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‘बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ’ अभियान का असर, सोनीपत में बेटों से आगे निकली बेटियां

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ” अभियान के परिणाम अब दिखने लगे हैं। प्रधानमंत्री ने बेटे और बेटियों के बीच के भेद को खत्म करने और बेटियों के प्रति समाज की सोच को बदलने के उद्देश्य से 22 जनवरी 2015 को जिस हरियाणा में इस अभियान की शुरुआत की थी, आज वहीं पर बेटियों की संख्या बेटों से ज्यादा हो गई है। हरियाणा के सोनीपत में पहली बार बेटियों ने बेटों को पछाड़ दिया है। इस वर्ष जनवरी के महीने में यहां एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 1005 पहुंच गई है।

हरियाणा के देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां लड़कों की तुलना में लड़कियों का अनुपात बहुत कम रहा है। देश की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लिंगानुपात के अंतर को खत्म करने के लिए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम “बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ” की शुरुआत की थी। इस दौरान विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देश के लोगों से एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा था कि वो “बेटियों के जीवन की भीख मांगने के लिए एक भिक्षुक के रूप में आए हैं।” श्री मोदी ने ये भी कहा था कि “जब तक हमारी मानसिकता 18वीं सदी की है, हमें खुद को 21वीं सदी का नागरिक कहने का कोई अधिकार नहीं।” इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बेटे और बेटियों के बीच भेदभाव को खत्म करने का आह्वान किया था। इन तीन वर्षों में कई मौके पर पीएम मोदी इस बात को कह चुके हैं कि समाज में बेटियों के प्रति सोच बदल कर ही कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सकता है।

सोनीपत में 830 से 1005 हुई बेटियों की संख्या
प्रधानमंत्री मोदी के इस आह्वान का असर अब दिखाई देने लगा है। सोनीपत में पिछले चार वर्षों में कभी भी लिंगानुपात एक हजार के पार नहीं पहुंचा था। 2014 में सोनीपत इस मामले में सबसे पिछड़े जिलों में शामिल था और यहां लड़कों की तुलना में लड़कियों का लिंगानुपात सिर्फ 830 था। 2015 में मोदी सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के बाद यहां लोगों में जागरूकता आई और सरकारी स्तर पर भी कई योजनाएं चलाई गई। इसके बाद लगातार यहां लड़कियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वर्ष सोनीपत में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या
2014 830
2015 867
2016 902
2017 937
2018 (जनवरी) 1005

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मिशन के अंतर्गत जहां लोगों को जागरूक किया जाता है, वहीं लिंग परीक्षण, अल्ट्रासाउंड सेंटरों, गर्भवात करने वालो पर भी शिकंजा कसा जाता है। अभी यह अभियान देश के 161 जिलों में चलाया जा रहा है, और इनमें से 104 जिलों में लड़कियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

महिला दिवस पर पीएम मोदी देंगे सौगात
इस साल 8 मार्च को महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। पीएम मोदी 8 मार्च को राजस्थान के झुंझुनूं में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मिशन को देश के हर जिले में लागू करने की घोषणा करेंगे। आपको बता दें कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना (BBBP) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक साझा योजना है। जिसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया है। पीएम मोदी महिलाओं को राष्ट्र निर्माता का दर्जा देते हैं। एक नजर डालते हैं उन योजनाओं पर जिनके माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण किया जा रहा है।

8 करोड़ परिवारों को मिलेगा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब महिलाओं को बीमारी से मुक्ति दिलाने और उनके चेहरे पर खुशी लाने के लिए 1 मई, 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरूआत की थी। दिसंबर, 2017 तक 3 करोड़ 22 लाख परिवारों को इस योजना का लाभ मिल चुका था। हालांकि इस योजना तहत पांच करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस चूल्हा और कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन इस योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर आठ करोड़ का फैसला किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक योजना तैयार की है, जिसमें उन गरीब परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। सरकार इसकी घोषणा बजट में या उससे पहले कर सकती है। ताकि 2025 तक सभी घरों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

