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Hindustan Exclusive: भाजपा पहले से ज्यादा नंबर के साथ आएगी, शानदार सरकार बनेगी- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘हिन्दुस्तान’ अखबार के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि भाजपा पहले से ज्यादा नंबर के साथ सत्ता में वापस आएगी। ‘हिन्दुस्तान’ अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर और विशेष संवाददाता रामनारायण श्रीवास्तव से बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस तरह चारों तरफ से लोग बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, लहर दिखती है। भाजपा पहले से ज्यादा नंबर के साथ आएगी। सहयोगी भी ज्यादा नंबर में आएंगे और शानदार सरकार बनेगी। आप भी पढ़िए प्रधानमंत्री मोदी से हिन्दुस्तान की बात-

बतौर प्रधानमंत्री आपके पांच साल पूरे हुए हैं। आप अपने इस कार्यकाल को कैसे देखते हैं?

बहुत ही संतोषजनक और बेहतरीन। इन पांच साल के अनुभव ने मेरे इस विश्वास को बहुत बढ़ा दिया है कि कोई कारण नहीं है कि हमारा देश विकासशील देश की श्रेणी में ही बना रहे। हमारे पास विकसित देश के सारे गुण हैं। यह विश्वास आने वाले पांच वर्षों में देश को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ही उपकारक होगा। मैं जब यहां आया तो मैंने जो सोचा था उससे भी ज्यादा हालत खराब थी। भयंकर स्थिति थी। मेरे लिए यह क्षेत्र भी नया था, समझना भी था। इस दौरान जैसे-जैसे फैसले की तरफ बढ़े बहुत सी चिंताजनक चीजें सामने आईं। मेरा मुख्यमंत्री पद का लंबा अनुभव था इसलिए मेरे भीतर का आत्मविश्वास डिगा नहीं और मुझे लगा कि मैं रास्ते निकाल लूंगा। मैंने निकाल भी लिए।

कोई ऐसे तीन बड़े काम जो आपको संतोष देते हैं?

इस प्रकार से मर्यादा में बांधना मेरे जैसे व्यक्ति के लिए बहुत मुश्किल होगा। पहले सरकार एक आध काम को लेकर सालों तक ढोल पीटती रहती थी। मेरा काम ऐसा है कि अगर आप किसी भी विभाग को ले लें, किसी भी राज्य को ले लीजिए, कोई भी सुधार ले लीजिए, हर चीज में आपको ‘इनीशिएटिव’ मिलेगा। पूरे पांच साल में शायद ही कोई दिन ऐसा गया होगा जब कोई महत्वपूर्ण निर्णय न किया हो। इतनी सारी सफलताएं, इतने सारे ‘इनीशिएटिव’ हैं कि इनको तीन में बांधना मेरे बाकी विभागों, मेरे साथियों के साथ अन्याय हो जाएगा।

जब आपने कार्यभार संभाला उस समय आपने कुछ वायदे किए थे, कुछ संकल्प लिए थे। अब जब आपका पहला कार्यकाल पूरा हो रहा है क्या आपको लगता है कि कुछ करना अधूरा रह गया है?

मैं समझता हूं कि अगर सब काम हो जाते तो दुनिया ही अटक जाती। मेरा मत है कि व्यक्ति और राष्ट्र के जीवन में संतोष हमारे स्वभाव का हिस्सा कभी नहीं बनना चाहिए। संतोष एक तात्कालिक अवसर हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक नहीं। भीतर नई उमंग, नया उत्साह, नए संकल्प जुड़ते चले जाने चाहिए। जो भी किया उससे इतना संतोष मिला है कि मुझमें और नई चीजें करने की उमंग बढ़ती चली जा रही है और वही सबसे बड़ा संतोष है।

आपने इस दौरान कई सामाजिक आह्वान भी किए हैं चाहे वह ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ हो, जनधन हो, स्वच्छता हो, मुद्रा हो। ये सब पहले पांच वर्षों में कहां तक पहुंचे?

