Home गुजरात विशेष हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं, इसे त्यागना ही होगा-प्रधानमंत्री

हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं, इसे त्यागना ही होगा-प्रधानमंत्री

साबरमती आश्रम में बोले पीएम मोदी, गौरक्षा के नाम पर हत्या स्वीकार्य नहीं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल गुजरात की अपनी चौथी यात्रा के दौरान गुरुवार को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम पहुंचे। आश्रम की 100वीं वर्षगांठ पर उन्होंने महात्मा गांधी और उनके आध्यात्मिक गुरु माने जाने वाले श्रीमद राजचंद्र को याद करते हुए देशवासियों से 2022 तक देश को गंदगी मुक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2019 तक स्वच्छता सभी लोगों के जीवन का हिस्सा बननी चाहिए। पीएम मोदी ने देश के लोगों में पनप रही हिंसात्मक प्रवृति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, ”देशवासियों से आग्रह करता हूं कि हिंसा समस्याओं का समाधान नहीं है, इसे त्यागना ही होगा।” इस अवसर पर उन्होंने श्री मद राजचंद्र जी की स्मृति में डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। पीएम मोदी ने इस मौके पर आश्रम में चरखा भी चलाया। 

 

हिंसात्मक प्रवृति बंद हो
पीएम मोदी ने देश भर में भीड़ के द्वारा हो रही हिंसा को लेकर कहा कि मैं देश के वर्तमान माहौल की ओर अपनी पीड़ा व्यक्त करना चाहता हूं और अपनी नाराजगी भी व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा, ”जो देश चींटी को भी कुछ खिलाने पर विश्वास रखता है, जो देश गली में कुत्ते को भी कुछ खिलाने पर भी विश्ववास रखता है, तालाब किनारे जाकर मछली को दाना डालने में विश्वास रखता है, उस देश को क्या हो गया है?” उन्होंने मरीजों के परिजनों द्वारा डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाओं पर भी चिंता जतायी। पीएम मोदी ने कहा कि ”अस्पताल में डॉक्टर किसी मरीज को बचा ना पाएं, तो अचानक परिवार वाले अस्पताल को जला दे, डॉक्टरों को मार दे। कहीं एक्सिडेंट होने पर भी लोग एक दूसरे को मारने पर उतारू हो जाते हैं, ये गलत है।”

बापू और विनोबा के रास्ता ही समाधान
पीएम मोदी ने कहा कि गाय की रक्षा, गौभक्ति महात्मा गांधी और विनोबा जी से बढ़कर कोई नहीं कर सकता है। देश को उन्हीं के बताये रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि विनोबा जी और महात्मा गांधी जीवन भर गौ रक्षा के लिए काम करते रहे, मैं उनसे भी मिला भी था। उन्होंने सवाल उठाए कि गौरक्षा के नाम पर किसी इंसान को मारना क्या सही है? क्या ये गौरक्षा है कि हमें उसके नाम पर इंसान को मारने का हक मिल जाए? उन्होंने कहा, ”ये गौरक्षा या गौभक्ति नहीं है। हमें सोचना चाहिए कि हमें क्या हो रहा है, हम डॉक्टर को मार रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं। गाय के नाम पर इंसानों को मार रहे हैं।”

भावुक हुए प्रधानमंत्री मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक ऐसी बात बताता हूं जो अभी तक कहीं नहीं बताई, ”जब मैं छोटा था तब वहां पर हमारे घर के पास एक परिवार रहता था, उस परिवार में कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण काफी तनाव रहता था। लेकिन काफी उम्र के बाद एक संतान का जन्म हुआ। उस समय एक गाय वहां पर आती थी, और रोजाना कुछ खाकर जाती थी। एक बार वहां मौत हो गई और गाय को कुछ खिला नहीं पाए। तब वो बच्चा एक बार गाय के पैर के नीचे आ गया था, और उसकी मौत हो गई। दूसरे दिन सुबह ही वो गाय उनके घर के सामने खड़ी हो गई, उसने किसी के घर के सामने रोटी नहीं खाई, उस परिवार से भी रोटी नहीं खाई। उस समय गाय के आंसू लगातार बह रहे थे, उस गाय ने कई दिनों तक कुछ नहीं खा-पी सकी थी। पूरे मोहल्ले के लोगों ने काफी कोशिश की पर गाय ने कुछ नहीं खाया, और बाद में उस गाय ने अपना शरीर त्याग दिया। एक बालक की मृत्यु की पश्चाताप में उस गाय ने ऐसा किया।” उन्होंने कहा कि आज लोग गाय के नाम पर ही किसी की हत्या कर रहे हैं, किसी को कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है।