मातृत्व अवकाश, मातृत्व लाभ
वर्तमान सरकार ने नया मातृत्व लाभ संशोधित कानून एक अप्रैल 2017 से लागू कर दिया है। संशोधित कानून के तहत सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए वैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दी है। इसके तहत 50 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थान में एक तय दूरी पर क्रेच सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य है। महिलाओं को मातृत्व अवकाश के समय घर से भी काम करने की छूट है। मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के 1 जनवरी 2017 से लागू है। योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है।

महिला उद्यमिता और महिला कौशल को बढ़ावा
स्टैंड-अप इंडिया के अंतर्गत महिलाओं को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए हर बैंक शाखा को 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के ऋण कम से कम एक महिला को उपलब्ध कराने का नियम बनाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत महिलाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए 11 लाख से अधिक महिलाओं को अलग-अलग तरह के हुनर में प्रशिक्षित किया गया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। इस योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। 

सुकन्या समृद्धि योजना
केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से देश की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य किया है। योजना के अंतर्गत 0-10 साल की कन्याओं के खाते बैंकों और डाकघरों में खोले जा रहे हैं। इन खातों में पर दूसरे खातों की तुलना में अधिक ब्याज दिया जा रहा है। सुकन्या समृद्धि योजना अभिभावकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के तहत अभिभावकों को एक हजार रुपया प्रतिमाह 14 वर्ष तक जमा करना होगा।21 वर्ष के बाद खाता परिपक्व होने पर उन्हें 6,41,092 की धनराशि वापस मिलेगी। आकलन के अनुसार 14 वर्ष में खाते में जमा होंगे 1.68 लाख रुपये और 21 वर्ष बाद 6,41,092 रुपये की वापसी होगी। योजना के माध्यम से सरकार ने बेटियों की शिक्षा और समृद्धि दोनों को सुनिश्चित किया है।

मुद्रा योजना में महिलाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। इस योजना के तहत 28 फरवरी 2018 तक 11,14,85,956 लोग लाभ ले चुके हैं, इनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। यानि 7.5 करोड़ से अधिक महिलाओं ने इसका लाभ उठाया है।

महिलाओं के पासपोर्ट बनाना आसान
विदेश मंत्रालय ने महिलाओं को विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनाने के काम को आसान कर दिया गया, इसके लिए शादी या तलाक के सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई अब वे अपने पिता या मां का नाम लिख सकती हैं। पहले महिलाओं को पासपोर्ट बनवाने में खासी दिक्कत आती थी, लेकिन इस बदलाव के बाद महिलाओं के लिए पासपोर्ट बनवाना आसान हो गया है।

महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता, शासन संचालन और उनका कौशल बढ़ाना है, ताकि वो गांवों का प्रशासन बेहतर तरीके से चला सकें। पंचायती संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को कई बार काम में मुश्किलें पेश आती हैं। इसलिए महिला सरपंचों तथा निचले स्तर पर महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसका सीधा लाभ शासन-प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी के रूप में मिल रहा है। 

यौन उत्पीड़न से निवारण के लिए ई-प्लेटफॉर्म
कार्यालयों में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न की घटनाएं रोकने के लिए ई-प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है। इस ई-प्लेटफॉर्म की सुविधा के माध्यम से केंद्र सरकार की महिला कर्मचारी ऐसे मामलों में ऑनलाइन ही शिकायत दर्ज करा सकेंगी। केंद्र सरकार में करीब 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं। 2011 के जनगणना के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों में महिलाओं का प्रतिशत 10.93 है।

इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का महत्वपूर्ण संसाधन मानते हैं। ज्ञान-विज्ञान, खेलकूद, सूचना-प्रौद्योगिकी, कला-संगीत से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को प्रधानमंत्री अपनी कई महत्वपूर्ण योजना से जोड़ चुके हैं। कामकाजी से लेकर ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के कल्याण और उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार ने सतत प्रयास किये हैं। प्रधानमंत्री स्वयं किसी भी क्षेत्र में कुशल नेतृत्व या उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं की सराहना करके महिलाओं को प्रोत्साहित करने का कार्य करते हैं।

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