देश को आगे बढ़ाने वाली विकास की गाड़ी दो पटरियों पर चलनी है। एक ‘सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर’ और दूसरा ‘फिजीकल इंफ्रास्ट्रक्चर’। ‘सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर’ में हमारे देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में एक सामान्य अवस्था जिसको कहें, वहां पहुंचना चाहिए। घर है, शिक्षा है, आरोग्य है, शौचालय है, ये सारी चीजें उसे उपलब्ध होनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर विश्वस्तरीय होना चाहिए। अब देखिए आजादी का आंदोलन था। यह देश कई साल गुलाम रहा। कोई इलाका ऐसा नहीं है जिसने बलिदान न दिए हों, लेकिन गांधी जी ने क्या किया? आजादी को जन आंदोलन में बदल दिया। तुम झाड़ू लगाते हो आजादी के लिए, तकली चलाते हो आजादी के लिए, प्रौढ़ शिक्षा देते हो आजादी के लिए, तुम शिक्षक हो आजादी के लिए। उन्होंने आजादी का स्वरूप बदल दिया। जन भागीदारी से आजादी को जोड़ दिया। मेरा मानना है कि आजादी जैसे जन आंदोलन की तरह विकास भी जन आंदोलन बनना चाहिए। हमने सरकार के सीमित कार्यक्रमों को विकास मान लिया है। मेरा मानना है कि यह हमारी रणनीतिक कमी रही है अगर उसको जन भागीदारी बनाते तो वह सौ गुना हो जाता।

हमने एक बहुत बड़ी गलती की है, खासकर राजनेताओं ने। हमने मान लिया कि रेवड़ियां बांटकर, टुकड़े बांटकर जनता को खुश किया जा सकता है। इस देश के मूल स्वभाव को हम राजनेताओं को समझने की जरूरत है, पकड़ने की जरूरत है। अगर हम यह सब करेंगे, तो शॉर्टकट ढूंढ़ने की जो आदत है, उससे बाहर निकल आएंगे। इसलिए जनता की शक्ति को पहचानना, शक्ति को स्वीकारना, उसी शक्ति से समस्या का समाधान करना, यह मैंने एक आदत बनाई है।

आपने नोटबंदी की। क्या आपको लगता है कि वह अपने मकसद में कामयाब रही?

बहुत सफलता मिली। मैं इससे काफी प्रसन्न हूं। एक ऐसा नासूर जिस पर आज तक कोई हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करता था। आपको मालूम होगा कि जब देश में करेंसी कम थी और सबसे बड़ी करेंसी सौ रुपए की थी, तब इंदिरा जी प्रस्ताव लेकर आईं। उस समय यशवंतराव चव्हाण ने कहा कि राजनीति करनी है या नहीं करनी। चुनाव लड़ना है या नहीं। इस चक्कर में मत पड़ो। एक किताब में इसका उल्लेख है। तो राजनीतिक गणित में यह बैठता नहीं है, लेकिन राष्ट्रहित में यही होना चाहिए। हमने ऐसा राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, राष्ट्रहित के लिए किया। विगत साढ़े चार वर्ष में काले धन के खिलाफ उठाए गए कदमों से 1,30,000 करोड़ रुपए उजागर हुए हैं, जिस पर टैक्स और जुर्माना लगाया गया है। इससे करीब 50,000 करोड़ रुपए की संपत्तियों की जब्ती व कुर्की हुई है। इस दौरान 6900 करोड़ की बेनामी संपत्ति और 1600 करोड़ रुपए की विदेशी संपत्तियों की जब्ती हुई है। करीब-करीब 3,38,000 कागजी कंपनियों का पता लगाया गया है और अपंजीकृत किया गया है। उनके निदेशकों को अयोग्य करार दिया गया है। कर दायरा लगभग दोगुना हो गया है। यह सब विमुद्रीकरण जैसे उपायों का ही परिणाम है।

चुनाव में इसे आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है?

