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पीएम मोदी की रणनीति में घिरता पाकिस्तान, लगा एक और झटका

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक रणनीति रंग ला रही है। पीएम मोदी की कूटनीति में पाकिस्तान घिरता जा रहा है। प्रधानमंत्री के प्रयासों के चलते अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवादियों के पनाहगार वाले देशों की सूची में डाल दिया है। इसके पहले पिछले ही महीने अमेरिका ने आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन पर पाबंदी लगाया था। पीएम मोदी की सूझबूझ भरी कूटनीति से पाकिस्तान के हौंसले पस्त हो रहे हैं। मोदी नीति के कारण आजकल पाकिस्तान को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं।

पाकिस्तान में परियोजना लगाने पर पुनर्विचार
पाकिस्तान को ताजा झटका दक्षिण कोरिया से लगा है। दक्षिण कोरिया अब पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद की पनबिजली परियोजना से हाथ खींच सकता है। दक्षिण कोरिया की डायलिम इंडस्ट्रियल कंपनी लिमिटेड ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपने निवेश पर पुर्नविचार करना शुरू कर दिया है। पीओक के मुजफ्फराबाद में झेलम तट पर 500 मेगावॉट के चकोती हट्टियन हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट से डायलिम बाहर होने की सोच रही है। डायलिम इस प्रोजेक्ट को विकसित करने वाली कंपनियों के समूह की सबसे बड़ी कंपनी है।

इन्होंने भी जताई असमर्थता
भारत की कूटनीति का यह असर है कि पीओके में सिर्फ डायलिम ही नहीं उसके साथ ही एशियन डेवलपमेंट बैंक, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन और एक्जिम बैंक ऑफ कोरिया ने भी निवेश को लेकर असमर्थता जताई है। खबर है कि एक और कोरियाई कंपनी निवेश को लेकर उत्साह नहीं दिखा रही है। इसका असर कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर भी पड़ सकता है।

भारत का साफ कहना है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान का इस पर अवैध कब्जा है। इसी को लेकर भारत शुरू से चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर पर अपना विरोध जताता रहा है। हाल ये है कि मोदी नीति के कारण पाकिस्तान दुनिया भर में अलग-थलग पड़ता जा रहा है। जबकि भारत को पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद पर दुनियाभर में समर्थन मिलता जा रहा है।

सर्जिकल स्ट्राइक से इरादा साफ कर चुके हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी सूरत में आतंकवाद को बर्दाश्त करने के लिये तैयार नहीं होंगे, ये बात पिछले साल पाकिस्तान में भारतीय सेना द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक से ही साफ हो चुका है। पीएम के इस एक्शन से पाकिस्तान की हेकड़ी तो गुम हो ही गई, उसको संरक्षण देने वाले देशों के कान भी खड़े हो गये। अमेरिका भी जान गया कि अब निहित स्वार्थों में पाकिस्तान को पालना-पोसना संभव नहीं। अमेरिका को लग गया कि भारत की सुरक्षा के लिए पीएम मोदी पाकिस्तान को उसी की भाषा में ठोस जवाब देने में सक्षम हैं। अब पाकिस्तान को आतंकी देशों की लिस्ट में रखने का जो अमेरिका ने फैसला लिया है, इसमें पीएम मोदी के इस छवि ने बहुत ही बड़ा रोल निभाया है।

कश्मीर में भी सख्त रणनीति
पीएम मोदी पाकिस्तान की ही नकेल नहीं कस रहे, उनकी नीति से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को भी चुनचुन कर ठिकाना लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस साल अबतक 100 से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया जा चुका है। जबकि पिछले साल सुरक्षा बलों ने 165 आतंकवादियों का सफाया कर दिया था। इनमें बुरहान वानी जैसे आतंकी कमांडर का नाम भी शामिल है।

पहले दोस्ती का हाथ बढ़ा चुके हैं पीएम मोदी
ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को सुधरने का अवसर नहीं दिया है। उन्होंने अपने शपथग्रहण समारोह में पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ को बुलाया। यही नहीं जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा नहीं था, एक अच्छे पड़ोसी के नाते उन्होंने वो भी कर दिखाया। वो विदेश दौरे से लौटते समय सीधे नवाज की नातिन की शादी में पहुंच गये। पीएम मोदी के इस कदम से दुनिया हैरान थी। दुनिया को लगा कि पीएम मोदी ही ऐसे नेता हैं जो पाकिस्तान के साथ संबंधों को बेहतर कर सकते हैं। लेकिन दुख की बात है कि पाकिस्तान ने पीएम मोदी की दोस्ती की कद्र नहीं की और अब वो विश्व समुदाय में अलग-थलग पड़ चुका है।

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