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पीएम मोदी का पारदर्शिता पर जोर, भ्रष्टाचार पर कर रहे चोट

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नीति, नीयत और निर्णय यह तीन गुण किसी भी सफल लोकतंत्र और राष्ट्र के उत्तरोत्तर विकास एवं प्रगति के लिये आवश्यक होते हैं। मोदी सरकार की नीतियों और निर्णयों में जन कल्याण, जन सम्मान, राष्ट्र गौरव की नीयत और निर्णय स्पष्ट दिखाई देते हैं। देश के सम्मान, समृद्धि और सुरक्षा के संकल्प को सच्चाई में परिणत करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार कर रही है। सरकार ने दशकों से चली आ रही लालफीताशाही और भ्रष्टाचार में लिप्त कार्य संस्कृति को बदलने का काम किया। सरकारी योजनाओं में दूर​दर्शिता और समयबद्धता के साथ पारदर्शिता भी स्पष्ट दिखने लगी है।

DBT से जुड़ी 224 योजनाएं
मोदी सरकार ने देश में एक नयी चुस्त-दुरूस्त, पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति को जन्म दिया है, इस तथ्य से चाहकर भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। सभी योजनाओं को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया पूरे देश में जोरों से चलायी जा रही है। अब तक 46 मंत्रालयों की 224 योजनाएं डीबीटी यानि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्लेटफॉर्म से जुड़ गई हैं। सरकार ने ढाई साल पहले ही आधार कानून बनाया है जिसके लागू होने के बाद सभी तरह की सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने के आधार नंबर जरूरी हो गया है।

32 करोड़ खाते DBT से जुड़े
डीबीटी स्कीम के तहत सरकार ने लगभग 32 करोड़ लोगों के खाते में दो लाख करोड़ रुपये डायरेक्ट पहुंचाए हैं। मई 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार ने 2014 से लेकर मार्च 2017 तक डीबीटी के जरिये कुल 57,029 करोड़ रुपये बचाए हैं। आधार से डीबीटी योजना के जुड़ने से बिचौलिये और फर्जी लाभार्थी खत्म हो चुके हैं। आधार लिंक की प्रक्रिया शुरू होने से पहल योजना के तहत 2015-16 के तहत पकड़े 3.5 करोड़ फर्जी और नकली LPG खाते पकड़े गए। इस साल अप्रैल 2017 तक 1.30 लाख फर्जी ग्राहकों की पहचान हुई है।

मनरेगा में ‘दलाली’ सिस्टम पर रोक
मनरेगा के तहत जॉब कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने से करोड़ों रुपये की बचत हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 में मनरेगा के लिए डीबीटी भुगतान से 8,741 करो़ड़ रुपये की बचत की, जबकि पहल के जरिये बचत की राशि 8,185 करोड़ रुपये रही। दरअसल अब मनरेगा खातों को आधार से लिंक करने से एक करोड़ फर्जी जॉब कार्ड खत्म किए जा सके। मनरेगा के तहत जॉब कार्ड्स की कुल संख्या 13 करोड़ थी, जो 2016-17 में घटकर अब 12 करोड़ हो गई है। सरकार ने अभियान चलाकर पिछले एक साल में इस स्कीम से जुड़ी गड़बड़ियों को खत्म किया है। गौरतलब है कि जून के पहले सप्ताह तक 85 प्रतिशत मनरेगा खातों को आधार से लिंक कर दिया गया है।

मनरेगा और मोदी आधार के लिए चित्र परिणाम

तीन लाख से ज्यादा फर्जी कंपनियां बंद
नोटबंदी के बाद सरकार ने काला धन जमा करने के लिए बनाई गई तीन लाख से भी अधिक फर्जी कंपनियों का पता लगाया है। इनमें से 1,75,000 कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है। इतना ही नहीं कई ऐसी कंपनियों का पता लगा है जहां एक पते पर ही 400 फर्जी कंपनियां चलाई जा रहीं थी। अगस्त के पहले सप्ताह में ही शेयर बाजार नियामक ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया’ (सेबी) ने ऐसी 331 कंपनियों पर व्यापार प्रतिबंध लगा दिया, जिन पर फर्जी कंपनियां होने का संदेह था।  इनमें कम से कम 145 कंपनियां कोलकाता में रजिस्टर्ड हैं और 127 कंपनियां गंभीर जांच के घेरे में हैं।

