Home समाचार सफल रही है मोदी की कश्मीर नीति-आतंकवाद को हर स्तर पर जवाब

सफल रही है मोदी की कश्मीर नीति-आतंकवाद को हर स्तर पर जवाब

पीएम मोदी की नीतियों से कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम

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कश्मीर को लेकर आक्रामक नीति का नतीजा  निकलने लगा है। सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से घुसपैठ में कमी आयी है तो हिज्बुल मुजाहिदीन के एक-एक कमांडरों को ढेर कर दिया गया है। वहीं, अब पत्थरबाजों को मिल रही फंडिंग के स्रोत पर भी छापे पड़े हैं। अलगाववादियों को फंडिंग की जांच चल रही है। इन सब कार्रवाईयों के बीच विकास की गाड़ी को भी मोदी सरकार स्थानीय महबूबा सरकार की मदद से आगे बढ़ा रही है। अब खुद पाकिस्तान भी कश्मीर के राग अलापने के मामले में अलग-थलग पड़ चुका है। आतंकवाद को विश्वस्तर पर जवाब दिया जा रहा है।

बीते दिनों आतंकियों पर सख्ती, एक के बाद एक एनकाउंटर, पत्थरबाजों पर नकेल और अलगावादियों का पाकिस्तानी कनेक्शन के जरिये टेरर फंडिंग का खुलासा… ये सब मोदी सरकार की कश्मीर नीति की स्पष्टता दिखाती है। नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट – 1 (28 सितंबर, 2016) हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट- 2 (22 मई, 2017) जिसमें पाकिस्तानी बंकरों को नष्ट करते हुए वीडियो जारी किया गया था… ये सब मोदी सरकार की कश्मीर नीति का हिस्सा है। ये साफ है कि कश्मीर के हालात पर आक्रमणकारियों के आगे सर झुकाकर नहीं बल्कि तनकर खड़े होने की नीति है पीएम मोदी की कश्मीर नीति।


बदला-बदला सा कश्मीर का माहौल
कश्मीर में विरोध प्रदर्शन तेज हुए सेना को कानून-व्यवस्था के नियंत्रण के लिए उतार दिया गया। घुसपैठ की कोशिशें बढ़ीं तो सही लेकिन सीमा पर ही घुसपैठियों को मार गिराया गया। अलगावादियों से कोई बात नहीं की नीति तो सरकार ने पहले ही साफ कर रखी है, वहीं घुसपैठ में मददगार सैन्य चौकियों पर सख्ती से प्रहार जारी है। इस बीच कश्मीर घाटी के भीतर आतंकियों के मॉड्यूल का खुलासा हो रहा है। यानी किसी भी दृष्टि से पीएम मोदी कश्मीर में आतंकी कार्रवाईयों को बर्दाश्त नहीं करने जा रही है। जाहिर है कश्मीर पर मोदी सरकार की नीति पहले की सरकारों से साफ अलग है।


बॉर्डर पर सेना को मिली कमान
भारतीय सेना ने कुछ दिन पहले ही जानकारी दी कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ में मददगार नौगाम और नौशेरा में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को ध्वस्त कर दिया गया। पहली बार सेना ने कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया। जाहिर है ये भारत की सैन्य कूटनीति के बदलाव की कहानी कहती है। पिछले साल सर्जिकल स्ट्राइक का खुला ऐलान और अब पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त करने का वीडियो जारी कर भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की परोक्ष युद्ध वाली नीति अब नहीं चलने वाली।

पत्थरबाजों पर नकेल कसने की छूट
कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी की साजिश की सच्चाई दुनिया के सामने पहले ही आ चुकी है। ये साफ है कि पत्थरबाजों को अलगावादी नेताओं द्वारा फंडिंग की जाती है और बेरोजगार नौजवानों को गुमराह कर पत्थरबाजी करवाई जाती है। पाकिस्तान इसके लिए बजाप्ता फंडिंग भी करता है। लेकिन अब अलगाववादियों पर एक्शन के साथ पत्थरबाजों के खिलाफ एक्शन की भी छूट है। पत्थरबाज को जीप के बोनट पर बांधने वाले मेजर गोगोई को सम्मान देने जैसे कदम मोदी सरकार की नीति को साफ बता रहे हैं।