पहले भी किया। उत्तर प्रदेश में बहुत किया था, बुरी तरह पिटाई हुई। जितने मुद्दे लेकर गए उन्हीं मुद्दों ने इनको मारा। अगर वे सच्चाई से करते, रिसर्च करके करते तो और बात थी। अब आप बताइए कि तीन लाख फर्जी कंपनी चलती थीं- इतने से कमरे (हाथ फैलाकर संकुचन का इशारा करते हुए) में चार सौ कंपनी चलती थी। हवाला का कारोबार चलता रहता था। हमने तीन लाख फर्जी कंपनियों को बंद किया। लाखों-करोड़ों की बेनामी संपत्ति जब्त की। छिपा हुआ धन इतनी बड़ी मात्रा में सामने आया। करदाताओं की इतनी बड़ी संख्या बढ़ी। हवाला कारोबार, आतंकवाद की समस्या पर असर पड़ा। आतंकवाद को होने वाली फंडिंग रुकी। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में जो चीजें पकड़ी हैं उनसे यह सामने आया है। इसलिए देश के कुछ लोग इसे जीडीपी से जोड़ते हैं।

नोटबंदी का रोजगार पर असर पड़ा। सरकार रोजगार को लेकर क्या कर रही है?

जहां तक रोजगार की बात है, इसके तीन पहलू हैं। औपचारिक रोजगार, अनौपचारिक रोजगार और अनेक संकेतक। पहले औपचारिक रोजगारों को देखते हैं, ईपीएफओ और ईएसआईसी का डाटा बताता है कि पिछले एक वर्ष में हम हर महीने लगभग 10 लाख नौकरियां जोड़ रहे हैं, एक वर्ष में करीब 1.2 करोड़ रोजगार। विगत चार वर्ष में 55 लाख नए ‘सब्सक्राइबर्स’ एनपीएस में दर्ज हुए हैं। करीब 1 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना का लाभ मिला है। नैसकॉम रिपोर्ट बताती है, आईटी सेक्टर में नौकरियां अच्छी रफ्तार में बढ़ रही हैं। आज ये सारे उपरोक्त रोजगार भारत में कुल रोजगार का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा हैं।

अब अनौपचारिक सेक्टर को देखते हैं, जो भारत में करीब 85 प्रतिशत रोजगार देता है। विगत चार वर्ष में 17 करोड़ मुद्रा ऋण दिए गए हैं, जिसमें से 4.25 करोड़ ऋण प्रथम बार के उद्यमियों को दिए गए हैं। सीआईआई का एक सर्वे बताता है, विगत चार वर्ष में एमएसएमई सेक्टर में करीब छह करोड़ नई नौकरियां बनी हैं। विगत चार वर्ष में पर्यटकों की संख्या और पर्यटन से राजस्व में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। क्या इससे पर्यटन क्षेत्र में ज्यादा रोजगार नहीं सृजित हुए होंगे? लाखों जन सेवा केंद्र पूरे देश में क्रियाशील हैं। क्या इससे रोजगार नहीं सृजित हुआ होगा?

अब तीसरे पहलू को देखते हैं, जो संकेतक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है। वर्ष 1991 के बाद की सरकारों से तुलना करें, तो वास्तव में हमारी सरकार के समय औसत विकास श्रेष्ठ रहा है। क्या यह ज्यादा रोजगारों के बिना संभव है? अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में गरीबी तेजी से घट रही है। क्या यह बिना रोजगार के संभव है? भारत में विदेशी पूंजी निवेश रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर है। क्या यह बिना रोजगार के संभव है? भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप हब में से एक है। अनेक एप आधारित व्यवसायों के विकास से हमारी स्टार्ट अप अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। क्या यह बिना रोजगार के संभव है? पश्चिम बंगाल बोलता है, हम अच्छी संख्या में रोजगार सृजित कर रहे हैं, कर्नाटक बोलता है, हम अच्छी संख्या में रोजगार सृजित कर रहे हैं, ओडिशा बोलता है हम अच्छी संख्या में रोजगार सृजित कर रहे हैं। क्या यह संभव है कि राज्य रोजगार सृजित कर रहे हैं लेकिन केन्द्र नहीं? दरअसल, कांग्रेस का एक ‘सिस्टम’ है। वही यह सब फैला रहा है। अटल जी पर भी ऐसे ही आरोप लगते थे।

यह आरोप लगता है कि आंकड़ों में हेराफेरी हुई है?

