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गौभक्ति के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार्य नहींः मोदी

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गौभक्ति के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे के आदर्शों को मानने वाले व्यक्ति हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद गौरक्षा पर जब भी मोदीजी ने कुछ कहा, हमेशा अहिंसात्मक तरीके से गौरक्षा और गौभक्ति की बात की है। आज जिस तरह से गौरक्षा के नाम गुंडागर्दी और हिंसात्मक घटनाएं हो रही हैं, उनको लेकर पीएम मोदी ने बड़े ही साफ शब्दों में कहा कि गौरक्षा के निर्देश संविधान में है।

किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं
अहमदाबाद के साबरमती आश्रम के शताब्दी समारोह के उद्घाटन संबोधन में पीएम मोदी ने एक बार फिर गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि गौभक्ति के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार नहीं है। देश में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। हिंसा से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हुआ और न होगा।

हिन्दुस्तान की एकता तोड़ने में लगे हैं कुछ लोग 
एक साल पहले भी पीएम मोदी ने 7 अगस्त, 2016 को तेलंगाना के एक कार्यक्रम में कहा था कि कुछ लोग समाज को तहस-नहस करने में जुटे हैं, हिंदुस्तान की एकता को तोड़ने में लगे हैं। कुछ मुट्ठीभर लोग गौरक्षा के नाम पर समाज में तनाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।

हिंसा करने वाले की पहचान कर डोजियर तैयार करे राज्य सरकार
तेलंगाना के कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले 6 अगस्त, 2016 को पीएम मोदी पहली बार जनता से रूबरू हुए थे। इसे टाउन हॉल कार्यक्रम का नाम दिया गया था। यहां पीएम मोदी ने गाय के नाम पर हिंसा करने वालों को कड़ा संदेश दिया था। तब पीएम ने कहा था कि ‘ऐसे लोग दिन में गौरक्षा का चोला पहनकर घूमते हैं और रात में असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। उन्होंने तब राज्य सरकारों से गाय के नाम पर हिंसा करने वालों की पहचान करके डोजियर तैयार करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की थी। पीएम मोदी ने गौभक्ति करने और दिखाने के लिए हिंसा का सहारा लेने वालों को कभी तवज्जो नहीं दी। ऐसे लोगों के खिलाफ हमेशा से कानून सम्मत कार्रवाई करने की बात कही है क्योंकि उनका मानना है कि ऐसे लोग गुंडे हैं, असामाजिक तत्व हैं।

सीट को लेकर हुए विवाद को गौमांस से जोड़ा
गौरक्षा को लेकर पीएम मोदी के ताजे बयान को पिछले दिनों हुई एक मुस्लिम युवक की हत्या से जोड़कर देखा जा रहा है। मथुरा जा रही एक ट्रेन में सीट को लेकर हुए विवाद में मुस्लिम युवक की कुछ लोगों बेरहमी से पिटाई कर दी, जिसमें उसकी मौत हो गई। सीट को लेकर हुए विवाद को कुछ लोगों ने राजनीतिक रंग देने के लिए गौमांस से जोड़ दिया । जिस गुट की आंख में पीएम मोदी कांटा की तरह चुभ रहे हैं, उस गुट ने एक बार फिर से इस घटना के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधने का मौका निकालने की कोशिश की, हालांकि वो सफल नहीं हुए। 

देश को तोड़ने में लगा है एक पूरा गैंग
देश में एक ऐसी जमात है जो पूरी तरह गैंग की तरह काम करता है। मई 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के बाद से ये गैंग साजिश में सक्रिय रहा है। समय-समय पर इस गैंग के बैनर बदलते हैं, अभियानों के नाम बदलते हैं, चेहरा वही होता है। घटना चाहे किसी भी वजह से कहीं भी हो, ये गैंग उसमें से समाज को तोड़ने का तत्व क्या है, उसे ढूंढ-ढूंढकर निकालने में जुट जाते हैं। कभी सवर्ण-दलित तो कभी हिन्दू-मुस्लिम, कभी हिन्दू-ईसाई तो कभी कुछ और। जैसे ही उनको पीड़ित मुस्लिम दिखता है, अपने काम में लग जाते हैं। जब पीड़ित हिन्दू दिखता है, वहां आंख बंद कर लेते हैं। यह एक ट्रेंड के रूप में चलने लगा है, जो समाज के ताने-बाने के लिए खतरनाक है। आइए ऐसे माहौल को तैयार करने की साजिश में जुटे लोगों के पोस्ट जरिए देखते हैं कि वे लोग देश की एकता, अखंडता, सामाजिक सद्भाव और धार्मिक भाईचारे के कितने बड़े दुश्मन हैं।

तीस्ता सीतलवाड़, सामाजिक कार्यकर्ता

रामचंद्र गुहा, इतिहासकार

जौहर सिरकार, पूर्व सीईओ प्रसार भारती (रि.आईएएस)

राजदीप सरदेसाई, वरिष्ठ पत्रकार

उमर खालिद, जेएनयू छात्र

शबनम हाशमी, सामाजिक कार्यकर्ता

कविता कृष्णन, पोलित ब्यूरो सदस्य (सीपीआई, एमएल)

आशुतोष, नेता, आम आदमी पार्टी 

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