15 साल बाद कश्मीर में ‘कासो’ अभियान
कश्मीर में सक्रिय आतंकी तत्वों को घेरने के लिए फिर से कार्डन एंड सर्च ऑपरेशन यानि ‘कासो’ अभियान शुरू किया गया है। 15 साल बाद फिस से शुरू किए गए इस अभियान के तहत शोपियां, त्राल समेत आतंकवादियों की सक्रियता वाले इलाकों में घेरकर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। कुलगाम के जंगलों में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर सेना ने साफ कर दिया है कि अब आतंकवाद को ठिकाना मिलने नहीं दिया जाएगा।

‘आतंक’ के खिलाफ गोलियों की गिनती नहीं
मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि आतंक को चाहे देश के भीतर से समर्थन हो या फिर बाहर से सख्त एक्शन होते रहेंगे। बीते एक महीने में एक के बाद एक 18 आतंकियों को मारा जा चुका है। इतना ही नहीं पाकिस्तान की हिंसात्मक कार्रवाई का जवाब भी भारत की तरफ से उसी अंदाज में दिया जा रहा है। बीते दिनों गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी कि अगर पाकिस्तान या आतंकी एक गोली चलाए तो भारत की तरफ से गोलियों की गिनती न हो।

टेरर फंडिंग पर बुरे फंसे अलगाववादी
पाकिस्तान की फंडिंग से घाटी में पत्थरबाजी कराने की अलगाववादियों की रणनीति का एक निजी चैनल पर खुलासा होने के बाद कई अलगाववादी नेता एनआईए की जांच के दायरे में आ गए हैं। एनआईए अलगाववादी नेताओें से पूछताछ कर रही है और केंद्र ने कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। उनके कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं, हवाला के खुलासे किए जा रहे हैं और अलगाववादी नेताओं के चेहरे से नकाब उतारे जा रहे हैं।


अलगाववादियों से बात नहीं की नीति
मोदी सरकार ने पहले साल ही साफ कर दिया था कि देश विरोधी तत्वों से वो कोई बात नहीं करेगी। ये संदेश कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के लिए था। पाकिस्तानी उच्चायुक्त के डिनर में अलगाववादी नेताओं को न्योता देने के मामले पर भी मोदी सरकार ने साफ विरोध कर पाकिस्तान को कश्मीर मामले में हस्तक्षेप से दूर रहने का संदेश दे दिया था। देश विरोधियों को साफ संदेश है कि पहले देश की मुख्यधारा में रहिए तभी कोई बात होगी।

आतंकवाद का मुखौटा उतारने की मोदी नीति
पाकिस्तान जहां कश्मीर के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिशों को भारत ने जहां विफल किया है वहीं आतंकवाद पर पाकिस्तान की दोहरी नीति का खुलासा भी किया है। बीते 26 मई को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब के दौरे पर थे तो नवाज शरीफ की मौजूदगी में भारत को आतंकवाद से पीड़ित देश बताया और पाकिस्तान जैसे आतंकवाद के मददगार देशों को सीधी चेतावनी दी।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का आक्रामक रुख
बीते वर्ष विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर पिछले साल खुला हमला बोला था। अमेरिकी सीनेट ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बार माना है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी तत्वों को मिल रहे मदद के कारण भारत अब सबक सिखाने की कार्रवाई करने की तैयारी में है। ब्रिक्स हो या जी-20 जैसे कोई भी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, भारत ने पाकिस्तान को एक्सपोज किया है।


सार्क में भी अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान
वर्ष 2016 में पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में जब भारत ने शामिल नहीं होने की घोषणा की तो संगठन के अन्य कई देशों, जैसे – श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान ने भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। हालांकि पाकिस्तान ने अन्य देशों को बुलाने की कोशिश की लेकिन वो विफल रहा और अंत में सार्क सम्मेलन रद्द करने को मजबूर होना पड़ा। भारत का ये विरोध पाकिस्तान की आतंकवाद परस्त नीति के विरोध में थी।

कांग्रेस की ‘कुत्सित’ नीति से अलग मोदी नीति
मोदी सरकार की कश्मीर नीति के विरोध में कांग्रेस ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में एक वर्किंग ग्रुप बनाया है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार के तीन साल में कश्मीर में शांति के लिए मनमोहन सरकार के प्रयास भी बेकार हो गए। लेकिन ये कौन नहीं जानता कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के वक्त से ही कांग्रेस की कश्मीर नीति सवालों में रही है। हुर्रियत जैसे संगठनों को प्रश्रय भी तो कांग्रेस की ही देन है। कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कुत्सित नीति भी तो कांग्रेस की ही रही है। ऐसे में अलगावादियों से बात नहीं, आतंक पर सख्ती जैसे कदम मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विशेषता हैं।

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