्नति ही है..जो देश की तरक्की में भी सहायक है।

खूब रंग लाई है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

घर बैठकर ई-कॉमर्स के जरिए रोजगार कर रही महिलाओं के सपनों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने नई उड़ान दी है। पापड़, अचार,सिलाई,बुनाई जैसे  व्यवसाय करने वाली महिलाओं ने इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ उठाया है। गौर करने वाली बात ये है कि अब तक 7.5 करोड़ लोगों ने इस योजना का लाभ उठाया है..जिनमें से करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं।

सरकार ने खत्म की छोटे कारोबारियों की मुश्किलें

अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना-PMMY पढ़े-लिखे नौजवानों के हुनर को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लागू की गई। हमारे देश में छोटे-छोटे उद्योग चलाने वाले कई ऐसे लोग हैं जिन्हें बैंकों से छोटी-छोटी आर्थिक मदद भी नहीं मिल पाती थी क्योंकि लोन लेने के लिए वो बैंकों के नियमों को पूरा नहीं कर पाते..जहां ऋण लेने के लिए गारंटी देना जरूरी होता है। मोदी सरकार ने छोटे कारोबारियों को वित्तीय समर्थन की इस कमी को महसूस किया, एक ऐसी कमी जिसके चलते कारोबार में आगे बढ़ने के छोटे व्यवसाय के अरमानों पर पानी फिर जाता है।

छोटे कारोबारियों का बढ़ा मनोबल

अपने दो साल में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना खूब रंग ला चुकी है। ये योजना शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खोल रही है। अपना बिजनेस शुरू करने को लेकर के लिए उनके लिए एक हौसला लेकर आई है मुद्रा योजना। इससे छोटे व्यापारियों का मनोबल बढ़ रहा है। उनमें प्रतियोगिता की भावना जगी है जो ना सिर्फ उनके कारोबार के लिए अच्छा है, इससे राष्ट्र के विकास में भी हाथ बंटा रहे हैं।

मुद्रा योजना में महिलाओं को प्राथमिकता  

मुद्रा योजना के तहत उस व्यक्ति को ऋण दिया जाता है जो अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहता हो या फिर पहले से चल रहे बिजनेस को और बढ़ाना चाहता हो। इस योजना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। इस योजना के तहत मिलने वाले ऋण पर ब्याज की दर बहुत कम है साथ ही पहली कैटेगरी में बिना गारंटी के ऋण मुहैया कराने का प्रावधान है। । प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे-मोटे व्यवसायी या दुकानदारों को ऋण की सुविधा तीन स्टेज में दी जाती है।

  1. शिशु योजना: 50 हजार रु तक तक का ऋण
  2. किशोर योजना : 50 हजार रु से 5 लाख रु तक

3.तरुण योजना: 5 लाख रु से 10 लाख रु तक

अब महाजनों के चक्कर नहीं

छोटे कारोबारियों के लिए मुद्रा योजना इसलिए भी बड़ी राहत लेकर आने वाली रही है क्योंकि अब अपने बिजनेस को गति देने के लिए उन्हें महाजनों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। ऐसे मामले कम नहीं जब अपनी जरूरत में साहूकरों से ऋण लेने के बाद वो ब्याज की बड़ी-बड़ी रकम के चक्रव्यूह में फंस जाते थे।

रोजगार के स्थायी समाधान पर मोदी सरकार का जोर                         

रोजगार का मतलब सिर्फ नौकरी देना नहीं है, एक दूरदर्शी सरकार उसके मतलब को व्यापक संदर्भ में देखती है। मोदी सरकार दरअसल रोजगार के अवसर पैदा करने की स्थायी योजना पर काम कर रही है। इसी सोच के साथ सरकार ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्ट अप और मुद्रा योजना जैसी अपनी कई क्रांतिकारी योजनाओं को सामने लाया है। डिजिटल इंडिया के लिए एक स्वाभाविक माहौल बनाने की ये सरकार की ही कोशिश है कि आज देश भर में महिलाओं में अपनी जरूरत की टेक्नोलॉजी को समझने की उत्सुकता कहीं ज्यादा हो चुकी है। पूर्ववर्ती सरकार में महिला सशक्तिकरण की बात केवल कागजों पर हुआ करती थी वहीं महिलाएं अब ना सिर्फ मोदी सरकार की योजनाओं से आत्मनिर्भर हो रही हैं बल्कि देश के विकास में भी हाथ बंटा रही हैं।

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