Home नरेंद्र मोदी विशेष ‘गांधी दर्शन’ को साकार रूप प्रदान कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

‘गांधी दर्शन’ को साकार रूप प्रदान कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

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स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात साठ-पैंसठ वर्षों तक महात्मा गांधी के नाम पर खूब राजनीति हुई। उनके  नाम पर कांग्रेस पार्टी ने कई वर्षों तक देश में शासन किया, परन्तु उनके बताए मार्ग पर चलने से कतराती रही। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महात्मा गांधी के प्रति असीम श्रद्धा रखते हैं और उनके बताए मार्गों को अनुसरण भी करते हैं। बीते 46 महीनों में ही प्रधानमंत्री मोदी ने कई ऐसे कार्य किए हैं जो इस महापुरुष को सच्ची श्रद्धांजलि है। आइये हम देखते हैं ऐसी ही कुछ पहल-

संसद में काम-काज के लिए ‘उपवास’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रतिदिन 16 से 18 घंटे प्रतिदिन कार्य करते हैं, लेकिन वे संसद में लगातार बाधित होती कार्यवाही से बेहद दुखी हैं। उन्होंने कई बार कहा भी है कि हमें जनता के समय को बर्बाद करने का कोई हक नहीं है। लेकिन विपक्ष विधायी काम काज में लगातार अवरोध पैदा कर रहा है। बजट सत्र के दूसरे चरण में महज चार प्रतिशत काम काज हो सका। इसी से आहत होकर प्रधानमंत्री 12 अप्रैल को एक दिन के उपवास पर बैठने वाले हैं। दरअसल यह रास्ता भी महात्मा गांधी का ही सुझाया हुआ है, जब विरोधी आपका उपहास करे तो आप उपवास करें। जाहिर है प्रधानमंत्री की ये पहल विपक्ष को नैतिक आधार और गांधीवादी सिद्धांतों पर आईना दिखाने के लिए है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री पूरे दिन का व्रत रखते हुए अपना सरकारी कामकाज निपटाते रहेंगे। उपवास के जरिए यह बताएंगे कि कांग्रेस और विपक्ष ने किस तरह संसद को बंधक बना लिया।

स्वच्छाग्रह से सत्याग्रह की ओर
2 अक्टूबर, 2014 को प्रधानमंत्री मोदी ने देश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। आज यह एक बड़ा जन आंदोलन बन चुका है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में स्वच्छता के प्रति जागरूकता आई है और लोग इसके प्रति सकारात्मक भाव रखने लगे हैं। 2014 में जब स्वच्छता मिशन शुरू हुआ था तब देश में स्वच्छता का दायरा सिर्फ 40 प्रतिशत से कम था और आज चार वर्षों के बाद स्वच्छता का दायरा दोगुना बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है। आज देश के 350 से ज्यादा जिले, 3.5 लाख गांव खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुके हैं। देश में अब तक 7 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।

अंत्योदय की अवधारणा के अग्रदूत
महात्मा गांधी कहते थे कि शासन की नीतियां जब समाज के अंतिम व्यक्ति की समग्र जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई जाए और उसकी पहुंच को उस अंतिम छोर तक सुनिश्चित किया जाए, तब जाकर सही मायने में अंत्योदय की अवधारणा को व्यावहारिक कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी अवधारणा के तहत अंत्योदय का संकल्प किया और उसे सिद्धि तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। मोदी सरकार ने पहले दिन से अपनी कार्य प्रणाली के केंद्र में समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को प्रमुखता दी। महात्मा गांधी के अंत्योदय की अवधारणा को एक नयी धारणा देने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री जन-धन योजना, एक रूपये में बीमा योजना, उज्ज्वला योजना, हर घर बिजली योजना, प्रधानमंत्री आवास जैसी कई योजनाएं इसी अवधारणा को बल देती हैं।

 

हिंसक राजनीति का जवाब संयम से
विरोधी दलों द्वारा नकारात्मक राजनीति और हिंसक विरोध से प्रधानमंत्री आहत हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हिंसा की राजनीति से कांग्रेस पार्टी समाज में विभेद पैदा करने की कोशिश कर रही है।दरअसल बीते कुछ ऐसे वाकये हमारे सामने है जो यह साबित करते हैं कि कांग्रेस पार्टी लगातार लोगों को भड़का रही है और अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रही है। जाहिर है महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने का दावा करने वाली पार्टी लोगों को भड़का रही है। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने 06 अप्रैल को भाजपा की स्थापना दिवस पर अपने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे विपक्ष की नकारात्मक और हिंसक राजनीति के बाद भी अपना संयम न खोएं। जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों को मानते हैं और उसे अपने समर्थकों से भी अमल करने के लिए प्रेरित करते हैं।

स्थानीय स्वशासन का सशक्तीकरण
महात्मा गांधी शासन के विकेंद्रीकरण के हिमायती थे। वे ग्राम्य स्वराज्य की अवधारणा को आगे बढ़ना चाहते थे और स्थानीय स्वशासन की स्थापना के पक्षधर थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके बताए कदमों के अनुसार लगातार पहल कर रहे हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं और क्रियाकलापों में इसकी झलक देखने को मिलती है। पंचायतों को सशक्त करने के साथ ही कई बड़े आयोजनों को दिल्ली से बाहर करवाकर प्रधानमंत्री मोदी ने इसी अवधारणा को मजबूती प्रदान की है। देश के ग्रामोदय से भारत उदय अभियान जैसी पहल इसी कंसेप्ट को सशक्त करते हैं। वे प्रयास कर रहे हैं कि गांवों में शहरों जैसी सुविधाएं मिलने लगे ताकि लोगों को अपने गांवों में ही रोजगार के अवसर मिल सकें।

खादी ग्रामोद्योग का किया उत्थान
महात्‍मा गांधी गांवों में गृह उद्योगों की दुर्दशा से चिंतित थे। स्‍वदेशी आंदोलन-विदेशी बहिष्‍कार और खादी को प्रोत्‍साहन देना उनके जीवन के आदर्श थे जिनको आधार बनाकर उन्‍होंने देशभर के करोड़ों लोगों को आजादी की लड़ाई के साथ जोड़ा। लेकिन आजादी के बाद खादी ग्रामोद्योग लगातार कमजोर होता चला गया। दरअसल खादी एक ऐसा वस्त्र है, जो आज भी ग्रामीण भारत को चेहरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने खादी के उत्थान का लक्ष्य लेते हुए सबसे पहले तो अपने ही निजी जीवन से जोड़ा। उसके बाद ‘मन की बात’ कार्यक्रम के द्वारा पूरे देश का आह्वान किया कि सभी अपने जीवन से खादी को अवश्य जोड़ें, चाहे वह एक रूमाल के रूप में ही क्यों न हो। परिणाम यह रहा कि देश में खादी की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी खादी पहले खादी फॉर नेशन से खादी फॉर फैशन बनी। अब प्रधानमंत्री मोदी ने खादी फॉर ट्रांसफॉर्मेशन से इसे नया स्वरूप दे दिया। प्रधानमंत्री का यह सपना है कि जल्दी ही खादी इतनी ऊंचाइयों को छुए कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा भारतीय ब्रांड बन जाए।

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