जो ऐसी बातें करते हैं उन्होंने देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। वही प्रणाली है, वही व्यवस्था है, वही पद्धति है जो पिछली कई सरकारों के दौरान चली थी। चूंकि आपसे बेहतर हो रहा है इसलिए आप अचानक इस तरह से कह रहे हैं और संस्थानों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। आप चुनाव हार जाओ तो ईवीएम को गाली दो, आपके अनुसार निर्णय न हो तो मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की बात कहो, मीडिया आपके अनुसार न हो उसे बिका हुआ करार दो। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक भारत के विकास को स्वीकार करता है। दुनिया यह मानती है कि भारत विश्व की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था है। मोदी का विरोध करते हो जरूर करो, लेकिन मोदी का विरोध करने के लिए दुनिया में भारत की साख समाप्त हो जाए इसके लिए संस्थानों पर हमला मत करो।

आजकल सियासत में भाषाई शालीनता खत्म हो रही है। इसके लिए क्या कोई पहल राजनेताओं में शीर्षस्थ स्तर पर नहीं होनी चाहिए?

मैं नहीं मानता हूं कि ऐसी कोई बात अचानक आई है। पहले 24 घंटे में एक बार खबर आती थी तो इन चीजों को महत्व देने के लिए जगह ही नहीं होती थी। मैंने गुजरात में एक बार कहावत कही कि बिल्ली रास्ता काट गई तो दूसरे दिन अखबारों में पढ़ा कि मोदीजी ने सोनियाजी को बिल्ली कहा। अब इसको क्या कहेंगे आप? ये जो खेल चल रहे हैं और जो लोग शालीनता का उपदेश देते हैं उनकी भाषा तो देखिए। जब संसद चल रही होती है तो उसके शुरू होने से पहले मीडिया में देखिए किस तरह की खबरें रहती हैं। संसद को लड़ाई का मैदान बना देते हैं। कहीं से भी किसी चीज को उठा लेना और यह कहना कि शालीनता में कमी है! यह पहले नहीं होता था, ऐसा नहीं है। अगर सोनिया जी ने अटल बिहारी वाजपेयी जी को गद्दार कहा, आज से 15 साल पहले मोदी को मौत का सौदागर कहा, आप क्या कहेंगे? एक कांग्रेस के नेता जिनका स्वर्गवास हो गया, उनका नाम नहीं लेता हूं, उन्होंने अटलजी को संसद के भीतर देशद्रोही कहा। ऐसा नहीं है कि हमें इसे झेलना नहीं पड़ा, लेकिन शब्दों को तोड़ मरोड़कर पेश कर शालीनता सिखाने का फैशन चल पड़ा है।

पश्चिम बंगाल में आपकी बड़ी रैली हुई। बंगाल को भाजपा की नई प्रयोगशाला के रूप में देखा जा रहा है। आपको कितनी सफलता मिलने की उम्मीद है?

पहली बात यह है कि पश्चिम बंगाल को भाजपा की प्रयोगशाला के रूप में देखना उचित नहीं है। आपने मेरे 2013 के भाषण सुने होंगे। मैं हमेशा से कहता आया हूं कि भारत में संतुलित विकास के अभाव से बड़ा नुकसान हुआ है। भारत पंजाब से लेकर केरल तक आर्थिक रूप से वाईब्रेंट रहा है। पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा प्राकृतिक संसाधन रहे हैं। सबसे ज्यादा सामर्थ्यवान, बुद्धिमान लोग वहां रहे हैं। सबसे ज्यादा आईएएस, आईपीएस वहां से रहे हैं। मेरा पहले से मत है कि भारत के संतुलित विकास के लिए भारत के पूर्वी छोर को हमें शक्तिशाली बनाना होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना होगा, वहां पर निवेश करना होगा। वहां के संसाधनों का वहीं पर उपयोग करना होगा। उसकी प्राकृतिक क्षमता पर बल देना है। मुझे पांच साल में यही काम करना है कि पूर्वी भारत को शक्तिशाली बनाना है। समग्र हिन्दुस्तान के विकास का मानचित्र जो मेरे दिमाग में है पूर्वी भारत उसका एक हिस्सा है, कोई राजनीति का हिस्सा नहीं है। कोई कहे कि मैं दो बार अरुणाचल प्रदेश क्यों गया? राजनीतिक हिसाब-किताब लगाने वाले मिल जाएंगे, लेकिन मेरी सरकार की पूर्वोत्तर को लेकर अलग दृष्टि है। मेरा कोई न कोई ‘मिनिस्टर’ हर 15 दिन में कम से कम चौबीस घंटे पूर्वोत्तर में जरूर रहा है। पहले पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्री सात सात दिन तक दिल्ली में पड़े रहते थे और दिल्ली के नेता मिलने का समय नहीं देते थे। मैंने उल्टा किया। उसी तरह पश्चिम बंगाल भी पूर्वी भारत की विकास यात्रा का केंद्र बन सकता है। हम सबको मिलकर कोलकाता को केंद्र में लाना चाहिए। देश की आर्थिक गतिविधि में चेन्नई, हैदराबाद, बंगलुरू और मुंबई की तरह कोलकाता का भी स्थान होना चाहिए।

