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पीएम मोदी ने पेश की मानवता की एक और मिसाल, काफिला रोक एंबुलेंस को दिया रास्ता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानवता की एक और मिसाल पेश की है। एसपीजी सुरक्षा घेरे में होने के बावजूद उन्होंने अपना काफिला रोक एक एंबुलेंस को रास्ता दिया। प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के गांधीनगर में अफ्रीकी विकास बैंक की बैठक से वापस लौट रहे थे। उन्हें एक दूसरे कार्यक्रम में शामिल होना था। लेकिन कार्यक्रम में तय समय से देर हो जाने के बाद भी जब उन्हें पता चला कि उनके काफिले के कारण एक एंबुलेंस रुका हुआ है तो उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से अपने काफिले को किनारे करने को कहा और एंबुलेंस को आगे जाने का रास्ता दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके पहले हाल ही में एक बड़ा फैसला करते हुए वीवीआईपी कल्चर की प्रतीक गाड़ियों पर लगने वाली लाल बत्ती पर रोक लगा दी। वीआईपी कल्चर खत्म करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी गंभीर है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की आगवानी के लिए वीवीआईपी कल्चर को दरकिनार कर सामान्य ट्रैफिक में लोककल्याण मार्ग से लेकर दिल्ली एयरपोर्ट कर का सफर तय किया था।

प्रधानमंत्री मोदी सबका साथ-सबका विकास मंत्र पर विश्वास करते हैं। प्रधानमंत्री जहां भ्रष्टाचार, कालेधन और प्रशासनिक कामकाज को लेकर कठोर फैसले के लिए जाने-जाते हैं। वहीं, वह दिल से काफी भावुक भी हैं। उनसे किसी का दुख-दर्द देखा नहीं जाता। उन्होंने देश के कई जरुरतमंद लोगों की मदद कर मानवता की एक मिसाल कायम की है। आइए नजर डालते हैं उनमें से कुछ पर-

बेटे के इलाज के लिए भटक रही मां की गुहार सुनी पीएम मोदी नेबेटे के इलाज के लिए दर-दर भटक कर गुहार लगाने वाली एक मां की पुकार सुन ली गई। ऋषिकेश के सर्वहारानगर काले की ढाल की निवासी संतोष रस्तोगी अपने 20 साल के बेटे विशाल के इलाज के लिए कई जगह गुहार लगा चुकी थी। एमएलए, एमपी सहित मुख्यमंत्री के दरबार में भी हाजिरी लगा चुकी थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। थक-हारकर संतोष रस्तोगी ने अपने एक रिश्तेदार के मोबाइल फोन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी फरियाद भेजी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसपर तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्यवाही के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ऋषिकेश के एसडीएम को फोन करके महिला संतोष रस्तोगी का पता लगाने और मदद करने को कहा गया। पीएमओ ने एसडीएम को तुरंत महिला के बेटे के इलाज की व्यवस्था कराने को कहा।

संतोष ठेला लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती है। उसका बेटा पिछले तीन साल से बीमार है। तीन बार ऑपरेशन हो चुका है। इलाज पर साढ़े चार लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आ चुका है। आर्थिक तंगी के कारण आगे इलाज कराना मुश्किल हो गया है। ऐसे में पीएमओ के संज्ञान लेने से संतोष रस्तोगी को एक नई उम्मीद जगी है। पीएमओ से अधिकारियों को मिले निर्देश से संतोष अब काफी खुश है और उसे यकीन होने लगा है कि अब उसके दुख दूर हो जाएंगे।

बिहार के रामशंकर को मिली पीएमओ से मदद
दिल्ली से सटे गुरुग्राम में रहने वाले बिहार के रामशंकर यादव को भी पीएमओ से मदद मिली है। रामशंकर यादव को दिल्ली से बिहार के मधुबनी जाना था। रेल टिकट के लिए गुरुग्राम से दिल्ली जाते वक्त मेट्रो रेल में रामशंकर ठगी के शिकार बन गए। दिल्ली मेट्रो में बातचीत के दौरान तीन लोगों ने कंफर्म रेल टिकट दिलाने के नाम पर उससे 2,200 रुपए छीन लिए गए और डेबिट कार्ड से 6,000 रुपए निकाल लिए गए। इसके साथ ही रामशंकर से बैग भी छीन लिया गया जिसमें उसके ओरिजल सर्टिफिकेट थे।

21 साल के रामशंकर यादव धोखाधड़ी के इस मामले में केस दर्ज करना चाहते थे। गुरुग्राम के एक और दिल्ली के तीन पुलिस स्टेशन से उसे लौटा दिया गया। थक हारकर उसने पीएमओ को पत्र लिखा। जिसके बाद गुरुग्राम मेट्रो पुलिस स्टेशन से रामशंकर के पास फोन आया कि आप आकर शिकायत दर्ज करा दीजिए। पीएमओ के दखल के बाद गुरुग्राम मेट्रो पुलिस स्टेशन ने धारा 406 और 420 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सब इंस्पेक्टर बलवंत सिंह का कहना है कि हम सीसीटीवी फुटेज से आरोपी को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं।

