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मोदी से हो रही है इन्दिरा की तुलना

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मीडिया में दो तस्वीरें एक साथ वायरल हो रही हैं। एक तस्वीर है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिनके सामने कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अपनी टीम के साथ प्रधानमंत्री के सामने कुर्सियों पर बैठे हैं। कोई खड़ा नहीं है।

दूसरी तस्वीर है तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की, जिनके सामने उनकी ही पार्टी के तमाम वरिष्ठ और बुजुर्ग नेता खड़े हैं। कुर्सियां तक नहीं हैं।

देश के दो प्रधानमंत्रियों की तुलना हो रही है इन तस्वीरों में। इंदिरा गांधी और नरेन्द्र मोदी के बीच अचानक इस तुलना की वजह आप भी समझ रहे होंगे। तस्वीरों पर सोशल मीडिया में जिन बिन्दुओं पर चर्चा हो रही है वो हैं-

  • नरेन्द्र मोदी अपने विरोधियों को भी आदर देते हैं। सामने कुर्सियां देकर बिठाते हैं।
  • इंदिरा गांधी के सामने कुर्सियां ही नहीं होती। उनसे मिलने आने वाले खड़े होकर ही उनसे बात करते हैं।
  • नरेन्द्र मोदी के सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं- सब बराबर है।
  • वहीं इंदिरा गांधी के सामने उनसे उम्र में बड़े कांग्रेसी नेता भी मुखातिब हैं।
  • नरेन्द्र मोदी के सामने बैठे हैं राहुल गांधी, जिनका परिवार देश पर शासन करता आया है।
  • गांधी परिवार के युवराज कुर्सी के दूसरी तरफ है, तो पीएम की कुर्सी पर है एक चायवाला।

इन तस्वीरों के बीच जो टिप्पणियां वायरल हैं उनमें से एक है कि एक चाय वाले से गांधी परिवार भी मांगने वाली मुद्रा में खड़ा होने को मजबूर हुआ है। दूसरी टिप्पणी है कि ये लोकतंत्र की ताकत है कि जो सत्ता को अपनी जागीर समझते थे, वो सत्ता से बेदखल हैं और जिन्होंने कभी पीएम का सपना नहीं देखा होगा, वो चायवाला पीएम है। एक अन्य की टिप्पणी है कि ताकत का गुमान नहीं किसी को नहीं करना चाहिए। वक्त सबसे बड़ा होता है। दो प्रधानमंत्रियों की तस्वीरों से ये तुलना कितनी जायज है, ये कहना तो मुश्किल है लेकिन अभिव्यक्ति जनता की है, जनता कर रही है ये तुलना।

एक कार्टून भी सोशल मीडिया में वायरल है जिसमें दो तस्वीरें एक साथ दिखाई गयी हैं। पहली तस्वीर 1971 की है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने कालाधन की विकराल समस्या मुंह बाए खड़ी थी लेकिन एक्शन इसलिए नहीं हुआ क्योंकि सरकार गिर जाने और चुनाव का डर सता रहा था। तब इंदिरा के नेतृत्व में हिन्दुस्तान ने पाकिस्तान को रौंद डाला था और बांग्लादेश का जन्म हुआ। डिमोनेटाइजेशन की जरूरत तब भी बताई गयी थी, लेकिन इन्दिरा गांधी ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया।

इसी कार्टून में दूसरी तस्वीर 2016 की है जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकराल बन चुके कालाधन की समस्या पर करारी चोट की है। उनके सामने इस वजह से सरकार गिरने या चुनाव होने का कोई खतरा नहीं है। पाकिस्तान पर भी नरेन्द्र मोदी चढ़े हुए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक की उपलब्धि के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कार्टून में कहते दिखाया गया है कि यही डिमोनेटाइजेशन 1971 में भी होना चाहिए था।

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