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कई वादे किए हैं। उसके बारे में आप क्या सोचते हैं?

उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखिए। 2004 में कांग्रेस ने वादा किया था कि हर घर में बिजली पहुंचाएंगे। कहा था कि तीन साल में पहुंचेगी। 2009 में कहा कि शहरों में तो करेंगे, लेकिन गांवों में समय लगेगा, लेकिन 2014 तक नहीं पहुंची। 2014 में हमने सत्ता में आने के बाद 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचाई। अब तक ढाई करोड़ घरों तक बिजली पहुंच गई है और निकट भविष्य में हर घर तक पहुंच जाएगी। अभी उन्होंने पंजाब, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में कर्ज माफी का वादा किया, लेकिन नहीं किया। उन्होंने पहले भी 2009 में वादा किया था। छह लाख करोड़ रुपए का कर्ज था, कर्ज माफी हुई केवल 52 हजार करोड़। सीएजी की रिपोर्ट है कि इसमें भी पचास लाख लोग फर्जी थे। जिनका ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा है उन पर कौन भरोसा करेगा? फिर उन्होंने हाल में कहा था कि राज्यों में जीतकर आएंगे तो युवाओं को मासिक भत्ता देंगे। अभी तक कुछ नहीं दिया है। नेहरू जी के जमाने से वे गरीबी हटाने का दावा कर रहे हैं। नेहरू जी कहते थे, इंदिरा जी ने कहा, राजीव जी ने कहा, सोनिया जी ने कहा और अब उनके बेटे भी यही कह रहे हैं। पांच पीढ़ी के लिए यह नारा बन गया है। कांग्रेस पार्टी ‘गजनी’ फिल्म के पात्र की तरह है। वह खुद याद नहीं रखती, जो वादे उसने पिछले घोषणापत्रों में किए थे। पहले के घोषणापत्रों में भी उसने किसानों को सीधी आय और उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा किया था, लेकिन वह भूल गई। पहले के घोषणापत्रों में उसने हर घर को बिजली देने का वादा किया था, जो हम पूरा कर रहे हैं। उसने वर्ष 2009 तक हर गांव में ब्रॉडबैंड देने का वादा किया था, फिर यही वादा 2019 में कर दिया है। हाल के विधानसभा चुनावों में इसने किसान कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते का वादा किया। किसानों से माफी का वादा था, लेकिन उन्हें वारंट दिए। युवा अब भी बेरोजगारी भत्ते का इंतजार कर रहे हैं। क्या कांग्रेस पार्टी ने पिछले 72 वर्षों में गरीबों को 71 पैसे भी सीधे दिए हैं? भारत के लोग यह अच्छी तरह जानते हैं।

बुद्धिजीवियों के एक तबके ने आपको वोट न देने की बात कही है, उसे कैसे लेते हैं?

ये लोग कौन हैं मैं नहीं जानता, लेकिन लोगों का एक वर्ग है जो पुरानी सरकारों में मलाई खाता रहता था। उन्हें अवॉर्ड मिलते थे, मान-सम्मान मिलता था, बच्चों को स्कॉलरशिप मिलती थी, बच्चे विदेश में पढ़ते थे। हो सकता है ये वो ही लोग हों, मालूम नहीं। वे हर चुनाव में ऐसा करते हैं। दिल्ली में चुनाव था तब भी एक विषय लेकर निकले थे। वो शायद सीधे राजनीति में नहीं आ सकते होंगे, इसलिए इस तरह से करते होंगे लेकिन अब तक उनकी किसी ने सुनी नहीं है तो उनको खुद सोचना चाहिए।

सरकार ने माओवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद पर प्रभावी कार्रवाई की, लेकिन कश्मीर में परिणाम उतने अच्छे नहीं हो सके। इसकी क्या वजह रही?

