Home विचार प्रधानमंत्री के सामने विपक्ष असहाय क्यों हो जाता है?

प्रधानमंत्री के सामने विपक्ष असहाय क्यों हो जाता है?

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आज जब प्रधानमंत्री का लोकसभा में भाषण सुना तो मन गदगद हुआ, इसमें विपक्ष के आरोपों का जवाब था, तो सरकार की नीतियों की पुख्ता जानकारी थी। इसमें हास्य का पुट था तो व्यंग्य की तेज धार भी थी। इसमें देश को लेकर निश्चित संकल्प था तो बेहतर भविष्य के लिए दृढ़ आग्रह भी। लेकिन साथ ही साथ ये बातें भी जहन में आईं कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के सामने विपक्ष इतना असहाय क्यों हो जाता है। दरअसल इसकी कई वजहें हैं। अगर इस वजह को विपक्ष नहीं समझ पाया तो यकीन मानिए देश के लिए तो अच्छे दिन होंगे ही लेकिन विपक्ष के लिए और बुरे दिन शुरू होने वाले हैं। मैं सीधे-सीधे बिंदुवार अपनी बातें रख रहा हूं।

सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़ा करना पड़ा भारी– सर्जिकल स्ट्राइक देश के लिए गर्व का विषय था। सेना के लिए गर्व का विषय था। हर देशवासी इस पर फख्र कर रहा था। लेकिन जिस तरीके से कांग्रेस समेत बाकी दल मोदी विरोध में सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सवाल खड़ा करने लगे। यह विपक्ष पर भारी पड़ गया। जाहिर तौर पर इस साहसिक फैसले के लिए देश नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा है।

1. नोटबंदी जैसे ऐतिहासिक कदम पर भी विपक्ष का गैर जिम्मेदार रवैया– नोटबंदी एक ऐसा फैसला था, जिसके लिए किसी भी सरकार के पास जिगर होना चाहिए था। ये कदम किसी भी सरकार के लिए आत्मघाती साबित हो सकता था। लेकिन इस फैसले के लिए नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सिर्फ 50 दिन मांगे थे। पूरे देश को उनके वादों पर भरोसा था। लेकिन जिस तरीके से सभी विपक्षी पार्टियों (खासकर कांग्रेस, तृणमूल, आप, सपा, बसपा) ने पहले दिन से ही नरेंद्र मोदी को घेरना शुरू कर दिया, उससे इन पार्टियों के खिलाफ ही लोग खड़े हो गए। सच यह है कि तमाम मुश्किलों को झेलने के बाद भी आम जनता नोटबंदी को लेकर नरेंद्र मोदी के साथ ही खड़ी रही। हालत ये थी कि नेताओं के भारत बंद को आम जनता ने बेअसर कर दिया। 

2. विरोध मुद्दे पर नहीं, सिर्फ व्यक्तित्व पर- विपक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उसने अपना पूरा विरोध सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी पर केंद्रित कर रखा है, जबकि विरोध मुद्दों का होना चाहिए। इसकी वजह से कुछ पल के लिए तो विपक्षी नेता लाइमलाइट में आ जाते हैं, लेकिन जब हकीकत सामने आती है तो पोल खुल जाती है। राहुल गांधी के भूकंप वाले बयान को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है

3. कांग्रेस गांधी परिवार से आगे बढ़ने को तैयार नहीं– इस समय कांग्रेस की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि गांधी परिवार किसी दूसरे नेता को आगे बढ़ने नहीं देता है जबकि बाकी नेता गांधी परिवार के आगे पूरी तरह से बिछ गए हैं। यही वजह है कि हर मुद्दे पर कांग्रेस गांधी परिवार से आगे बढ़ ही नहीं पाती। इसे देश के लोकतंत्र के लिए भी दुर्भाग्य कहा जाएगा। इसलिए जब कांग्रेसी नेता देश के लिए योगदान की बात करते हैं तो वो नेहरू, इंदिरा और राजीव से आगे बढ़ नहीं पाते।

4. राहुल गांधी को ऐसे ही पप्पू नहीं कहा जाता– राहुल गांधी को पप्पू कहकर जो मजाक उड़ाया जाता है, उसे खुद ही वो बार-बार सार्थक कर देते हैं। भूकंप वाले बयान से अभी वो मुक्त भी नहीं हुए थे कि अचानक से स्कैम को विकास से जोड़ दिया। जाहिर तौर पर बिना तैयारी के ही जिस तरीके से वो अपनी बात कहते हैं वो खुद उनके लिए मुसीबत का सबब बन जाती है

5. सरकार की अच्छी योजनाओं का भी समर्थन नहीं करती कांग्रेस– कांग्रेस और बाकी कुछ विपक्षी पार्टियों की एक आदत यह है कि वह सरकार की अच्छी योजनाओं का भी स्वागत नहीं करती। जबकि कुछ योजनाएं ऐसी हैं जिसे इस देश का बच्चा बच्चा सपोर्ट करता है। चाहे स्वच्छ भारत अभियान हो या फिर मेक इन इंडिया– इस तरह के अभियान देशवासियों में गर्व की अनुभूति पैदा करते हैं। लेकिन जिस तरीके से राहुल गांधी स्वच्छ भारत अभियान का माखौल उड़ाते हैं उससे वो खुद जड़ से कटते जा रहे हैं।

-हरीश चन्द्र बर्णवाल

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