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प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले पांच वर्षों में हर गणतंत्र दिवस को बनाया यादगार

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गणतंत्र दिवस समारोह पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छाप हमेशा से दिखती रही है। 2015 में अपने पहले गणतंत्र दिवस समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करके सबको चौंका देने वाले कदम की तरह प्रधानमंत्री मोदी ने हर गणतंत्र दिवस को यादगार बनाने का भरपूर प्रयास किया है। उनमें अतिथियों के आमंत्रण से लेकर राजपथ पर होने वाली परेड में हमेशा कुछ न कुछ ऐतिहासिक करने का जज्बा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यों से अब तक खींची गई लकीरों से लंबी लकीर खींचने का हौसला और साहस रखते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की उपस्थिति से यादगार बना समारोह

2015 में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा को मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित करके 66वें गणतंत्र दिवस को यादगार बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी की राजपथ पर पहली बार सतरंगी पगड़ी में उपस्थिति से 2015 का गणतंत्र दिवस एक मनमोहक याद के रूप में भारतीय जनमानस में है। प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं की शक्ति से दुनिया को परिचित कराने के लिए पहली बार तीनों सैन्य बलों थल सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला दलों का मार्चिंग दस्ता राजपथ की परेड में शामिल हुआ था। नौ सेना के मार्चिंग का दस्ते का नेतृत्व नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर संध्या चौहान ने किया, जबकि वायु सेना के दल का नेतृत्व स्क्वाइड्रन लीडर स्नेहा शेखावत किया। एक अन्य ऐतिहासिक पहल के तहत ‘भारतीय नौ सेना और नारी शक्ति’ में वे चार महिला अधिकारी शामिल हुईं,  जिन्होंने भारतीय नौसेना के पोत महादेई में गोवा से लेकर ब्राजील के रियो-डी-जेनेरियो तक समुद्र की विषमताओं का बहादुरी से सामना करते हुए समुद्री यात्रा में हिस्सा लिया था।

राजपथ पर फ्रांस के सैनिक दस्ते से यादगार बना गणतंत्र दिवस

2016 में 67वां गणतंत्र दिवस देश की आन-बान-शान का उत्सव था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को आमंत्रित किया था। यही नहीं फ्रांस के सैनिक दस्ते ने भी राजपथ पर भारतीय सैनिकों के साथ परेड में हिस्सा लिया। यह पहला अवसर है जब गणतंत्र दिवस परेड में किसी विदेशी सेना के दस्ते ने हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय संस्कृति की पहचान रंगबिरंगी पगड़ी पहन कर समारोह के माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया था। प्रधानमंत्री मोदी की छाप राजपथ पर आने वाली झांकियों में दिखी थी।

प्रधानमंत्री मोदी का हमेशा ही प्रयास रहा है कि देश की आदिवासी संस्कृति के साथ-साथ प्राकृतिक खुबसूरती का भी परिचय दुनिया को मिले। जहां गोवा की झांकी में जागोर जनजाति और गुजरात की झांकी में गौरव की पहचान गीर के जंगल दिखाए गए थे, वहीं जम्मू-कश्मीर की झांकी में मेरा गांव-मेरा जहां यानि स्वच्छ एवं हरित अभियान का प्रचार किया गया था। इसी तरह राजस्थान की झांकी में जयपुर के गौरव हवा महल को दिखाया गया था। और ओडिशा की झांकी में बंदाण महोत्सव दिखाया गया था तो बिहार की झांकी में चंपारण सत्याग्रह को दिखाया गया था।

पहली बार एनएसजी कमांडो के दस्ते से समारोह बना यादगार

राष्ट्र के 68वें गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्य अतिथि के रूप में संयुक्त अरब अमीरात के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को आमंत्रित किया। साथ में संयुक्त अरब अमीरात के 144 जवानों का दस्ता भी भारतीय सेना के जवानों के साथ परेड में शामिल हुआ।

यह पहला मौका था जब देश के एनएसजी कमांडो भी राजपथ पर परेड में शामिल हुए। एनएसजी दस्ते की मौजूदगी से यह गणतंत्र दिवस देशवासियों के लिए यादगार बन गया। करीब 100 एनएसजी कमांडो का दस्ता भी पहली बार इस परेड में शामिल हुआ। एनएसजी कमांडो के दस्ते को देख कर देश आश्वस्त हो गया कि आतंकियों को करारा जवाब देने के लिए हमारे कमांडो पूरी तरह से मुस्तैद हैं। इनके साथ ही भारत का एकमात्र कैवेलरी भी अपने प्रतापी घोड़ों के साथ परेड का सबसे बड़ा आकर्षण बना था।

आशियान के दस राष्ट्रध्यक्षों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बनाया

प्रधानमंत्री मोदी ने 69वें गणतंत्र दिवस के समारोह में पहली बार ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्य अतिथि के रुप में 10 आसियान देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने जहां राजस्थानी पगड़ी पहनी थी, वहीं 10 आसियान देशों के प्रमुखों ने गले में राजस्थानी चुनरी गले में डाल रखी थी । प्रधानमंत्री मोदी राजस्थानी पगड़ी में जब दस राष्ट्रध्यक्षों के साथ राजपथ पर उपस्थित हुए तो देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। मुख्य अतिथि के रूप में वियतनाम के प्रधानमंत्री नगुएन शुआन फुक, म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सांग सू की, ब्रुनेई के सुल्तान हाजी हसनल बोल्किया, इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट जोको विडोडो, फिलीपींस के प्रेसिडेंट रोड्रिगो दुतेर्ते, कंबोडिया के पीएम हुन सेन, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक, थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओ-चा, लाओस के पीएम थोनग्लोन सिसोलिथ और सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीएन लूंग थे।69 वें गणतंत्र दिवस पर महिलाओं की शक्ति राजपथ पर शमां बांध रही थीं। परेड में 6 दस्तों की कमान महिला जवानों के हाथ थी, इसमें राजपथ पर आकाश हथियार प्रणाली से लैस 27 एयर डिफेंस मिसाइल रेजीमेंट का दस्ता सबसे पहले नजर आया था, जिसकी अगुआई कैप्टन शिखा यादव ने की थी। वहीं नेवी की 144 यंगस्टर्स की टुकड़ी का नेतृत्व सब लेफ्टिनेंट रूपा ने किया था और एयरफोर्स की टुकड़ी की अगुआई फ्लाइट लेफ्टिनेंट चंदा, अदिति बाली और अमरदीप कौर ने की थी। भारतीय तटरक्षक के दस्ते का नेतृत्व डिप्टी कमाडेंट श्वेता रैना ने किया था। इसके साथ ही एनसीसी सीनियर डिविजिन की गर्ल्स कैडेट्स के दस्ते की अगुआई मुस्कान अग्रवाल और पूजा निकम ने की थी। सबको चौंकाना वाला महिला दस्ता सीमा भवानी का था, यह BSF  के 13 महिला जवानों को दस्ता था जिसने बाइक्स पर 16 तरह के हैरतअंगेज स्टंट दिखाए थे, इसका नेतृत्व स्टैंजिन नरयांग ने किया था। इस टुकड़ी को सीमा भवानी नाम दिया गया है। परेड की समाप्ति के बाद जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने राजपथ पर चलकर सभी उपस्थित देशवासियों का अभिवादन किया वह सबके दिलों में आज भी जोश भर देता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदैव ही देश के लिए कुछ नया करने का जज्बा रखा है और इसे जीने के लिए हर कदम उठाने के लिए तैयार रहे हैं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के समारोहों के आयोजनों में उनके इस जज्बे की झलक मिलती रही है।

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