Home नरेंद्र मोदी विशेष पीएम मोदी के ‘मास्टरस्ट्रोक’ से पस्त हुआ पाकिस्तान

पीएम मोदी के ‘मास्टरस्ट्रोक’ से पस्त हुआ पाकिस्तान

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साउथ-एशिया सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण से भारत का कद पूरी दुनिया में बढ़ गया है। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के साथ आपसी सहयोग की नई यात्रा की भी शुरुआत हुई है। दूसरी तरफ दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते कद से चिढ़ा पाकिस्तान खुद को अब अलग-थलग महसूस कर रहा है। अफसोस जताते हुए वह अब कह रहा है कि भारत ने उसे जानबूझ कर परियोजना से अलग कर दिया। लेकिन गहराई से देखें तो ये कूटनीति के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक है। जिस तरह पाकिस्तान को छोड़ सार्क देशों के अन्य सभी नेताओं ने क्षेत्रीय सहयोग की एक नई बुनियाद भारत के नेतृत्व में रखी है, इससे पाकिस्तान परेशान हो गया है।

प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को अलग-थलग करते हुए जिस तरह इसे ‘मिनी सार्क समिट’ बना दिया पाकिस्तान की परेशानी का असल कारण वो है। पाकिस्तान इसलिए भी परेशान है कि अगर पीएम मोदी के प्रस्ताव को वह मान लेता और परियोजना में शामिल हो जाता तो भारत के नेतृत्व को स्वीकार करने जैसा होता, और अलग रहने की स्थिति में वह सार्क के अन्य देशों से स्वयं अलग-थलग हो गया है।

‘विनाश नहीं, विकास चाहते हैं लोग’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ एशिया सैटेलाइट की लांचिंग के अवसर पर कहा कि दक्षिण एशिया की डेढ़ अरब की आबादी आपस में मतभेद नहीं सहयोग चाहती है। उन्होंने कहा ”हमारा प्रयास समृद्धि लाने के लिए हो और हम विकास की दिशा में आगे बढ़ें न कि विनाश की ओर बढ़ें।” प्रधानमंत्री के इस विजन के साथ दक्षिण एशिया के ज्यादातर देश जुड़ते जा रहे हैं। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े सभी छह देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका, भूटान और नेपाल के राष्ट्राध्यक्षों ने पीएम मोदी के विजन की तारीफ की और सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।

पीएम मोदी का विजन, पड़ोसी प्रथम
प्रधानमंत्री ने केंद्र की सत्ता संभालते ही ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति को बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री के 26 मई, 2014 को शपथ ग्रहण समारोह में भी इसकी झलक दिखी थी। इसी साल नेपाल में सार्क समिट में उन्होंने दक्षेस उपग्रह की घोषणा की गई थी। लेकिन पाकिस्तान ने स्वयं को उस परियोजना से अलग कर लिया था। हालांकि पाकिस्तान को छोड़ प्रधानमंत्री ने अन्य पड़ोसी देशों से सहयोग जारी रखा और जीसैट-9 का निर्माण 235 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। इसे पड़ोसी देश अपने लिए ‘अमूल्य उपहार’ मान रहे हैं। 

पीएम मोदी ने बनाया ‘मिनी सार्क समिट’
साउथ एशिया सैटेलाइट जीसैट-9 की लॉन्चिंग के दौरान पीएम मोदी ने पाकिस्तान को छोड़कर दक्षिण एशिया के सभी देशों से संपर्क साधा। पीएम मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेसिंग जरिए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घानी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, भूटान के पीएम टीशेहरिंग टॉबगे, मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुला यमीन, नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल और श्रीलंका के राष्ट्रपति मैथ्रीपाला सीरीसेना जुडे़। साउथ एशियाई देशों से जुड़ने के इस तरीके को ‘मिनी सार्क समिट’ माना जा रहा है। जाहिर है भारत के नेतृत्व में हुए इस ‘मिनी सम्मेलन’ को देख ये बात पाकिस्तान के सीने में नासूर बनकर चुभ रही होगी।

पाकिस्तान ने गंवाया अवसर
पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा है कि भारत ने जानबूझ कर पाकिस्तान को इस परियोजना से अलग कर दिया है। पाकिस्तान ने दलील दी है कि भारत ने दक्षेस के सदस्य देशों को दक्षेस उपग्रह नामक उपहार की पेशकश की थी, लेकिन वह परियोजना को सहभागिता के आधार पर विकसित नहीं करना चाहता था, लिहाजा पाकिस्तान के लिए इस परियोजना का दक्षेस के बैनर तले एक क्षेत्रीय परियोजना के रूप में समर्थन करना संभव नहीं था। दरअसल पाकिस्तान को अब ये लगने लगा है कि पाकिस्तान ने एक अवसर गंवाया है जो उसके विकास को भी नई गति देता। इतना ही नहीं पीएम मोदी के सहयोगात्मक रवैये और विकास के विजन से प्रभावित पड़ोसी देश जिस तरीके से भारत के साथ जुड़ते चले जा रहे हैं ये पाकिस्तान के माथे पर बल लाने के लिए काफी है।

आतंकवाद पर अलग-थलग पड़ा पाक
आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग थलग करने में भारत कामयाब होता दिख रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सऊदी अरब जैसे कई देशों ने साफ कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में वे भारत के साथ हैं। मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफीज सईद का मामला हो या फिर दाउद इब्रहिम का, सब मामलों में पाकिस्तान की फजीहत हुई है और विश्व बिरादरी का साथ भारत को मिला है। मोदी सरकार की नीति का ही दबाव है जो पाकिस्तान में खुल्ला घूमने वाला हाफिज सईद आज सलाखों के पीछे है।

हथियारों के बाजार में भी अलग-थलग पड़ा पाक
एक अमेरिकी थिंक टैंक ‘स्टिम्सन सेंटर’ रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार की नीतियों के कारण पाकिस्तान लंबे समय तक वैश्विक बाजार में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली तक पहुंच बनाने में सक्षम नहीं हो पाएगा। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के पास चीन की सैन्य प्रणाली पर निर्भर रहने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा। ‘मिलिट्री बजट्स इन इंडिया एंड पाकिस्तान: ट्रैजेक्टरीज, प्रायोरिटीज एंड रिस्क्स’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की खरीदारी की बढ़ती क्षमता एवं बढ़ते भू-राजनीतिक प्रभाव के कारण उच्च प्रोद्यौगिकी तक पाकिस्तान की पहुंच बाधित हो सकती है।

चीन की कठपुतली बन गया पाकिस्तान 
पीएम मोदी के नेतृत्व में जहां भारत विकास की राह पर अग्रसर है वहीं भाारत विरोध के नाम पर पाकिस्तान धीरे-धीरे चीन के ग्रिप में फंसता जा रहा है। सीपेक के जरिये चीन ने पाकिस्तान पर अपनी धाक जमा ली है और पाकिस्तान की हरेक व्यवस्था पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश कर रहा है। जाहिर है पाकिस्तान भारत विरोध के नाम पर अपने सभी संसाधनों के उपयोग के लिए चीन को इजाजत देता जा रहा है, वहीं चीन पाकिस्तान को लगातार कर्ज देता जा रहा है। जानकार मान रहे हैं कि पाकिस्तान को आने वाले समय में इसकी कीमत जरूर चुकानी होगी।

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