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क्या NDTV बंद हो रहा है ? ITAT के फैसले के बाद भारी पैमाने पर छंटनी का मतलब क्या है ?

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खबरों के मुताबिक NDTV से एक ही झटके में देशभर में कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। NDTV की ओर से सफाई दी जा रही है कि कंपनी धीरे-धीरे मोबाइल जर्नलिज्म की ओर बढ़ रही है, इसीलिए कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। लेकिन ऐसी चर्चा है कि असल में कंपनी पर आयकर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का जो करीब 642 करोड़ रुपये के गोरखधंधे का आरोप है, उसी के चलते मेहनतकश कर्मचारियों की पेट पर लात मारी जा रही है। आशंकाएं जताई जाने लगी हैं कि कहीं NDTV ने अपना कारोबार समेटना तो नहीं शुरू कर दिया है?

NDTV के बंद होने की अटकलें क्यों हैं ?
अंग्रेजी पोर्टल आउटलुक इंडिया में छपी खबर से NDTV और उसके प्रमोटर डॉ प्रणय रॉय के सामने खड़े वित्तीय संकट की आशंका बढ़ गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल जर्नलिज्म में शिफ्टिंग के नाम पर कंपनी ने देशभर से करीब 70 कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है। जानकारी के अनुसार इनमें आधे के करीब कैमरापर्सन हैं, जबकि बाकी तकनीकी कर्मचारी। खबरों के अनुसार कंपनी में छंटनी की ये प्रक्रिया अभी जारी है और इसको लेकर कर्मचारियों में एक दहशत का माहौल बन गया है। कर्मचारियों में ये सोचकर हड़कंप मचा हुआ है कि कहीं अगला नंबर उसी का न आ जाय। भारी पैमाने पर छंटनी के चलते ही आशंका जताई जाने लगी है कि कहीं ये प्रक्रिया NDTV के बंद होने की शुरुआत तो नहीं हैं ?

NDTV के दावों में कितना दम ?
वैसे NDTV ने दावा किया है कि ITAT के फैसले का इन छंटनियों से कोई लेना-देना नहीं है और ये प्रक्रिया सिर्फ कारोबार को नये सिरे से व्यवस्थित करने के लिये किया जा रहा है। कंपनी की ओर से धीरे-धीरे मोबाइल जर्नलिज्म की ओर शिफ्ट होने की भी दलील दी जा रही है। लेकिन अभी हाल ही में Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने जिस तरह से लगभग 642 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के केस में प्रणय रॉय और NDTV पर आयकर के दावों की पुष्टि की है, उससे कंपनी की आंतरिक हालत को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।

ITAT के फैसले से खुल चुकी है पोल
दरअसल Income Tax Appellate Tribunal ने 14 जुलाई, 2017 को दिये अपने आदेश में NDTV की अपील को ठुकराते हुए टैक्स आकलन अधिकारियों की जांच को पूरी तरह से सही पाये हैं। ITAT ने आकलन अधिकारी की उस जांच पर मुहर लगाई दी है कि NDTV ने 642.54 करोड़ रुपये के कालेधन को अपनी कागजी सहायक कंपियों के माध्यम से नीदरलैंड में लगाया। इस आदेश के अनुसार प्रणय रॉय निजी तौर पर इस धोखाधड़ी में शामिल रहे हैं।

फोटो सौजन्य

NDTV को लेकर अटकलें बेवजह नहीं हैं
वैसे Income Tax Appellate Tribunal के आदेश से दागदार साबित होने के बावजूद NDTV और उसके प्रमोटर अपने को बचाने के लिए तरह-तरह की दलीलें दे रहे हैं। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देने की भी बात कही है। लेकिन, तथ्य ये है कि NDTV से छंटनी की खबरें ITAT के फैसले के बाद ही क्यों आई हैं? कंपनी पर लगभग 642 करोड़ रुपये की देनदारी और संभावित जुर्माने का मामला बनने की भी आशंका है। अगर ये आशंका सही साबित हुई तो कंपनी का वित्तीय संकट और बढ़ सकता है। यही वजह है कि इन अटकलों को और ज्यादा दम मिल रहा है कि शायद NDTV ने अपना कारोबार समेटना शुरू कर दिया है !

 

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