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Corruption पर No Compromise की नीति पर चल रही मोदी सरकार !

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भ्रष्टाचार देश के लिए एक कोढ़ बन चुका है, लेकिन इसे खत्म करने के लिए मोदी सरकार कृत संकल्पित है। हर स्तर पर इसके खात्मे के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नोटबंदी से लेकर जीएसटी और डिजिटलाइजेशन से लेकर आधार की अनिवार्यता, इसी दिशा में उठाए गए कुछ ठोस कदम हैं। हालांकि देश की अर्थव्यवस्था में गहरे तक पैठ बना चुका ‘करप्शन प्रैक्टिस’ हर क्षेत्र में व्याप्त है। इसी का फायदा उठाकर नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, ललित मोदी और लालू यादव जैसे नाम हमारे सामने आते रहते हैं, लेकिन इतना तय है कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सख्त है और किसी भी हाल में समझौते को तैयार नहीं है।

नीरव-मेहुल का 17 देशों तक पीछा करेगी मोदी सरकार
पीएनबी घोटाले का मास्टरमाइंड नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर सरकार लगातार शिकंजा कस रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने ऐसे 15 से 17 देशों की पहचान की है, जहां नीरव मोदी और उसके अंकल मेहुल चोकसी समेत अन्य घोटाले से जुड़े लोगों का बिजनेस और संपत्तियां हैं। ईडी इसके लिए मुंबई के कोर्ट से लेटर्स रॉगेटरीज (LR) हासिल करेगी। दरअसल एलआर एक तरह का न्यायिक लेटर होता है जो किसी देश की कोर्ट किसी दूसरे देश की कोर्ट को किसी न्यायिक मदद के लिए जारी करती है। न्यायिक सहायता के लिए बेल्जियम, हांगकांग, स्विट्जरलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका में एलआर भेजे जाएंगे। न्यायिक मदद के अलावा भारतीय एजेंसियां विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों से भी आधिकारिक सहयोग की मांग करेंगी। इसके तहत इनकी संपत्तियां और आय के स्रोत की जांच की जाएगी और अगर उनका संबंध किसी भी तरह से पीएनबी घोटाले से पाया गया तो उन्हें भी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अटैच कर दिया जाएगा।

नीरव-मेहुल की अधिकतर संपत्तियां सरकार के कब्जे में
प्रवर्तन निदेशालाय नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रही है।

24 फरवरी, 2018
मनीलॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत नीरव मोदी समूह की 21 संपत्तियों को जब्त किया गया। इनमें अलीबाग का एक फॉर्म हाउस, अहमदनगर में 135 एकड़ जमीन, सोलर पावर प्लांट, और मुबंई और पुणे के रिहायशी और व्यवसायिक संपत्तियां शामिल है। जब्त की गई इन संपत्तियों की कीमत 523 करोड़ रुपये है।

23 फरवरी, 2018
प्रवर्तन निदेशालय ने नीरव मोदी की 44 करोड़ रुपये के बैंक जमा और शेयरों को जब्त कर लिया। ईडी को नीरव मोदी के ठिकाने से बड़ी संख्या में आयातित घडि़यां भी मिली है। इन घडि़यों को 176 स्टील आलमीरा, 158 गत्ते के कार्टून और 60 दूसरे बक्सों में रखा गया था।

22 फरवरी, 2018
ईडी ने नीरव मोदी के सात करोड़ 80 लाख रुपये और मेहुल चौकसी के 86 करोड़ 72 लाख रुपये के शेयर और म्युचुअल फंड में निवेश को फ्रीज कर दिया। इसके साथ ही नीरव मोदी की सात लक्जरी कारों को भी जब्त कर लिया।

10 दिनों में 192 छापे
गौरतलब है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से घोटाले की रकम वसूली में ईडी की तत्परता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 10 दिनों में वह 192 ठिकानों पर छापा मार चुकी है। इन छापों में अभी तक 5870 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। उनका पासपोर्ट सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही नीरव मोदी और उनके कनेक्शन्स के प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की जांच के दायरे में 200 शैल कंपनियां और बेनामी संपत्ति भी हैं।

विजय माल्या पर कसा शिकंजा
विजय माल्या को 8,040 करोड़ का लोन सितंबर 2004 में दिया गया था और फरवरी 2008 में उसकी समीक्षा की भी की गई थी। 2009 में कांग्रेस सरकार ने इतनी बड़ी राशि को डूबी हुई रकम बता दिया और उसे एनपीए घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं 2009 और 2016 में कांग्रेस सरकार ने फर्जी माल्या को राज्यसभा भेजकर सम्मानित भी किया। परन्तु, मोदी सरकार ने माल्या पर शिकंजा कसा तो वह लंदन भाग गया। हालांकि सरकार ने माल्या का पासपोर्ट भी रद्द कर दिया। विजय माल्या से लोन वसूली के लिए 17 बैंकों का कंसोर्टियम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में कार्रवाई की जा रही है। माल्या की 6000 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त भी का जा चुकी है। अब तक कई जांच एजेंसियों से माल्या को समन भेजा जा चुका है। इसके साथ ही सरकार उसका प्रत्यर्पण कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।

