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नोटबंदी से पड़ी भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बुनियाद!

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पंजाब नेशनल बैंक को 11 हजार 400 करोड़ का चूना लगाने वाले नीरव मोदी के बारे में एक और खुलासा हुआ है। वह देश को कई हजार करोड़ का और झटका देने वाला था, लेकिन 08 नवंबर, 2016 को लागू की गई नोटबंदी ने उनका सारा खेल बिगाड़ दिया।

नोटबंदी के कारण सामने आया नीरव का फर्जीवाड़ा
नीरव का फर्जीवाड़ा 2008 से ही शुरू हो गया था। 2011 में इसने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करना शुरू किया। दरअसल वह लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) की अवधि बढ़वा कर बाजार से पैसे जुटा लेता था और समय बीतने से पहले ही इंपोर्ट बिल का भुगतान कर देता था। इसलिए बैंक की बैलेंस शीट में यह फर्जीवाड़ा दिखता ही नहीं था और वह किसी की पकड़ में नहीं आया।

दरअसल नीरव मोदी के गहने बेहद महंगे होते हैं, इसलिए नोटबंदी के बाद उनकी बिक्री पर काफी असर पड़ा और वह अपने विदेशी आपूर्तिकर्ता के बिल का भुगतान नहीं कर पाया। ऐसा होने पर उनके आपूर्तिकर्ता ने पीएनबी से जारी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग को भुना लिया और उनकी पोल खुल गई।

परिवार सहित विदेश भागना चाहता था नीरव मोदी
जांच के बाद ये तथ्य भी सामने आ रहा है कि नीरव मोदी पूरे परिवार समेत देश छोड़ना चाहता था, इसलिए पहले उसने अपने भाई को बेल्जियम की नागरिकता दिलाई और दोनों भाई ने फिर देश छोड़ दिया, लेकिन उसकी पत्नी मुंबई में थी और जांच एजेंसियों, बैंक और मीडिया की गतिविधियों की जानकारी नीरव मोदी को देती रही, बाद में वह भी बच्चे के साथ देश छोड़कर चली गई। नीरव की पत्नी के पास अमेरिका की नागरिकता है। इससे पहले नीरव ने कई कंपनियों में फर्जी निवेश दिखाया, उसने पहले फंड को भारत से मकाऊ फिर बीजिंग, हांगकांग, सिंगापुर और कुआलामपुर भेजा।

इन बिंदुओं से जानिये नोटबंदी के फायदे :-

ट्रेस आउट हो सका कालाधन
नोटबंदी के बाद 99 प्रतिशत नकदी बैंकिंग सिस्टम में आ गए हैं। इसका फायदा यह है कि अब काले धन का पता लगाना काफी आसान हो गया है। इस निर्णय के बाद 17.73 लाख ऐसे संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है जिनमें पैन कार्ड धारकों के प्रोफाइल नोटबंदी के पहले के प्रोफाइल से मेल नहीं खाते हैं।

इकोनॉमी सिस्टम में स्वच्छता
नोटबंदी के बाद चार लाख लाख संदिग्ध कंपनियां जांच एजेंसियों के राडार पर आईं। इनमें से अधिकतर कालाधन को छिपाने और कर चोरी के उद्देश्य से संचालित की जा रहीं थी। इनमें से 2.24 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है।

डिजिटल हो रही अर्थव्यवस्था
नोटबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था लेस कैश सोसाइटी की ओर अग्रसर है। डिजिटल ट्रांजेक्शन्स 300 प्रतिशत तक बढ़े है। कैशलेस लेनदेन लोगों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ हर लेनदेन से काले धन को हटाते हुए क्लीन इकोनॉमी बनाने में भी मददगार साबित हुआ है।

कर अनुपालन में हुई बढ़ोतरी
नोटबंदी के बाद देश के टैक्स सिस्टम से 56 लाख नए करदाता जुड़े हैं। वहीं, पिछले साल के मुकाबले टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में 9.9 प्रतिशत से 26.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 2015-16 में 66.53 लाख थी, जो 2016-17 में बढ़कर 84.21 लाख हो गई।

फॉर्मल हो रही इकोनॉमी
नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें सामाजिक सुरक्षा से उनके अधिकारों के संरक्षण दिये जा रहे हैं। 50 लाख श्रमिकों के बैंक खाते खोले गए, एक करोड़ से अधिक श्रमिकों को प्रोविडेंट फंड का लाभ मिलने लगा है और ESIC में 1.3 करोड़ श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन भी किया गया है।

जाली नोटों पर कसा शिकंजा
नोटबंदी के बाद जाली नोटों की बाजार में उपलब्धता बेहद कम हो गई है। रिजर्व बैंक ने 762 हजार नकली नोटों का पता लगाया था इनमें से ज्यादातर नकली नोट्स 500 रुपये के 41 प्रतिशत और 1000 के 33 प्रतिशत थे। नोटबंदी के बाद ही ये पता लग पाया कि पांच सौ के हर 10 लाख नोट में औसत 7 और 1000 के हर 10 लाख नोटों में औसत 19 नोट नकली थे।

बैंकों के ब्याज दरों में कमी
नोटबंदी के बाद बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में करीब एक प्रतिशत तक कमी की है। नोटबंदी के बाद 1 जनवरी, 2017 को भारतीय स्टेट बैंक ने आश्चर्यजनक रूप से धन की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में 0.9 प्रतिशत कटौती की थी। इसके बाद दूसरे बैंकों ने भी ऐसा ही किया जिससे आम लोगों को काफी राहत मिली है।

रियल एस्टेट के लिए वरदान
रियल एस्टेट क्षेत्र कालेधन के ट्रांजेक्शन्स के लिए बेहद ही आसान जरिया बन गया था। लेकिन नोटबंदी के निर्णय के बाद आम लोगों के लिए घर खरीदना बहुत सस्ता हो गया। दो लाख रुपये से अधिक के कैस ट्रांजेक्शन पर रोक लगने के बाद प्रॉपर्टी की कीमतों में 25 से 40 प्रतिशत तक कमी आ चुकी है। नोटबंदी के कारण रियल एस्टेट सेक्टर अब अधिक पारदर्शी, संगठित, भरोसेमंद और खरीददारों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।

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