विवेक के जीवन को मिला मोदी का सहारा
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के पलासी क्षेत्र के रहने वाले विवेक विश्वास का कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में इलाज चल रहा था लेकिन सरकारी अस्पताल के उपचार की सुस्त चाल के चलते, विवेक के घरवालों ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया, पर ज्यादा खर्च देखकर विवेक के परिवार वाले घबरा गए और उन्होंने माकपा सांसद ऋतब्रत बनर्जी से मदद की गुहार लगाई। राज्यसभा सांसद ऋतब्रत ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया।

पीएम मोदी ने विवेक के इलाज के लिए 2.90 लाख रूपये के मदद की मंजूरी दे दी। विवेक ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है और अब जल्द ही मुकुंदपुर के एक अस्पताल में विवेक का किडनी प्रत्यारोपण किया जाएगा।

सारा की पढ़ाई को मिला मोदी का साथ
कर्नाटक की बी.बी.सारा, जो अपनी एमबीए की पढ़ाई को आगे जारी रखना चाहती थी लेकिन आर्थिक हालात ठीक नहीं होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रही थी। कर्नाटक के मंड्या की शूगर टाउन की रहने वाली सारा ने बैंक से एजूकेशन लोन के लिए एप्लाई कर दिया। सारा को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ये लोन बहुत जरूरी था लेकिन बैंक देर पर देर किया जा रहा था और सारा को पढ़ाई छूटने का खतरा सता रहा था। थक हारकर सारा ने अपने पिता अब्दुल इल्यास के साथ मिलकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी परेशानी से अवगत कराया। प्रधानमंत्री कार्यालय से तुरंत पत्र का जवाब आया कि 10 दिन के अंदर आपको लोन मिल जाएगा, और वैसा ही हुआ 10 दिन से पहले ही बैंक वालों ने सारा को लोन दे दिया। अब सारा की एक ही ख्वाहिश है कि वो एक बार प्रधानमंत्री से मिलकर उनको धन्यवाद कहना चाहती है।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री के कारण असम की आठ साल की बच्ची की जान बचाई जा सकी। बच्ची की हालत काफी गंभीर थी। वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थी और उसे इलाज के लिए जल्द से जल्द दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में शिफ्ट करना था। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय वाराणसी में थे। बच्ची के परिजन ने मदद के लिए दिल्ली पुलिस और प्रधानमंत्री को ट्वीट किया। ट्वीटर पर इस बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने तुरंत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से ट्रैफिक फ्री पैसेज देने का आदेश दिया। इसके बाद पीएमओ ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर बच्ची के एंबुलेंस के लिए फ्री पैसेज तैयार कर लिया। जिससे बच्ची समय से पहले अस्पताल पहुंच सकी। 13 किलोमीटर का रास्ता सिर्फ 14 मिनट में तय कर बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा लिया गया। बताया जा रहा है कि बच्ची को जिस वेंटिलेटर के साथ दिल्ली लाया गया था, अस्पताल पहुंचते वक्त उस बैटरी की क्षमता सिर्फ सात मिनट बची थी। साफ है थोड़ा समय और लगता तो बच्ची की जान को खतरा हो सकता था।

पार्थ के सारथी बने मोदी
डीजेनरेटिव ब्रेन नामक बीमारी से पीड़ित 12 साल के पार्थ के पिता अपने बच्चे की इलाज में अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च चुके थे, लेकिन फिर भी पार्थ को सही इलाज नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में हर जगह हार मान चुके पार्थ के पिता को एक ही उपाय नजर आया और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा। श्री मोदी ने पत्र पढ़कर तुरंत स्वास्थ्य मंत्री को पार्थ के इलाज की उचित व्यवस्था कराने को कहा। 

रोहित के लिए संकटमोचक बने पीएम
ऐसे समय में जब 14 साल के रोहित के परिवार को मदद की सख्त जरूरत थी, प्रधानमंत्री ने महज एक खबर का संज्ञान लेकर उन्हें ये मदद पहुंचाई। हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में खबर आने पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एम्स में रोहित का इलाज कर रहे डॉक्टर से बात की। जिसके तुरंत बाद 13 फरवरी को रोहित के इलाज और पोर्टेबल वेंटिलेटर खरीदने के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपए जारी कर दिए गए। प्रधानमंत्री से मदद पाकर रोहित का परिवार बेहद खुश है।

डोरिस को दी आर्थिक मदद, डॉक्टरों से भी की बातचीत
दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले की डोरिस फ्रांसिस को प्रधानमंत्री कार्यालय से तीन लाख रुपए की मदद मिली। डोरिस एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से नेशनल हाइवे 24 पर ट्रैफिक संभालती हैं। वह जहां ट्रैफिक संभालती हैं, वहीं उनकी 17 साल की बेटी का सड़क हादसे में निधन हो गया था। वह इन दिनों कैंसर से जूझ रहीं हैं।dorris-francis

