Home नरेंद्र मोदी विशेष पशु तस्करों पर पीएम मोदी ने की सर्जिकल स्ट्राइक

पशु तस्करों पर पीएम मोदी ने की सर्जिकल स्ट्राइक

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सभ्य समाज किसी के प्रति भी क्रूर व्यवहार करने की इजाजत नहीं देता, भले ही वह कोई पशु ही क्यों न हो, लेकिन देश में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के मांस और चमड़े के बाजार के लिए लाखों पशुओं को बेरहमी से अवैध बूचड़खानों में बेरहमी से काटा जाता है। इससे भी बड़ी क्रूरता है कि हर साल 15-20 लाख जानवरों को देश के हर कोने से ट्रकों में निर्ममता के साथ भरकर बांगलादेश सीमा से सटे राज्यों विशेषकर पश्चिम बंगाल तस्करी के लिए लाया जाता है। देश की पशु मंडियों में क्रूरता का यह नंगा नाच दशकों से चला आ रहा था, जिसे मोदी सरकार ने ‘पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण(पशुधन बाजार विनियमन) नियम, 2017’  को अधिसूचित करके क्रूरता के जड़ पर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है।

जरूरी थी पशु क्रूरता पर यह सर्जिकल स्ट्राइक 

23 मई 2017 को मोदी सरकार ने पशुओं पर हो रही क्रूरता को रोकने के लिए जिन नियमों से पशु बाजार व हाट पर सर्जिकल स्ट्राइक की है, उसके पीछे पशुओं की तस्करी से पैदा होने वाले लाखों करोड़ रुपये के काले धन और उनका देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल को रोकना भी था।

देश के पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम, जो राज्य सभा की गृह मामलों की स्टैडिंग कमेटी के अध्यक्ष हैं, ने 11 अप्रैल 2017 को अपनी 203 वीं पेश की गई रिपोर्ट में कहा कि भारत बांग्लादेश सीमा पर पशुओं की अवैध तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है, जिसे जड़ से खत्म करने के लिए तुरंत कदम उठाये जाने चाहिए। उसी रिपोर्ट का एक अंश—

भारत बांग्लादेश सीमा पर बड़े पैमाने पर तस्करी

भारत -बांगलादेश सीमा सबसे लंबी-4,096.7 किमी-है, यह पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में फैली हुई है। पश्चिम बंगाल में बांगलादेश की सीमा के दोनो ओर घनी आबादी है, और बहुत ही घुमावदार है। सीमा के 150 गज की दूरी पर 300 गांव हैं। अंतराष्ट्रीय सीमा पर घनी आबादी पशु तस्करों के काम को आसान बना देता है।

राज्यसभा में चिदंबरम कमेटी की रिपोर्ट कहती हैं कि सीमा सुरक्षा बल द्वारा तस्करी के लिए लाये गये जानवरों को पकड़े जाने के आंकड़ों से सीमा पर तस्करी की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार-

सुरक्षा विशेषज्ञों और समाजसेवी संस्थाओं के अनुसार सीमा सुरक्षा बल जितने पशुओं को जब्त करती है उसका 10-15 गुना जानवरों की तस्करी होती है। यदि देखा जाए तो  हर साल 15- 20 लाख पशु भारत से बांगलादेश जाते हैं।

बांगलादेश में भारत की सीमा से लगे बुचड़खाने हैं, जहां पर इन जानवरों की कटाई करके मांस , चमड़े आदि उपभोग के लिए तैयार किया जाता है। बांग्लादेश का मांस और  चमड़ा व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी तस्करी पर टिका ही।

सीमा पर पशु कैसे पहुंचते हैं

राज्यसभा की स्टैडिंग कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि हरियाणा, राजस्थान मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश,झारखंड,बिहार और पश्चिम बंगाल  से तस्करों के आदमी पशुओं को ट्रकों में भरकर चोरी छिपे राज्य के सीमावर्ती जिलों नाडिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण दीनजापुर, उत्तर दीनजापुर और शिलीगुड़ी के पशु हाटों में लेकर आते हैं। इन हाट बाजारों से पशुओं को अलग अलग ठिकानों पर पहुंचाने का  काम पुलिस के सहयोग से करते हैं। जानवरों को सीमा के करीब घनी आबादी में उन कुछ लोगों के पास पहुंचते हैं जो तस्करों के अपने आदमी हैं, ये रात के अंधेरे में पशुओं को बांगलादेश की सीमा के पार में पहुंचा देते हैं।

गैर सरकारी अनुमानों के अनुसार तस्कर जिन ऊंट, गाय, भैंसों को तीस हजार में खरीदते हैं उसे सीमा के पार 60 हजार में बेचते हैं और जानवरों को पार पहुंचाने वाले स्थानीय लोगों को हर जानवर पर 100 रुपये से कम नहीं मिलते.

इसी तरह से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने बड़े पैमाने पर काले धन का इस तस्करी में खेल होता है। इस धन का उपयोग एक विशेष धर्म के लोग देश विरोधी गतिविधियों में भी करते हैं। 

पश्चिम बंगाल में क्यों नहीं रुक पाती तस्करी     

पश्चिम बंगाल के जिलों में अंतराष्ट्रीय सीमा से आठ किलोमीटर के अंदर सारे पशु हाट लगते हैं जबकि ये पशु हाट सीमा के इतने करीब नहीं होने चाहिए और पश्चिम बंगाल ने अपने 1 सितंबर 2003 के उस शासनादेश के नियमों को लागू नहीं किया है, जिनमें इन हाट बाजारों को बंद करने की बात कही गई थी। रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए लिखा है-

मोदी का उचित कदम

देश में इस तरह पशुओं के साथ हो रही क्रूरता को खत्म करने और देश को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने वह कदम उठाया जिसे आजतक की सरकारें नहीं उठा सकीं।

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