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देखिए क्या है मुसलमानों के प्रति कांग्रेस की सोच- गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें वहीं रहने दो

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कांग्रेस शुरू से मुसलमानों को वोट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं समझती रही है। वोट बैंक के लिए मुस्लिम तुष्टिकरण का इस्तेमाल करती रही है। कांग्रेस की इस सोच और मानसिकता का पर्दाफाश लोकसभा में मंगलवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘महिला सशक्तिकरण के लिए कांग्रेस को कई बड़े मौके मिले, लेकिन हर बार वो चूक गए। 1950 के दायरे में समान नागरिक संहिता पर बहस के दौरान वे पहला मौका चूके। इसके 35 साल बाद शाहबानो केस के दौरान एक और मौका गंवाया। अब तीन तलाक बिल के रूप में इनके पास एक और मौका है।’ प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में हुए शाहबानो केस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मुस्लिमों के गटर में रहने देने की बात कही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने किसी के नाम का जिक्र न करते हुए कहा, ‘जिस वक्त शाहबानो केस चल रहा था तो कांग्रेस एक मंत्री ने कहा था, मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है, देखिए गंभीर बात है मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है। इफ दे वॉन्ट टू लाइव इन गटर, लेट देम बी।’

 

 

प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद संसद में कांग्रेस नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया और नेता का नाम पूछने लगे, इसपर पीएम मोदी ने कहा कि यूट्यूब का लिंक भेज देंगे। बाद में तत्कालीन गृहराज्य मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने उस मंत्री के नाम का खुलासा कर दिया, जिन्होंने मुस्लिमों को ‘गटर’ में रहने देने की बात कही थी।

दरअसल 23 अप्रैल 1985 को तीन तलाक के केस में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानों के पक्ष में फैसला सुनाया था। मुस्लिम वोट बैंक खिसकने के डर से राजीव गांधी सरकार ने अदालत के फैसले को पलट दिया। आरिफ मोहम्मद खान कोर्ट के फैसले को पलटने के खिलाफ थे। इस मामले पर आरिफ मोहम्मद खान को मनाने के लिए नरसिम्हा राव को भेजा गया। नरसिम्हा राव ने उन्हें कहा कि तुम इतनी जिद्द क्यों करते हो। हम समाज सुधारक नहीं हैं। अगर मुसलमान गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें वहीं रहने दो।

आरिफ मोहम्मद खान ने यह बात एबीपी न्यूज के साथ इंटरव्यू में भी कही थी। देखिए-

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