ललित मोदी को भी नहीं बख्शेगी
ललित मोदी पर आईपीएल में वित्तीय घोटाले के आरोप लगे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2010 में फेमा के तहत मुकदमा दर्ज किया। जाहिर है के तहत मामला उन्हें बचाने के लिए किया गया। 2014 के मई तक कांग्रेस की सरकार ही केंद्र में रही, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर कांग्रेस की नीयत ठीक रहती तो ललित मोदी पर मनी लॉंड्रिंग के तहत कार्रवाई की जाती जिससे रुपये रिकवर होने के मौके अधिक होते और उन्हें सजा भी मिलती, लेकिन कांग्रेस सरकार ने ढिलाई बरती। इसके अलावा उनके विरुद्ध लाइट कॉर्नर नोटिस जारी किया गया जो कि घरेलू उड़ानों हवाई अड्डों को दिया जाता है।  अगर कांग्रेस चाहती तो उनके विरुद्ध रेड कॉर्नर या ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी कर सकती थी। हालांकि सरकार बदलने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने उनपर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन वह कानून की खामियों का फायदा उठाकर फरार हो गया। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने सख्ती की और उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है। इसके साथ ही ब्रिटेन की सरकार से लगातार उसे वापस देश के कानून की गिरफ्त में लाने के लिए बातचीत कर रही है।

मीसा भारती का फार्म हाउस जब्त
लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती और उनके पति शैलेश यादव के दिल्ली स्थित एक फॉर्म हाउस को प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त कर लिया है। ईडी की इस कार्रवाई के साथ ही दोनों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। ईडी ने कोर्ट के आदेश पर कार्वाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ईडी अब उनकी अन्‍य संपत्तियों को भी जब्‍त करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है।

भ्रष्टाचार में सजा भुगत रहे लालू यादव
चारा घोटाले में भी प्रधानमंत्री मोदी ने सख्त रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद पर भी कड़ी कार्रवाई करने में कोताही नहीं की। लालू यादव आज चारा घोटाला के कई मामलों में दोषी सिद्ध हो चुके हैं और सजा भुगत रहे हैं। उन्हें चारा घोटाले से जुड़े तीन मामलों में अब तक सजा हो चुकी है। एक में पांच वर्ष, दूसरे में साढ़े तीन वर्ष और तीसरे में तीन वर्ष की सजा मिली है। 

भ्रष्ट अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई 
प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार पर सख्ती दिखाते हुए नौकरशाहों को भी नहीं बख्शा है। मोदी सरकार के साढ़े तीन सालों के भीतर अब तक  63 आइएएस-आइपीएस-आइआरएस अधिकारियों पर केस किया गया है जिनमें से 13 अधिकारी बर्खास्त किए गए हैं। जबकि दूसरी ओर यूपीए के 2011-13 के दौरान 31 आला अधिकारियों पर केस किए गए, लेकिन प्रक्रिया 2 पर ही आगे बढ़ी और सजा का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 

जाहिर है मोदी सरकार हर स्तर पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई करने को तत्पर है और लगातार इस दिशा में कार्यरत है। मोदी सरकार ने इसके लिए कई तरह के कानून को जमीन पर भी उतारा है। आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही कानून के बारे में-

फरार आर्थिक अपराधी विधेयक
निरव मोदी और विजय माल्या जैसे आर्थिक अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसने के इरादे से केंद्र सरकार ‘फरार आर्थिक अपराधियों’ की संपत्तियां जब्त करने के लिए कड़ा कानून बना रही है। ‘फरार आर्थिक अपराधी विधेयक, 2017’ के मसौदे में प्रावधान किया गया है कि जो आर्थिक अपराधी भारतीय कानून से बचे रहते हैं, वे इस प्रक्रिया से न बच पाएं।

मसौदे के मुख्य बिंदु-

  • आर्थिक अपराध विधेयक के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को फरार आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया जाता है तो उसकी संपत्ति जब्त की जा सकेगी।
  • सिर्फ वे मामले इस विधेयक के दायरे में आएंगे, जिनमें अपराध की राशि 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हो, जिससे न्यायालयों पर बहुत ज्यादा भार नहीं पड़े।
  • विधेयक में पीएमएलए के तहत विशेष न्यायालय गठित करने का प्रावधान, जो व्यक्ति को ‘फरार आर्थिक अपराधी’ घोषित करेगा।
  • इस अधिनियम के तहत कार्रवाई तब बंद कर दी जाएगी जब कथित भगोड़ा आर्थिक अपराधी भारत वापस आ जाएगा और अपने को उचित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर देगा।

संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा (Asset Quality Review)
मोदी सरकार ने कर्ज नहीं चुकाने वाले बड़े बकायेदारों की जिम्मेदारी तय की है और विभिन्न उपायों के जरिए बैंकों को मजबूत किया जा रहा है। नियमित रूप से कर्ज की वापसी नहीं करने के बावजूद 2008- 2014 के बीच बड़े कर्जदारों को बैंकों से कर्ज देने के लिये दबाव डाला जाता रहा। वास्तव में जो कर्ज NPA श्रेणी में जा चुके थे उन्हें नियमित कर्ज बनाये रखने के लिए कॉरपोरेट ऋण पुनर्गठन के तहत उनका पुनर्गठन किया गया। 2015 की शुरुआत में, वर्तमान सरकार ने एसेट क्वालिटी रिव्यू (एक्यूआर) के बाद एनपीए की समस्या को मानते हुए वर्गीकृत किया। पीएसबी में एनपीए की सही मात्रा की मान्यता ने मार्च 2017 तक एनपीए की रकम 2.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.33 लाख करोड़ रुपये की कर दी।

इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड
इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड 2016 (आईबीसी) के कानून बन जाने से दिवालिया कंपनियों के प्रोमोटर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं और वे दोबारा कंपनियों में हिस्सेदारी नहीं खरीद पा रहे हैं। बैंकरप्सी कानून में होने वाले बदलाव से सरकारी बैंकों को बड़ा फायदा हो रहा है। मोदी सरकार ने 2016 में बैंकरप्सी को बैंकरप्सी कोड के तहत लाया है। सरकार ने कोड 1 अक्टूबर, 2017 को नियामक के रूप में भारतीय दिवालियापन और दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) की स्थापना की थी।

पीएसबी पुनर्पूंजीकरण (PSB Recapitalisation)
24 अक्टूबर 2017 को, अगले दो वर्षों में 2.11 लाख करोड़ रूपये की एक पूर्ण पीएसबी पुनर्पूंजीकरण योजना की घोषणा की गई। इसमें पूंजी अधिग्रहण योजना (capital infusion plan) का प्रमुख घटक (64%) के रूप में पुनर्पूंजीकरण बांड की घोषणा की गई। 24 जनवरी, 2018 को 88,000 करोड़ रुपये की पूंजी योजना की घोषणा के साथ, बैंक पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई।

एफआरडीआई विधेयक (FRDI Bill)
ड्राफ्ट एफआरडीआई विधेयक एक और सक्रिय कदम है, जहां एक संकल्प निगम (आरसी) प्रस्तावित किया गया है, जो कि वित्तीय संस्थानों में संकट की शुरुआती चेतावनी के संकेतों की पहचान करेगा। यह भविष्य में दिवालिया होने से वित्तीय संस्थानों की रक्षा करेगा, और यदि ऐसा हो, तो निपटने के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा। आज तक कोई ऐसी प्रणाली भारत में मौजूद नहीं है।

पूंजी अधिग्रहण योजना
24 अक्टूबर 2017 को, अगले दो वर्षों में 2.11 लाख करोड़ रूपए की एक पूर्ण पीएसबी पुनर्पूंजीकरण योजना की घोषणा की गई। इसमें पूंजी अधिग्रहण योजना (capital infusion plan) का प्रमुख घटक (64%) के रूप में पुनर्पूंजीकरण बांड की घोषणा की गई। 24 जनवरी, 2018 को 88,000 करोड़ रुपये की पूंजी योजना की घोषणा के साथ, बैंक पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई।

FRDI विधेयक
प्रस्तावित वित्तीय संकल्प और जमा बीमा (एफआरडीआई) विधेयक, 2017 में जमाकर्ताओं के ‘वर्तमान अधिकारों की सुरक्षा की गई है और उसे बढ़ाया गया है और वित्तीय कंपनियों के व्यापाक और कुशल समाधान शासन लाने की कोशिश है। दरअसल वर्तमान में समाधान के लिए कोई व्यापक और एकीकृत कानूनी ढांचा नहीं है, जिसमें ‘भारत में वित्तीय कंपनियों का तरलीकरण भी शामिल है। एफआरडीआई विधेयक एक ‘समाधान निगम’ और एक व्यापक शासन स्थापित करने का प्रस्ताव करता है ताकि एक असफल वित्तीय फर्म को समयबद्ध और व्यवस्थित समाधान के लिए सक्षम किया जा सके।

बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम
Benami Transactions (Prohibition)Act भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है, जो बेनामी लेनदेन पर रोक लगाता है। 1988 के में 1 नवंबर, 2016 को संशोधित कर कानून को कड़ा बनाया है। संशोधित बिल में बेनामी संपत्तियों को जब्त करने और उन्हें सील करने का अधिकार है। इसके साथ ही जुर्माने के साथ कैद का भी प्रावधान है। भारत में काले धन की बढ़ती समस्या को खत्म करने की दिशा में एक और कदम है। दरअसल बेनामी संपत्ति वह है जिसकी कीमत किसी और ने चुकाई हो लेकिन नाम किसी दूसरे व्यक्ता का हो। यह संपत्ति पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदी गई होती है।

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