दो करोड़ 33 लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए
भारत में बीते तीन साल में दो करोड़ 33 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं, जिससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई है। पश्चिम बंगाल से 66 लाख 13 हजार 961 फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए हैं और वे सभी के सभी अवैध बांग्लादेशियों के नाम पर हैं। अरबों रुपये का ये घोटाला पश्चिम बंगाल में सरकार के नाक के नीचे चल रहा था। बिहार में भी दस लाख लोगों ने बोगस राशन कार्ड बनवा लिए थे। इन बोगस कार्ड के जरिए पिछले एक साल में अनाज सब्सिडी के नाम पर 777.6 करोड़ रुपए भी सरकार से ले लिए गए। राशन कार्डों का इलेक्ट्रॉनिक डाटा बेस तैयार करने के क्रम में यह खुलासा हुआ है। इसी के मद्देनजर मोदी सरकार 2017 तक देश में 3 लाख राशन दुकानों को इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ईओपीएस) में बदल रही है।

सरकारी लाभ आधार और बैंक से जुड़े
मोदी सरकार जब से सत्ता में आयी है तब से एक-एक सिस्टम पारदर्शी हो रहा है, बैंक खाते आधार से लिंक हो गए, हर तरह का सरकारी लाभ सीधे बैंक खातों में मिलने लगा। हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने सभी छात्रों के बैंक खातों को आधार कार्ड से लिंक करने की घोषणा की तो देखते ही देखते मदरसों से ढाई लाख छात्र गायब हो गए। मदरसों में फर्जी छात्रों का नाम लिखकर उनके नाम की स्कॉलरशिप मदरसा चलाने वाले खुद खा जाते थे। इन ढाई लाख छात्रों को करीब 17 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिलती थी, मतलब फर्जी छात्रों का नाम लिखकर सरकारी रुपये लूट लिए जाते थे लेकिन सरकार ने छात्रों के बैंक खाते को आधार कार्ड से लिंक करके ना सिर्फ ढाई लाख छात्रों को गायब कर दिया बल्कि हर साल 17 करोड़ रुपये भी बचाएंगे।

आधार और पीएम मोदी के लिए चित्र परिणाम

नोटबंदी के बाद रिश्वतखोरी में कमी हुई
थिंकटैंक सीएमएस- इंडियन करपशन स्टडी की प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 8 नवम्बर को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी का ऐलान करने के बाद से भ्रष्टाचार में कमी आई है। इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि 2005 के मुकाबले सरकारी अधिकारियों में घूसखोरी घटी है। यह सर्वे जनवरी में 20 राज्यों में फोन के द्वारा करवाया गया था। सर्वे के दौरान 56 प्रतिशत लोगों ने यह बात कही की नोटबंदी की वजह से भ्रष्टाचार में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में सालाना 6350 करोड़ रुपए रिश्वत का लेन-देन होता है। जबकि 2005 में सालाना 20500 करोड़ रुपए रिश्वत का लेन-देन होता था।

नोटबंदी से रिश्वतखोरी कमी के लिए चित्र परिणाम

बहरहाल मोदी सरकार की नीयत साफ है कि वो देश को प्रगति के नये पथ पर ले जाना चाहती है। वो पूर्व में जारी कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं को भी आगे बढ़ाने में दिलचस्पी ले रही है। मोदी सरकार ने गरीब की रसोई में गैस से लेकर एलईडी बल्ब पहुंचाने जैसे कदम उठाकर देश के आम आदमी का आत्मसम्मान बढ़ाने का काम किया है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन्हें योजना का लाभ मिलना है उन्हें इसका लाभ मिले। सरकार ने आधार लिंक कर भ्रष्टाचार पर नकेल कसा है और इससे बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं बची है।

मोदी और ई गवर्नेंस के लिए चित्र परिणाम

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