कश्मीर के हालात अच्छे नहीं हैं, इस बात से मैं सहमत नहीं हूं। यह 40 साल पुरानी समस्या है लेकिन आप देखेंगे कि जम्मू, लद्दाख व श्रीनगर घाटी में केवल घाटी के दो ढाई जिले ही बचे हैं जहां हालत ठीक नहीं है। श्रीनगर घाटी में कई साल से स्थानीय स्तर के चुनाव नहीं हुए थे। पहले की सरकारें रुकावटें बनती थी। अभी हमने चुनाव कराए हैं। 75 फीसदी मतदान हुआ और एक भी हिंसक घटना नहीं हुई। पश्चिम बंगाल में पंचायत के चुनाव में सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन कश्मीर में एक घटना नहीं हुई। हालात खराब बंगाल में हैं या कश्मीर में? कश्मीर के अंदर एनआईए ने एक्शन लिया। कश्मीर की जनता टोले बनाकर तालियां बजा रही थी। जो लोग भ्रष्टाचार करते करते बड़े बन गए, पहले उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी। अब हमारी सरकार ने कार्रवाई की है। हाल में वहां फुटबॉल का मैच हुआ। वहां 25 हजार लोग थे और वहां की टीम ने कोलकाता की एक मशहूर टीम को हराया भी। ये बातें बाहर आती नहीं है। एक तरह से विकास तेजी से हो रहा है। कश्मीर में हर घर में बिजली पहुंचने का काम पिछले महीने पूरा कर लिया है। इन दिनों राज्यपाल शासन में कई बड़े निर्णय हुए हैं।

क्या आपको नहीं लगता है कि महबूबा मुफ्ती के साथ सरकार बनाना सही फैसला नहीं था?

चुनाव नतीजे आए तो किसी को पूर्ण बहुमत मिला नहीं था। हम सोच रहे थे कि नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी मिलकर कुछ करेंगे। हमारे पास ‘नंबर’ नहीं था। कई महीने राज्यपाल शासन रहा। उस समय मुफ्ती मोहम्मद सईद जीवित थे। उनसे वहां के लोगों की बात हुई। हमने खुलेआम कहा कि हम दो ध्रुव हैं। एक तरह से यह गठबंधन हमारी महामिलावट थी। क्योंकि लोकतांत्रिक मजबूरी में सरकार देनी थी, तो हमने न्यूनतम कार्यक्रम के साथ काम शुरू किया। मुफ्ती साहब अनुभवी थे उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। मुफ्ती साहब के जाने के बाद महबूबा के सामने पार्टी के अलावा अन्य दिक्कतें थीं। कई दिनों तक वह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थीं। बहुत देर में उन्होंने जिम्मेदारी ली। राज्यपाल शासन आया, फिर सरकार बनी, सरकार चली। हमारा कहना था कि स्थानीय चुनाव कराए जाएं, लेकिन वो तैयार नहीं थीं। कहती थीं कि खूनखराबा हो जाएगा। जब उन्होंने चुनाव नहीं कराए तो हमने छोड़ दिया। हमने विकास पर ध्यान दिया, कोशिश की। हमने पहले ही कहा कि आज जो महामिलावट दिख रही है वह भी हमारी महामिलावट थी और उससे जो राजनीतिक नुकसान होना था वह हो गया।

आतंकवाद के खिलाफ आपने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई, क्या आपको लगता है कि पुलवामा के बाद देश में आतंकवाद को लेकर ‘नैरेटिव’ बदल गया है?

आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया लड़ रही है। हमारी कोशिश है कि आतंकवाद को एजेंडा बनाकर पूरी दुनिया में बताएं कि पाकिस्तान भारत में आतंकवाद के निर्यात का उद्योग चलाता है। पुलवामा ने दुनिया में विश्वास पैदा कर दिया है कि भारत जो कहता है वह सही है। उसके कारण जो ‘एयर स्ट्राइक’ की तो पूरा विश्व हमारे साथ खड़ा था। एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर कभी केवल रूस हमारे साथ होता था और बाकी दुनिया पाकिस्तान के साथ। पांच साल में अकेला चीन पाकिस्तान के साथ है और बाकी दुनिया भारत के साथ। जहां तक भारत का सवाल है, भारत अच्छी तरह जानता है कि भाजपा सरकार और मोदी की नीति आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है। उरी के बाद भी मैंने सार्वजनिक रूप से कहा कि मैं जवानों का खून बेकार नहीं जाने दूंगा। पुलवामा के बाद कहा कि उन्होंने बड़ी भूल की है। बाद में जो कार्रवाई की वह सामान्य लोगों की इच्छा थी।

ऑपरेशन ‘टोपॉज’ के फ्लॉप हो जाने के बावजूद पाकिस्तान की हरकतें रुकी नहीं हैं। क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे बंद हो गए हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ही बात करनी पड़ेगी?

देखिए जब मैं पीएम बना नहीं था, शपथ भी नहीं ली थी, मैंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण के लिए बुलाया तो केवल देश हित के लिए, यह जानते हुए भी कि भाजपा और उसके समर्थक वर्ग में इसे लेकर क्या प्रतिक्रिया होगी। मैंने संदेश दिया था कि हां हम निर्णायक अवस्था में जाएंगे। उसके बाद मैं लाहौर चला गया। उसके बाद भी ऐसी हरकतें हुईं। दुनिया ने तो देखा कि मोदी ने तो शुरुआत की है, हाथ मिलाने की। मैं दुनिया को यह बात समझाता था कि दोस्ती के रास्ते पर भी मैं ही आगे बढ़ा था और दुश्मनी के रास्ते पर भी मेरी पूरी तैयारी है। ये विश्व मोदी की बात पर भरोसा करता है। पाकिस्तान ने तो पूरी कोशिश की, लेकिन उसे मैंने कठघरे में खड़ा कर दिया।

चीन हमारे प्रति अमैत्रीपूर्ण रवैया बनाए हुए है। आपको लगता है कि दोनों पड़ोसियों के साथ अभी कुछ और काम किया जाना बाकी है?

देखिए हर देश की अपनी एक स्वतंत्र रणनीति रहती है। केवल उसके आधार पर हम संबंधों का मूल्यांकन नहीं कर सकते हैं। कुछ मुद्दों पर हम ईरान के साथ होते हैं तो कुछ मुद्दों पर हम अरब देशों के साथ होते हैं। कुछ मुद्दों पर हम इजराइल के साथ होते हैं और कुछ मुद्दों पर फिलस्तीन के साथ। भारत की विदेश नीति भारत के हित में होती है। जहां तक भारत व चीन का द्विपक्षीय संबंध है, हमारी परस्पर समझ है कि अंतरविरोध हैं, मतभेद हैं, स्वीकार्यता भी है। तय है, हम मतभेदों को विवाद नहीं बनने देंगे। उस मर्यादा का पालन करेंगे। हम भरपूर प्रयास करेंगे और दोनों तरफ से करेंगे। सीमा पर विवाद होने के बावजूद हमारा राजनीतिक संबंध है, एक दूसरे का सम्मान है। एक दूसरे के यहां निवेश हो रहा है। कभी कोई समस्या होती है तो उच्च स्तर पर जब बात होती है, समाधान हो जाता है। इसलिए बहुपक्षीय स्थितियों से द्विपक्षीय संबंधों को तोड़ना नहीं चाहिए।

राफेल को लेकर विवाद खड़े हो रहे हैं। क्या कहेंगे?

