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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वभाव में ही रचा बसा है लीक से हटकर कदम उठाना

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देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि कोई प्रधानमंत्री किसी पूर्व प्रधानमंत्री की अंतिम यात्रा में पैदल ही शामिल हुआ और अग्नि संस्कार स्थल तक पैदल ही गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा से जुड़े इस दृश्य ने देश-दुनिया को चौंकाकर रख दिया। यह कोई पहला मौका नहीं जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कदम से लोग चौंककर रह गए। इससे पहले भी उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए हैं, कई ऐसे फैसले किए हैं या अचानक कोई ऐलान किया है, जिसने लोगों को हैरानी भरे गर्व का अनुभव कराया है।   

पिता तुल्य नेता को अनकही और सच्ची श्रद्धांजलि
दीनदयाल मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय से जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो लोग यह देखकर हैरान रह गए कि इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  पैदल ही जा रहे हैं। अपने पिता तुल्य नेता के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह एक अनकही श्रद्धांजलि थी जिसने लोगों को भावुक कर रख दिया। लोगों के जेहन में यही सवाल उभरा कि करीब पांच किलोमीटर की यह यात्रा जो कि डेढ़ से दो घंटे तक चलेगी, उस दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा को कितना बड़ा खतरा हो सकता है। लेकिन अपने अभिभावक और सर्वप्रिय नेता के लिए यह मौजूदा प्रधानमंत्री की भावना थी जो उनके लिए खुद की सुरक्षा से बढ़कर थी।   

लालकिले के प्राचीर से कई बड़े ऐलान कर चौंकाया
देश के 72वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस खुशखबरी का ऐलान किया, उसने लोगों को चौंकाने के साथ गौरवान्वित कर रख दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2022 में जब आजादी के 75 साल पूरे होंगे या उससे पहले मां भारती के किसी बेटे या बेटी का कदम अंतरिक्ष में उतरेगा। लाल किले से आम तौर पर प्रधानमंत्री मोदी से जो उम्मीदें होती हैं, उससे कहीं अधिक और आश्चर्यजनक घोषणाओं का वो ऐलान करते रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि वित्तीय समावेशन के सबसे बड़े कार्यक्रम जन धन से लेकर स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया और 1000 दिन में सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का एेलान भी प्रधानमंत्री ने लालकिले के प्राचीर से ही किया था।

पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान में खलबली
29 सितंबर 2016 को संपूर्ण भारतवर्ष अपने अंदर एक नए जोश का अनुभव कर रहा था। यह एक कामयाबी भरी रात की गौरवशाली सुबह थी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को एक सरप्राइज दिया था। भारतीय सेना के जांबाजों ने 28 और 29 सितंबर 2016 की रात को नियंत्रण रेखा के पार जाकर सात आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया था। भारतीय सेना की यह उन आतंकवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई थी, जो नियंत्रण रेखा के रास्ते भारत में घुसपैठ करने की तैयारी कर रहे थे। सेना ने अचूक तरीके से अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया था और सुबह होने से पहले ही अपना काम पूरा कर वह लौट आई थी। भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक उरी में सेना के कैंप पर हुए उस आतंकी हमले के 11 दिन बाद की गई थी जिसमें 19 भारतीय जवान शहीद हुए थे। आतंक पर जीरो टॉलरेंस का यह एक जीता-जागता सबूत था।

शपथ ग्रहण में सार्क देशों के प्रमुखों को आमंत्रण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभालने से पहले ही एक ऐसा कदम उठाकर दिखाया था जो अपने आपमें एक मिसाल थी। उन्होंने 26 मई 2014 को अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान सहित सार्क देशों के सभी प्रमुखों को आमंत्रित किया था। यह पहला मौका था जब भारत ने सभी सार्क देशों के प्रमुखों को प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बनने के लिए बुलाया था। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी इस मौके पर हाजिर हुए थे। अपने इस कदम से प्रधानमंत्री मोदी ने पड़ोसियों को ये संदेश दिया कि भारत के द्वार सबके लिए खुले हुए हैं। इस पहल के साथ वो अपने नेतृत्व वाली नई सरकार में भारत की विदेश नीति की संभावित तस्वीर भी दिखा गए थे। बदलते भारत की यह नीति है कि दोस्ती का हाथ बढ़ाया जाएगा लेकिन आंख दिखाने वालों को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जिसे वे समझते हैं। 

योग दिवस का प्रस्ताव रखकर भी चौंकाया था
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर दुनिया भर में अब चार योग दिवस का सफलतापूर्वक आयोजन हो चुका है। लेकिन आपके लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने पहले ही संबोधन में जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था तब इसकी जानकारी भारत के स्थायी राजदूत तक को नहीं थी। प्रधानमंत्री की यह अपील सभागार में मौजूद भारतीय राजदूत के साथ ही अन्य अधिकारियों के लिए एक सरप्राइज की तरह थी। दरअसल किसी को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसी कोई घोषणा करने जा रहे हैं। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री के रखे इस प्रस्ताव को 177 देशों ने स्वीकार किया था जो कि एक रिकॉर्ड है। गौर करने वाली बात ये भी है कि प्रस्ताव मंजूर करने वालों में 47 मुस्लिम राष्ट्र भी शामिल थे। 

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