हार्ट सर्जरी के लिए की नाबालिग को मदद
हार्ट की गंभीर समस्या से जूझ रहे 16 वर्षीय नाबालिग ने प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद मांगी। मदद मांगने के बाद वह चंडीगढ़ में एक चोरी के केस में पकड़ा गया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाबालिग के इलाज के लिए 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी है।

तैयबा का सहारा बने ‘मोदी अंकल’
आगरा की तैयबा का परिवार तो निराश हो चला था। महज 12 साल की उम्र में तैयबा के दिल का एक वॉल्व खराब हो गया। इलाज बेहद खर्चीला था। ऐसे में तैयबा ने पीएम को चिट्ठी लिखी और नतीजा दुनिया के सामने है। तैयबा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा कि वह जन्म से ही दिल की बीमारी से पीड़ित है और उसके मजदूर पिता के पास 15 से 20 लाख रुपये नहीं कि इलाज करा सकें। तैयबा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उन्हें पीएमओ से जवाबी चिट्ठी मिली। उसी खत में दिल्ली सरकार को निर्देश भी दिया गया था कि खर्च की परवाह किए बिना तैयबा का उचित इलाज करवाया जाए। दिल्ली सरकार ने भी इस पत्र पर कार्रवाई करते हुए गुरु तेग बहादुर अस्पताल को तैयबा के इलाज का निर्देश दिया और इलाज शुरू हो गया।

सांसद की अनुशंसा पर कैंसर पीड़ित की मदद
पटना के बीएम दास रोड निवासी सुमित रंजन सिन्हा को कैंसर इलाज के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपए दिए गए। राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा की अनुशंसा पर पीएम नरेंद्र मोदी ने सहायता राशि को स्वीकृति दी। पीएम ने सुमित को एक शुभकामना संदेश भी भेजा, जिसमें उनके रोगमुक्त होने की कामना की।

इसके अलावा सांसद की अनुशंसा पर कुर्जी के सना अर्फी को कैंसर के इलाज के लिए तीन लाख रुपए जबकि दिल्ली के प्रमोद जैन को भी पीएम राहत कोष से गंभीर बीमारी के इलाज के लिए 50 हजार रुपए दिए।

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नन्ही परी रिद्धि को 3 लाख की मदद
बुलंदशहर की कैंसर पीड़ित नन्ही बच्ची रिद्धि को प्रधानमंत्री ने 3 लाख रुपए की मदद दी है। बुलंदशहर के हाजीपुर गांव के रहने वाले रिद्धि के पिता प्रयमेंद्र दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन अपनी इकलौती बेटी को कैंसर से निजात दिलाने के संघर्ष में उनकी नौकरी चली गई। लाखों रुपए की जमापूंजी और गांव का खेतीबाड़ी बेचकर प्रयमेंद्र ने अपनी बेटी का इलाज कराया। दिल्ली के धर्मशिला अस्पताल में रिद्धि की 5 बार कीमियोथैरेपी हुई और फिर बोनमैरो ट्रांसप्लांट हुआ। लेकिन महज दो महीने बाद जांच में पता चला कि रिद्धि का कैंसर फिर से लौट आया है। अपने रिश्तेदार, दोस्तों से उधार लेकर रिद्धि के इलाज में लगा चुके प्रयमेंद्र की पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 लाख रुपए से मदद की।

वाराणसी के कैंसर पीड़िता को मिली नयी जिन्दगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक महिला अपनी बेटी का इलाज कराने की गुहार लगाई। इस महिला की बेटी की दोनों किडनियां भी खराब है। प्रधानमंत्री ने पीड़िता को वाराणसी के रविंद्रपुरी स्थित दफ्तर में मुलाकात की। यह दफ्तर उनके संसदीय क्षेत्र के लोगों की समस्याएं इकट्ठा करने के लिए ही बनाया गया था। मोदी से मिलकर आईं कल्याणी मिश्रा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से अपनी बेटी का इलाज कराने की गुहार लगाई। प्रधानमंत्री ने तुरंत ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों का नंबर लगाया और उन्हें कहा कि मुझे पहली प्राथमिकता देते हुए मेरी सहायता की जाए। 

छह साल की वैशाली की हुई ओपन हार्ट सर्जरी
vaishaliमोदी सरकार की तत्परता का अनुभव पुणे की सात साल की वैशाली यादव नाम की छोटी बच्ची ने लिया। वह पुणे में हडपसर के पास भेकराई नगर में रहती है। पहली कक्षा में पढ़ने वाली वैशाली के दिल में होल होने की वजह से वो हमेशा बीमार रहती थी। डॉक्टर सर्जरी अनिवार्य बताया। बच्ची के चाचा मजदूरी करते है। बहादुर बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर अपने मन की बात बताई। खत मिलने पर पीएमओ ऑफिस से पुणे के कलेक्टर को वैशाली की मदद करने कहा गया और पुणे के रुबी हॉल क्लिनिक में वैशाली की ओपन हार्ट सर्जरी भी पूरी हो गई। वो अपने घर पर सुरक्षित है। वैशाली के घरवालों के लिए यही अच्छे दिन है।

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