यह विवादों के घेरे में है ही नहीं। इस देश का मीडिया अगर निष्पक्ष है तो उसका दायित्व बनता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस से सवाल पूछे। सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस के सबसे बड़े नेता बिना कोई सबूत, कोई आधार के बोलते हैं। बोलते ही जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया, सीएजी ने कह दिया, फ्रांस की संसद ने कह दिया, फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी कह दिया, कंपनी ने भी कह दिया, भारत सरकार ने कह दिया, संसद ने कह दिया पर वे बोलते चले जा रहे हैं। जो लोग सेनाध्यक्ष को गाली दें, देश की सेना को बलात्कारी कहें, शोभा देता है क्या? शांति सेना में भारत का सबसे बड़ा योगदान है। पूरी दुनिया में हमारे सैनिक जाते हैं। लेकिन न संयुक्त राष्ट्र ने, न किसी अन्य देश ने भारत की सेना के अनुशासन, आचार, व्यवहार पर सवाल उठाए। एक शब्द नहीं बोला। आप मेरे देश में मेरी सेना को बदनाम कर रहे हो! दूसरा उन पर बोझ है बोफोर्स का, उनके पिताजी के पाप को धोने का, इसलिए उन्होंने जब जॉर्ज फर्नाडीज थे तब भी रक्षा सौदे के भ्रष्टाचार को उठाया था। संप्रग की सरकार में ही मामला कोर्ट से निकल गया। आप झूठे आरोप लगाकर अपने पिता के पाप नहीं धो सकते हैं।

एक सवाल प्रधानमंत्री नहीं, व्यक्ति नरेंद्र मोदी से। एक साधक, एक स्वयंसेवक, एक राजनीतिज्ञ व अब देश की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठा व्यक्ति, आपके मानस में हर भूमिका के दौरान कुछ परिवर्तन आते रहे? इस यात्रा को कैसे देखते हैं?

किसी भी परिवार में बच्चा हर प्रकार से विकसित नहीं होता है, उम्र बढ़ती है, लेकिन दिमाग नहीं बढ़ता है तो उस परिवार के लिए बोझ बन जाता है। जिस संस्थान में होता है उस संस्थान के लिए भी बोझ बन जाता है। अब इसलिए जीवंत मनुष्य का लक्षण है कि वह निरंतर विकसित होता रहे। नई-नई चीजों को स्वीकार करने का स्वभाव होना चाहिए, खुद को बार-बार ऊपर उठाते रहना चाहिए। अगर मैं मुख्यमंत्री वाली मानसिकता से यहां काम करता तो नहीं चल सकता था। प्रधानमंत्री बनने के बाद अगर मैं इस मानसिकता को स्वीकार नहीं करता कि दुनिया में भारत बड़ा बन सकता है तो विश्व में भारत का नाम नहीं बढ़ा सकता था। अगर मैं सोता रहता तो गगनयान में मैं अंतरिक्ष में मनुष्य भेजूंगा, नहीं सोच सकता था। इसलिए जीवंत मनुष्य का लक्षण है कि उसे निरंतर विकसित होते रहना चाहिए। मुझे हर वक्त लगता रहता है कि मैं एक विद्यार्थी हूं। भीतर के विद्यार्थी को मैं मरने नहीं देता। मैं आपको इंटरव्यू दे रहा था, लेकिन उससे ज्यादा आपके सवालों से देश को पढ़ने की कोशिश कर रहा हूं। मैं यहां आपके सामने छात्र के रूप में बैठा हूं। बहुत कुछ उसमें से मैं सीखता हूं। लेकिन होते हैं कुछ लोग जिनकी उम्र तो बढ़ जाती है, लेकिन विकास नहीं हो पाता।

देश की जनता अगर दोबारा आप में विश्वास जताती है तो पहला काम क्या करना चाहेंगे?

चुनाव घोषित होने के बाद मैं भारत के लगभग 70-80 फीसदी राज्यों में दौरा कर चुका हूं। मैंने ऐसी प्रो-इनकमबेंसी वेव (सरकार के समर्थन में लहर) न कभी गुजरात के चुनाव में देखी है और न ही 2013-14 में देखी। पहले कहते थे कि ‘अंडर करंट’ है, अब लहर दिखती है, जिस तरह से लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, चारों तरफ से, चाहे ओडिशा हो या पश्चिम बंगाल, वह इस लहर का लक्षण है। इसलिए आपका सवाल अनुचित है, हमारी सरकार तो बनने ही वाली है। पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने वाली है। भाजपा पहले से ज्यादा नंबर से आएगी। भाजपा के साथ ही भाजपा के सहयोगी भी ज्यादा नंबर से आएंगे और हिन्दुस्तान के हर कोने से आएंगे। शानदार सरकार बनेगी और पहला निर्णय क्या होगा, दूसरा क्या होगा, उसके लिए जल्दी दोबारा मिलेंगे।

सौजन्य: हिन्दुस्तान

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