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राहुल गांधी के विदेशी दौरों का राज

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देश की 543 सदस्यों की लोकसभा में 48 सदस्यों वाले सबसे बड़े विपक्षी दल के अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। राहुल, इसी राजनीतिक ताकत से कांग्रेस की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और अक्सर वह किसी को बिना बताए विदेशी यात्राओं पर निकल जाते हैं।

2014 से राहुल गांधी ने चौदह बार विदेश यात्रा की है, यानि हर चौथे माह वह विदेश में होते हैं। चुनौतियों से घिरी कांग्रेस को बीच मंझधार में छोड़कर इन विदेश यात्राओं पर जाने का आखिर रहस्य क्या है। आइये, राहुल गांधी की इन विदेशी यात्राओं के राज के बारे में जानते हैं-

राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं का राज-1 राहुल गांधी अपनी विदेशी यात्राओं के बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताते, यहां तक की सरकार को भी सूचित नहीं करते। वह ये यात्राएं चोरी छुपे करते हैं।
पिछले चार साल के आंकड़े बताते हैं कि जिन चौदह विदेशी यात्राओं पर राहुल गये, उनमें से 9 यात्राओं पर वह किस देश की यात्रा पर गये, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं दी। अगस्त 2017 में बनासकांठा की घटना पर लोक सभा में जवाब देते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने पिछले दो साल में अपनी 6 विदेश यात्राओं के दौरान SPG सुरक्षा लेने से इंकार कर दिया, आखिर राहुल अपनी विदेशी यात्राओं के दौरान क्या छुपाना चाहते हैं?

राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं का राज-2 कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ज्यादातर इटली की यात्रा करते हैं। इटली में मां सोनिया गांधी का पूरा परिवार रहता है। राहुल उनसे मिलने के लिए अक्सर बिना बताये इटली पहुंच जाते है, भले ही देश में कांग्रेस को राहुल की सख्त जरूरत हो। हाल ही में 01 मार्च को, होली के ठीक एक दिन पहले, अपनी नानी को सरप्राइस देने के लिए इटली चल दिए। लेकिन इस बार इटली जाने की बात को Twitter पर न जाने क्यों शेयर करते हुए लिखा-

राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं का राज-3 राहुल गांधी की विदेश यात्राएं जिनके बारे में वे जनता को बताते हैं, अगर उन देशों पर नजर डाली जाए तो निष्कर्ष निकलता है कि राहुल ईसाई और मुस्लिम बहुल देशों की यात्राएं करते हैं। साल 2018 में तीन दिनों की उनकी पहली विदेश यात्रा बहरीन की थी, जो 08 जनवरी को शुरु हुई। 08 मार्च से एक बार फिर वह दो देशों की यात्रा पर सबसे पहले मलेशिया पहुंचे है। राहुल की वे यात्राएं, जिनके बारे में देश की जनता को बताया गया-

इटली: 01 मार्च 2018: को अपनी नानी को सरप्राइस देने के लिए गये। इसी समय 02 मार्च को देश में होली मनायी जा रही थी और 03 मार्च को त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के परिणाम आये, जिसमें कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली।
बहरीन: 08 जनवरी 2018- को बहरीन की तीन दिनों की यात्रा की। इस दौरान सुल्तान से मुलाकात के अलावा भारतीयों से भी मुलाकात की।
अमेरिका: 11 सितंबर 2017: गुजरात चुनावों से ठीक पहले, 15 दिनों की अमेरिका यात्रा के दौरान कई व्यक्तियों से मिले और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में वंशवाद को सही ठहराने वाला भाषण दिया।
ओस्लो , नॉर्वेः 25 अगस्त, 2017: राहुल गांधी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो चले गए। ये दौरा उस वक्त हुआ जब 27 अगस्त को बिहार में विपक्षी एकता की ताकत दिखाने को लालू प्रसाद रैली कर रहे थे। इसी दौर में चीन के साथ डोकलाम विवाद भी चल रहा था ।
इटली : 13 जून,2017: जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था और कांग्रेस पार्टी हमलावर थी तो राहुल गांधी इटली नानी से मिलने चले गए। 28 जून, 2017 को राष्ट्रपति पद के लिए नामाकंन करने गई मीरा कुमार के साथ भी राहुल गांधी मौजूद नहीं थे। कांग्रेस ने उनका फौरन बचाव किया और कहा कि परिवार के बुजुर्गों की देखभाल करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।

राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं का राज-4 राहुल गांधी अपने विदेश यात्राओं पर गुपचुप तरीकों से क्या करते हैं, इसकी जानकारी खोजी पत्रकार लगा ही लेते हैं। इसी तरह के खोजी पत्रकारों ने जानकारी दी कि राहुल गांधी 57 दिनों के अज्ञातवास में 16 फरवरी 2015 से 16 अप्रैल 2015 के दौरान कहां -कहां रहे। पत्रकारों ने कुछ जानकारी एकत्र कर ली लेकिन राहुल ने इस दौरे के बारे में आजतक कुछ भी किसी को नहीं बताया। आइये, देखते हैं कि इन 57 दिनों में राहुल कहां-कहां रहे-

• 16 फरवरी को दिल्ली से बैंकॉक के लिए उड़ान भरा
• 17 फरवरी को बैंकॉक से कंबोडिया गये और वहां 11 दिनों तक ठहरे
• 28 फरवरी को वापस बैंकॉक आ गए
• अगले दिन म्यांमार पहुंच गये और वहां लगातार 21 दिनों तक विश्राम किया
• 22 मार्च को वापस थाइलैंड पहुंचे और अयुथ्या बौद्ध केन्द्र में 9 दिन रहे
• 31 मार्च को वियतनाम पहुंचे और 12 अप्रैल तक वहीं ठहरे
• 12 अप्रैल को एक बार फिर बैंकॉक पहुंच गये और 16 अप्रैल तक वहीं आराम किया। फिर वापस दिल्ली लौट आये।

 

राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं का राज-5 राहुल गांधी विदेश की यात्राओं पर ऐसे समय जाते हैं, जब देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी को उनकी सबसे अधिक जरूरत होती है। राहुल गांधी का इन विदेशी यात्राओं पर जाने से यह लगता है जैसे वह चुनौतियों को पीठ दिखाकर भाग रहे हैं। आइये, आपको बताते हैं कब कब राहुल गांधी पीठ दिखाकर भागे-

 यात्राऐं वर्ष कांग्रेस को राहुल की जरुरत थी
इटली 01 मार्च, 2018 02 मार्च को देश में होली मनायी जा रही थी और 03 मार्च को त्रिपुरा, नगालैंड व मेघालय के परिणाम आये, जिसमें कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली।
ओस्लो, नॉर्वे     25 अगस्त, 2017 जब 27 अगस्त को बिहार में विपक्षी दलों की एकता दिखाने के लिए लालू प्रसाद रैली कर रहे थे और चीन के साथ डोकलाम विवाद भी चल रहा था 
इटली 13 जून, 2017 जब मंदसौर में कांग्रेस का किसानों का लेकर आंदोलन चल रहा था और राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस की ओर से मीरा कुमार को नामाकंन करना था।
     
अज्ञात देश 31 दिसंबर, 2016 जब कांग्रेस पार्टी नोटबंदी को लेकर विरोध कार्यक्रमों की धार तेज कर रही थी औऱ इसी समय पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों का दौर था
अज्ञात देश 12 परवरी, 2015 बजट सत्र के दौरान अचानक 57 दिनों के लिए देश से बाहर चले गए 
अज्ञात देश दिसंबर, 2014 पार्टी की  स्थापना दिवस पर भी विदेश दौरे पर थे।

 

राहुल गांधी को विदेश यात्राओं पर जाने का पूरा अधिकार है लेकिन लोकतंत्र में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता होने के नाते उनकी जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ जाती है। इस जवाबदेही के उत्तरदायित्व को निभाने से राहुल गांधी कतराते हैं। क्योंकि गांधी परिवार का लंबे समय से सत्ता में बने रहने से  संस्कृति कुछ ऐसी हो गई है कि परिवार अपने को राजा और देश की जनता को प्रजा समझकर व्यवहार करता है। 2004 से 2014 तक देश की जनता ने गांधी परिवार के इस संस्कृति को झेला है, उसी संस्कृति के राहुल गांधी आज भी वशीभूत हैं।

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