Home चटपटी केजरीवाल के दिमाग का पोस्टमॉर्टम – 65% हिस्से में सिर्फ मोदी-मोदी

केजरीवाल के दिमाग का पोस्टमॉर्टम – 65% हिस्से में सिर्फ मोदी-मोदी

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गांव देहात में एक कहावत खूब लोकप्रिय है – ‘खाली दिमाग शैतान का’। यह कहावत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर सटीक बैठती है। क्योंकि दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री होने के बाद भी उन्होंने अपने पास कोई विभाग और मंत्रालय अपने पास रखा नहीं है। ऐसे में, उनके पास कोई काम नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि वो इस दौरान काम क्या करते हैं। हमने तमाम खोजबीन के बाद पाया कि वो या तो ट्वीटर पर सक्रिय हैं, या रैली करते हैं और बचे-खुचे समय में फिल्म देखते हैं। जिस तरीके से वो इन दिनों जहर उगर रहे हैं, ऐसे में हमने उनके दिमाग का पोस्टमॉर्टम करने का फैसला किया और आधार बनाया ट्वीटर। इस वर्चुअल दुनिया में ही उनकी सबसे ज्यादा भागीदारी है। आइये आपको इसके नतीजे दिखाते हैं

निष्कर्ष के लिए हमने पिछले पांच दिन के उनके ट्वीट को आधार बनाया। केजरीवाल ने पिछले पांच दिन यानि 12 दिसंबर, 2016 की दोपहर से लेकर 17 दिसंबर, 2016 की दोपहर तक 128 ट्वीट किए। इसमें से 106 को रिट्वीट किया। इसमें से 97.65 फीसदी ट्वीट नकारात्मक हैं। 65 फीसदी से अधिक ट्वीट में सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। 10 फीसदी ट्वीट पर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है, उस ट्वीट में भी परोक्ष रूप से मोदी ही टारगेट में हैं। कुछ ट्वीट आरबीआई, बैंकिंग सिस्टम, राजनीतिक पार्टियों के चंदे से लेकर पंजाब और गोवा चुनाव पर ट्वीट और रिट्वीट है। इसमें से सिर्फ तीन ट्वीट दिल्ली की जनता से जुड़ी है। उसमें भी एक में अपना ढोल पीट रहे हैं।

अब जरा ये सोचिए, जो शख्स खुद को आईआईटी का इंजीनियर बताता हो, लंबे समय तक आयकर विभाग में अधिकारी की भूमिका निभा चुके हो, अगर उसकी उसकी मानसिकता ऐसी हो तो उससे भी कुछ सवाल तो बनता है। केजरीवाल साहब, इतने अवसाद से भरे हुए क्यों हो? आखिर इतना जहर लाते कहां से भैया? स्रोत क्या है?

केजरीवाल साहब से पांच प्रश्न है जिसका जवाब उन्हें देना चाहिए-

1. कथित तौर पर काला धन और भ्रष्टाचार खिलाफ आंदोलन चलाते हुए साफ और स्वच्छ राजनीति करने वाले केजरीवाल जी, आप काला धन और भ्रष्टाचार के पक्ष में क्यों नजर आते हैं? 

2. दूसरे पार्टियों से चंदे की सूची और रिपोर्ट मांग रहे हैं, और अपनी पार्टी की साइट को अपडेट करने के बहाने दानदाताओं की सूची हटाई क्यों? 

3. दिल्ली सरकार के सभी विभागों के सभी अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने के वादे का क्या हुआ?  

4. वीआईपी कल्चर से मुक्त प्रशासनिक वादा याद है या भूल गए?

5. जब सत्ता में नहीं थे तो 88 हजार रुपए भी विधायकों का वेतन अधिक लगता था। वेतन करने की बात करने वाले केजरीवाल जी आपके राज में 400 गुणा वेतन बढ़ा। क्यूं बढ़ा? 

7. नए स्कूल, कॉलेज बनाने के वादे का क्या हुआ? 

8. महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अलग से एक टास्क फोर्स बनाने के वादे को कब पूरा करेंगे? इसके लिए तो शीला दीक्षित का राग मत अलापिए?

9. इतने वादाखिलाफी करने के बाद भी केजरीवाल जी खुद को ओनेस्ट पर्सन क्यों मानते हैं? 

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