गांधी और राजचंद्र के विचारों से मिलती है शक्ति
पीएम मोदी ने कहा कि श्रीमद राजचंद्र जी के जीवन के बारे में लोगों को जानना चाहिए। महात्मा गांधी के विचारों से जो शक्ति मिलती है, उससे आज के समाज को लड़ने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि हम लोग चंपारण सत्याग्रह के 100वें साल का जश्न मना रहे हैं। श्रीमद राजचंद्र जी ने अपने जीवन में काफी कुछ गंवाया था। दुनिया का कोई व्यक्तित्व गांधीजी को प्रभावित नहीं कर पाया, बड़ी-बड़ी हस्तियां उनसे मिलने आती थी। लेकिन गांधी जी श्रीमद राजचंद्र जी को बेहद सम्मान देते थे।

गौरवशाली इतिहास को याद रखना आवश्यक
प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास भुलाने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए इस सरकार का प्रयास है कि महान राष्ट्र के महान सपूतों का, महान परंपराओं का, महान इतिहास का, निरंतर स्मरण बनता रहे। उन्होंने कहा, ”इतिहास की जड़ों से हम जुड़े रहें और नये इतिहास बनते रहें, पराक्रम के लिए तैयार होते रहें, इस मकसद से हमें चलना है।”

दुनिया के लिए प्रासंगिक है बापू के विचार
पीएम मोदी ने कहा कि आज संकट से गुजर रही मानवता को गांधी से संबल मिल सकता है, नयी राह मिल सकती है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अगर हमने महात्मा गांधी के विचारों को दुनिया में फैलाया होता, उन्हें मसीहा बनाकर विश्व के जन मन तक पहुंचाया होता तो आज विश्व शांति के लिए बना संयुक्त राष्ट्र का महासचिव भी साबरमती आकर अपना सिर झुकाता और विश्व शांति के लिए क्या करना है उसकी प्रेरणा बापू की तपोभूमि से लेकर जाता। उन्होंने कहा कि मेरी आत्मा कहती है कि आज नहीं तो कल, कभी न कभी तो ये होगा।

श्रीमद राजचंद्र जी के पत्रों का हो संकलन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्रीमद राजचंद्र जी, महात्मा गांधी को दुनिया की बड़ी बड़ी हस्तियां मिलने आतीं थीं। दुनिया का कोई व्यक्तित्व गांधी को प्रभावित नहीं कर पाया, और श्रीमद राजचंद्र जी दुबला, पतला वो भी एक व्यापारी, लेकिन असामान्य व्यक्तित्व ने गाधी जी को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि आखिर श्रीमद राजचंद्र जी में ऐसी क्या विशेषता रही होगी कि उन्होंने गांधीजी को अपने में समेट लिया था, समाहित कर लिया था। उन्होंने कहा कि श्रीमद राजचंद्र जी के पत्रों का संकलन किया जाए, जिससे पूज्य बापू और उनके पत्रों को देखें तो उस कालखंड का पता चले ।

स्वच्छता हमारा स्वभाव बने
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम पूज्य बापू को स्मरण करते हैं तो पूज्य बापू की संकल्प शक्ति से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बापू ने संकल्प लिया तो अंग्रेजों से देश को आजादी दिलाई। हम भी एक संकल्प लें कि जब हम 2019 में हम पूज्य बापू के 150 वर्ष मनाएंगे तो देश को स्वच्छ बना के रहेंगे। पूज्य बापू के ऐसे ही मनाने का किसी हिंदुस्तानी को हक नहीं है। असीम संकल्प शक्ति हो और उस संकल्पशक्ति की बदौलत हम उसे परिपूर्ण करके रहेंगे। उन्होंने कहा कि 2019 तक स्वच्छता का अभियान हर हिंदुस्तानी का स्वभाव बनना चाहिए। ये हमारे अचार- व्यवहार में भी झलकना चाहिए।

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