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पतंग क्यों है प्रधानमंत्री मोदी के दिल के करीब, तस्वीरों में देखिए पतंगबाजी की कहानी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पतंगों के प्रति प्यार किसी से छिपा नहीं है। पतंगबाजी पर उनकी एक कविता भी बहुत चर्चित हुई थी। जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो लगभग प्रत्येक वर्ष वे अहमदाबाद में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में शामिल होते थे। इससे न सिर्फ पतंगबाजी को नया आयाम मिला, बल्कि गुजरात के पर्यटन को भी बढ़ावा मिला। 

अब जब वे प्रधानमंत्री हैं, तब भी मौका मिलने पर इसमें शामिल होने से नहीं चूकते। इस बार विशेष अवसर था। उनके साथ अहमदाबाद में पतंगबाजी का लुत्फ उठाया, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने। आइए तस्वीरों के सहारे प्रधानमंत्री के इस अंदाज को देखिए।

जनवरी 2014

वर्ष 2014 में अभिनेता सलमान खान भी इस पतंग महोत्सव में श्री नरेन्द्र मोदी के साथ शामिल हुए।  इससे दो दिन पहले साबरमती रिवरफ्रंट, अहमदबाद पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन भी नरेन्द्र मोदी ने 12 जनवरी, 2014 को पतंग उड़ाकर किया था।

जनवरी 2013

वर्ष 2013 में भी श्री नरेद्र मोदी ने साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में पतंगबाजी की। श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयास से पतंग महोत्सव की ख्याति अंतर्राष्ट्रीय स्तर हुई। उनके प्रयास से गुजरात में टूरिज्म में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तब राष्ट्रीय स्तर पर यह बढ़ोतरी केवल 7 प्रतिशत ही थी। 

जनवरी 2012

जनवरी 2011 

जनवरी, 2011 में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में शामिल होते हुए पतंग के विकास को संस्थागत रूप देने का आह्वान किया था। तब उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से पतंग के लिए नए-नए डिजाइन बनाने का आह्वान किया था।

जनवरी, 2008 में श्री नरेन्द्र मोदी के साथ बाबा रामदेव भी पतंग महोत्सव में शामिल हुए थे। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘उत्सव’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी, जिसे 14 जनवरी, 2014 को उनकी वेबसाइट पर भी प्रकाशित हुई थी। सोशल मीडिया पर वह कविता खूब शेयर की गई थी। उनकी कविता यहां पढ़िए –

उत्सव

पतंग
मेरे लिए उर्ध्वगति का उत्सव
मेरा सूर्य की ओर प्रयाण।

पतंग
मेरे जन्म-जन्मांतर का वैभव,
मेरी डोर मेरे हाथ में
पदचिह्न पृथ्वी पर,
आकाश में विहंगम दृश्य।

मेरी पतंग
अनेक पतंगों के बीच…
मेरी पतंग उलझती नहीं,
वृक्षों की डालियों में फंसती नहीं।

पतंग
मानो मेरा गायत्री मंत्र।
धनवान हो या रंक,
सभी को कटी पतंग एकत्र करने में आनंद आता है,
बहुत ही अनोखा आनंद।

कटी पतंग के पास
आकाश का अनुभव है,
हवा की गति और दिशा का ज्ञान है।
स्वयं एक बार ऊंचाई तक गई है,
वहां कुछ क्षण रुकी है।

पतंग
मेरा सूर्य की ओर प्रयाण,
पतंग का जीवन उसकी डोर में है।
पतंग का आराध्य(शिव) व्योम(आकाश) में,
पतंग की डोर मेरे हाथ में,
मेरी डोर शिव जी के हाथ में।

जीवन रूपी पतंग के लिए(हवा के लिए)
शिव जी हिमालय में बैठे हैं।
पतंग के सपने(जीवन के सपने)
मानव से ऊंचे।

पतंग उड़ती है,
शिव जी के आसपास,
मनुष्य जीवन में बैठा-बैठा,
उसकी डोर को सुलझाने में लगा रहता है।

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